विधानमंडल में हंगामे पर भाजपा का एक और हमला, कहा- सपा में वंशवाद, जातिवाद का नंगा नाच
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समाजवादी विचारधारा को आतंकवाद, वंशवाद और भ्रष्टाचार का पोषक बताने के विरोध में सोमवार को सपाइयों द्वारा विधानमंडल के दोनों सदनों में हंगामे व नारेबाजी के बीच संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने तीखा पलटवार किया। कहा कि ये वंशवाद की परिभाषा नहीं जानते। सपा में वंशवाद है, सपा शासन में जातिवाद का नंगा नाच किया गया।
सीएम योगी आदित्यनाथ त्यागी, तपस्वी और संन्यासी हैं, पूरा सदन उनका सम्मान करता है। खन्ना ने कहा, नेता सदन (मुख्यमंत्री) सदन में नहीं हैं। वह डॉ. लोहिया का सम्मान करते हैं। सदन में अखबार में छपी खबर का संज्ञान नहीं लिया जाता। नेता प्रतिपक्ष के पास गलत सूचनाओं का जखीरा रहता है। उन्हें पूरी परिस्थिति की जानकारी नहीं है। जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को खबर को सत्यापित किए बगैर ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री का पद सम्मानित है। सदन में ऐसा कुछ नहीं कहा गया जिस पर आपत्ति हो।
उन्होंने कहा, चर्चा कराने की सपा की मांग स्वीकार योग्य नहीं है। नेता प्रतिपक्ष को अपनी भाषा पर पुनर्विचार करना चाहिए। सपा राज में बजट का बंटवारा एक जाति विशेष के लिए होता था। सपा का सदन को बाधित करने का सुनियोजित षडयंत्र है। ये जनता का फैसला स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इनकी सरकार में सिमी को क्लीन चिट दी गई।
आतंकवादियों को कौन कंधार छोड़कर आया
वहीं, इसके जवाब में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा, मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की वजह से समाजवादियों को वंशवादी बताया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि गोरक्षनाथ पीठ पर महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ और फिर योगी आदित्यनाथ, ये वंशवाद है या नहीं?
क्या सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में नहीं डूबी है? मालेगांव विस्फोट में गिरफ्तार किए गए साध्वी प्रज्ञा और पुरोहित क्या संघ से जुड़े नहीं थे। उन्होंने सवाल किया कि वाजपेयी सरकार में अजहर मसूद व अन्य आतंकियों को तत्कालीन विदेश मंत्री कंधार छोड़कर आए। बताइए, आतंकवादी कौन है?
माफी मांगने के बाद ही चलने देंगे परिषद
परिषद में नेता विपक्ष अहमद हसन ने कहा, इलाहाबाद की घटना ने प्रदेश को हिला कर रख दिया है। प्रदेश में अराजकता का माहौल है। आरोप लगाया कि सरकार फर्जी एनकाउंटर करवा रही है। जब तक मुख्यमंत्री अपने बयान पर माफी नहीं मांगते तब तक सदन को नहीं चलने दिया जाएगा। कार्यवाही स्थगित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए सपा एमएलसी सुनील साजन ने कहा, मुख्यमंत्री ने समाजवादियों को आतंकवादी कहकर लोहिया, जेपी और जनेश्वर मिश्र का अपमान किया है। मुख्यमंत्री को इतिहास पढ़ना चाहिए और यह पता करना चाहिए कि देश के लिए समाजवादियों और संघ का क्या योगदान है?
मुख्यमंत्री से देश व समाजवादियों से माफी मांगने की अपील की
दरअसल, मुख्यमंत्री के बयान के विरोध में सपा सदस्यों ने सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दी। उन्होंने वेल में आकर नारेबाजी की और धरना दिया। सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान की निंदा करते हुए उनसे समाजवादियों और देश से माफी मांगने की मांग की। हंगामे के चलते विधानसभा में सदन की कार्यवाही प्रश्न काल के बाद बाधित रही। विधानसभा अध्यक्ष ने 2.25 बजे सदन की कार्यवाही मंगलवार सवेरे 11 बजे तक स्थगित कर दी। विधान परिषद की कार्यवाही भी पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गई।
विधानसभा में प्रश्न काल खत्म होते ही नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कार्यवाही रोककर मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा, संविधान में समाजवाद शब्द का उल्लेख है। मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले अपने भाषण में समाजवादी विचारधारा को आतंकवाद, भ्रष्टाचार और वंशवाद का पोषक बताया है। देश को आजाद कराने और विकास के रास्ते पर ले जाने में समाजवादियों की अहम भूमिका रही है।
शहीद भगत सिंह, डॉ. लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव, एसएन जोशी, राजनारायण, चंद्रशेखर और जनेश्वर मिश्र जैसे नेता समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं। भारत छोड़ो आंदोलन में समाजवादियों का प्रमुख योगदान रहा। समाजवादी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद 1942 में जयप्रकाश नारायण हजारीबाग जेल फांदकर बाहर आए और नौजवानों को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जिम्मेदार पद पर बैठे नेता द्वारा समाजवादियों को आतंकवाद का पोषक बताना निंदनीय है। मुख्यमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा सदस्यों ने इस पर विरोध जताया। वे अपनी सीटों पर खड़े हो गए। सपा सदस्य वेल में आ गए। वे सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। कुछ सदस्य वेल में ही धरने पर बैठ गए। अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सपा सदस्यों से बार-बार सीट पर जाने का आग्रह किया। नहीं मानने पर 12.34 बजे सदन की कार्यवाही पहले 15 मिनट और फिर 1.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद फिर 10 मिनट के लिए स्थगन बढ़ाया गया। अध्यक्ष 1.40 बजे सदन में आए तो सपा का हंगामा जारी था। 1.43 बजे फिर पहले 10 और 20 मिनट के लिए कार्यवाही रोकी गई। अध्यक्ष ने 2.18 बजे फिर सपा सदस्यों को शांत करने की कोशिश की। नारेबाजी नहीं रुकने पर उन्होंने कहा, अव्यवस्थित सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा संभव नहीं है। 2.25 बजे उन्होंने कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
विधान परिषद की कार्यवाही भी ठप
विधान परिषद की कार्यवाही भी हंगामे के कारण नहीं चल सकी। सपा ने पहले इलाहाबाद में दलित छात्र की हत्या का मामला उठाया और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा समाजवादियों को आतंकवादी कहने पर हंगामा किया। सभापति रमेश यादव ने पहले 30 मिनट फिर 12 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित की। महज चार मिनट में एजेंडा निपटाने के बाद उन्होंने कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।
सवेरे कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने इलाहाबाद में दलित छात्र को पीट-पीट कर मार डालने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, अपराधी बेखौफ हो गए हैं। लखनऊ में भाजपा नेता के बेटे की हत्या हो जा रही है। राजधानी में ही तीन-तीन घंटे डकैती पड़ रही है और मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा।
बसपा के नेता सदन सुनील चित्तौड़ ने भी प्रदेश की खराब कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। महेंद्र सिंह ने कहा, अभी प्रश्नकाल का समय है। नेता प्रतिपक्ष किस नियम के तहत इस पर चर्चा कर रहे हैं। इस पर सपा सदस्य और उत्तेजित हो गए और हाथों में अखबारों में छपी खबर की कटिंग के साथ वेल में आकर हंगामा करने लगे। उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री माफी मांगें।