प्रधानी चुनाव में किया बवाल तो पड़ेगा बेहद महंगा
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जरा सी बात पर झगड़ने वालों को प्रधानी के चुनाव में झगड़ा करना खासा महंगा पड़ेगा। मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचते ही जमानत नहीं, बल्कि 14 दिन सलाखों के पीछे काटने होंगे।
डीआईजी ने छह जिलों के सीओ और थानेदारों को चुनावी मुद्दे पर शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को कोर्ट में पेशी के दौरान दोबारा फसाद की आशंका जताते हुए रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
डीआईजी रेंज देवेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि प्रधानी चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ प्रत्याशियों व समर्थकों में तनातनी की शिकायतें मिलनी शुरू हो गई हैं।
चुनाव में शांति बनाए रखने के लिए लखनऊ, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, रायबरेली व उन्नाव के सभी सीओ व थानेदारों को खास निर्देश दिए गए हैं।
चुनाव को लेकर झगड़ने वाले व्यक्तियों को शांति भंग में गिरफ्तार करके मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने के दौरान रिपोर्ट दी जाएगी कि उसकी रिहाई से दोबारा झगड़े की आशंका है और माहौल बिगड़ सकता है।
चुनाव बाद ही होगी रिहाई
इसके साथ गिरफ्तार व्यक्तियों को 14 दिन जेल में भेजने की सिफारिश की जाएगी। ऐसी दशा में चुनाव को लेकर झगड़ने वाले व्यक्ति प्रधानी चुनाव के बाद ही रिहा हो सकेंगे।
डीआईजी ने कहा कि प्रधानी के चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा समर्थकों को साथ लेकर झगड़े व मारपीट की शिकायतें मिली हैं। चुनावी मुद्दे पर झगड़ा करने पर गिरफ्तार प्रत्याशी भी तुरंत जमानत नहीं पा सकेंगे।
कत्ल पर नपेंगे थानेदार
चुनाव के मद्देनजर लखनऊ रेंज के सभी थानेदारों को अराजक तत्वों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। अवैध शराब व असलहों की बरामदगी का अभियान चलाया गया।
अब यदि किसी भी इलाके में चुनाव को लेकर किसी की हत्या का मामला सामने आया तो सबसे पहले थानेदार पर कार्रवाई होगी।