नमक बंद होने की अफवाह में हो सकता है बीजेपी- आरएसएस का हाथ: अखिलेश
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यूपी के सीएम अखिलेश यादव लखनऊ में एक कार्यक्रम में काले धन और नमक की अफवाह पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि नमक की अफवाह फैलाने के पीछे आरएसएस और बीजेपी का हाथ भी हो सकता है।
उन्होंने कहा, रात में खबर आई और हमने रात में ही अफवाह रोकी। जितने माध्यम हैं हर माध्यम से हमने सूचना दी कि आपको भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है, सब चीज पर्याप्त है।
कालेधन को लेकर सीएम अखिलेश ने कहा, काला धन सामने आए, इससे बाजार न चले और किसी के पास काला धन न हो ये अच्छी बात है। इकोनोमिस्ट कहते हैं कि कालाधन हमें कहीं-कहीं बचा लेता है, खैर ये बुद्धिजीवियों की बात है लेकिन वर्तमान में लोगों 10-15 किमी जाकर पैसे के लिए लाइन लगानी पड़ रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आप बता दें कि यूपी में कितने बैंकों की ब्रांचों में पैसा पहुंच गया है। अखिलेश ने कहा है कि इस बड़े कदम को उठाने से पहले कोई तैयारी नहीं थी।
वहीं नेताओं के पास कालेधन के बारे में अखिलेश ने कहा कि आप कभी भी मेरी जेब चेक कर लो अगर एक रुपये भी मिल जाए तो कहिएगा। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जब से कुर्ता-पायजामा पहनना शुरू किया है तब से जेब में पैसा रखना बंद कर दिया है।
वहीं मायावती के पास कालेधन के सवाल पर अखिलेश ने फिर बात घुमा दी और कहा कि मैं उन्हें मायावती नहीं बोलता हूं और अपनी बुआ के खिलाफ मैं कुछ नहीं कह सकता। वहीं उन्होंने इशारे में कहा कि हां अगर आप बुआ के घर जाएंगे तो आपको कुछ न कुछ जरूर मिलेगा इसलिए मैं बुआ के खिलाफ कुछ नहीं बोलता।
परिवारिक झगड़े से जुड़े सवालों पर जब अखिलेश से कहा गया कि ये झगड़े आपकी छवि मजबूत करने के लिए प्लानिंग के तहत किए गए तो उन्होंने जवाब दिया कि अगर मैं इस बात का जवाब दूंगा तो मुझे बहुत सारी कहानियां बतानी पड़ेंगी और कुछ ‘बाहरी दुश्मनों’ के नाम भी सामने आ जाएंगे।
नई पार्टी बनाने के जवाब पर उन्होंने कहा, मैंने नेताजी के घर जन्म लिया, मैं तो बचपन से ही समाजवादी हूं। पार्टी मेरी है तो मुझे नई पार्टी बनाने की जरूरत भला क्यों पड़ेगी।
अखिलेश ने कहा कि हमेशा आरोप लगते रहे हैं। पहले पार्टी में साढ़े चार मुख्यमंत्री होने का आरोप लगता था अब आरोप लगा कि मैं नई पार्टी बना रहा हूं। वहीं अखिलेश ने ये भी कहा कि परिवार में अब कोई झगड़ा नहीं है।
वहीं विपक्षियों का जिक्र कर रहे अखिलेश ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, एक की चर्चा तो मैं इसलिए नहीं करूंगा कि वह हमारी लड़ाई में नहीं, हमारे साथी हो सकते हैं...वो है ‘खाट वाला’ मामला।