{"_id":"9f2f4ad86f32948ec782d608653eb3f8","slug":"biochemistry-lab-grown-duty-no-staff","type":"story","status":"publish","title_hn":"बायोकेमेस्ट्री लैब में ड्यूटी बढ़ी, स्टाफ नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बायोकेमेस्ट्री लैब में ड्यूटी बढ़ी, स्टाफ नहीं
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 17 Jun 2014 08:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के बायोकेमेस्ट्री विभाग की लैब में इमरजेंसी जांच की जिम्मेदारी से वहां के कर्मचारियों की हालत खराब है।
विज्ञापन
आठ घंटे चलने वाली लैब को 24 घंटे शुरू कर दिया गया है लेकिन टेक्नीशियन व अन्य कर्मचारी बढ़ाए ही नहीं गए हैं। एक-एक कर्मचारी 16-16 घंटे काम करने से तनाव में है। सभी विभागाध्यक्ष से मिलकर स्टाफ बढ़ाने की मांग करेंगे।
विज्ञापन
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर, क्वीन मेरी और मेडिसिन विभाग में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की बायोकेमेस्ट्री जांच के लिए इमरजेंसी व्यवस्था की गई है। पहले खून की जांच की व्यवस्था पैथालॉजी विभाग को दी जा रही थी।
विज्ञापन
उनके हाथ खड़ा करने के बाद ये जिम्मेदारी बायोकेमेस्ट्री विभाग को दे दी गई। लैब में तैनात कर्मचारियों ने कार्य तो 24 घंटे शुरू कर दिया लेकिन बिना अतिरिक्त स्टाफ के सभी को 16-16 घंटे कार्य करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ बढ़ाने के लिए विभागाध्यक्ष प्रो. अब्बास मेहंदी से बात की जाएगी। गौरतलब है कि बायोकेमेस्ट्री लैब में नौ कर्मचारी हैं। इन्हीं से पूरी लैब का संचालन किया जा रहा है।
एक दिन में 200 से अधिक सैंपल वहां जांच के लिए आते हैं। 24 घंटे सेवाएं देने से कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य करना पड़ रहा है।
बायोकेमेस्ट्री लैब में लिपिड प्रोफाइल, थायरायड टेस्ट, शुगर, एचबीए1 सी, किडनी व लिवर फंक्शन टेस्ट जैसी जांचें होती हैं। रिपोर्टिंग अच्छी होने के कारण इस लैब में सैंपल अधिक आने लगे। लेकिन लैब की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं।
मरीजों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ये जांचें जिस मशीन पर की जा रही हैं अभी उनके लिए जनरेटर बैकटप की व्यवस्था नहीं है। बिजली जाने पर मशीनें ठप हो जाती हैं।
इसके चलते कर्मचारियों को जांच के लिए सैंपल दोबारा लगाने पड़ते हैं, क्योंकि इससे गलत रिपोर्ट आने की संभावना हो सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना जनरेटर बैकअप के 24 घंटे जांच की सुविधा मरीजों की जान संकट में डाल सकती है।