API अंसल कांड: ठाकुर को बनाया OBC, यादव को SC
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एपीआई अंसल ने गरीबों के लिए जिन आठ हजार आवासों का पंजीकरण किया था, उनमें लखनऊ विकास प्राधिकरण को भारी खामियां मिली हैं।
ऐसे में अब एलडीए ने इन सभी पंजीकरणों की नए सिरे से जांच करवाने का फैसला किया है। खामियां आमतौर से आरक्षण के संबंध में रही हैं जिसमें ठाकुर आवेदक को पिछड़े वर्ग में और यादव आवेदनकर्ता को अनुसूचित जाति में रख दिया गया।
ये खामियां सामने आने के बाद सारे आवेदनों की जांच कराने का फैसला किया गया है। अब जांच के बाद जितने भी वैध पंजीकरण होंगे उनको और नये सिरे से पंजीकरण खोल कर सारे आवेदकों को एक साथ मिलाकर नए सिरे से लॉटरी करवाई जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद एलडीए, आवंटियों की सूची एपीआई अंसल को देगा।
रिजर्वेशन में हुआ बड़ा खेल
नए शासनादेश के मुताबिक निजी डवलपर्स को अब प्राधिकरण के जरिए ही गरीब आवास बेचने होंगे। आवंटन के साथ ही पंजीकरण भी अब एलडीए ही करेगा। इसका सीधा मतलब है कि निजी कंपनियां आवेदन फॉर्म प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगी और इसके बाद एलडीए ही फॉर्म बेच कर पंजीकरण करवाएगा।
फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने के मामलों और मनमाने आवंटन की शिकायतों के बाद नियमों में बदलाव किया गया है। कंपनी को अब प्राधिकरण के नियमों के हिसाब से ही पंजीकरण और आवंटन करना पड़ेगा। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। फॉर्म और पंजीकरण से होने वाली आय निजी कंपनी के ही हवाले कर दी जाएगी।
इस नये शासनादेश की सबसे पहली गाज एपीआई अंसल के आवेदकों पर गिरने जा रही है। एपीआई अंसल करीब 8000 गरीब आवासों के आवंटन की तैयारी में है जिसमें कई कमियां पाई गई हैं। इस संबंध में सामने आया कि, आय प्रमाण पत्र कई जगह गलत पाए गए हैं। इसके अलावा आरक्षण के निर्धारित मानकों को ही गलत ठहरा दिया गया है।
ठाकुर आवेदकों को पिछड़ा वर्ग में और यादव आवेदकों को अनुसूचित जाति के आवेदकों में शामिल कर लिया गया है। हालांकि कंपनी की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है कि ऐसा भूलवश हुआ है मगर प्राधिकरण के अधिकारी इस तर्क को उचित नहीं मान रहे हैं। इसलिए मामले की नए सिरे से जांच कराने का फैसला किया गया है।
एकीकृत कमेटी दिलाएगी आवंटियों को कब्जा
आवासीय योजनाओं के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे को लेकर बिना किसी जायज वजह अड़ंगेबाजी कर आम शहरियों को परेशान करना अब भारी पड़ेगा।
जिला प्रशासन अब मुआवजा राशि की आड़ में किसानों को भड़का कर आंदोलन कराने वालों पर शिकंजा कसेगा। ऐसे लोगों पर शांतिभंग के साथ ही सरकारी कार्य में बाधा डालने की धाराओं में मामला दर्ज करा कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए एलडीए के साथ मिलकर जल्द ही एकीकृत कमेटी गठित होगी। इसका उद्देश्य गोमतीनगर विस्तार, जानकीपुरम, एलडीए कानपुर रोड सहित अन्य जगहों पर किसानों के आंदोलन के कारण अधूरी पड़ी आवासीय योजनाओं के कार्यों को त्वरित स्तर पर पूरा करा आवंटियों को कब्जा दिलाने का होगा।
एलडीए की आधा दर्जन आवासीय योजनाओं में अधिग्रहीत भूमि की मुआवजा राशि बढ़ाने को लेकर चल रहे किसान आंदोलनों से आवंटी व प्रशासन दोनों परेशान हैं। किसान संगठनों से जुड़े ऐसे धरना प्रदर्शन रोकने को ही अब जिलाधिकारी के निर्देश पर एक एकीकृत कमेटी का गठन किया जाएगा।
यह कमेटी ऐसे मामलों में संबंधित संगठन से बातचीत करेगी। अगर इससे बात नहीं बनती तो कमेटी की संस्तुति पर ही बिना कारण आंदोलन की आड़ में धरना प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करा कार्रवाई होगी। आंदोलनों के कारण ही एलडीए की कई योजनाओं का कार्य लेटलतीफी का शिकार है।