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बड़ा खुलासा: यूपी में 10 हजार बिजली मीटर मिले घटिया, कंपनी का भुगतान रोका, काली सूची में डालने की तैयारी

Tue, 01 Oct 2024 06:27 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 01 Oct 2024 06:27 AM IST
सार

Eelectricity department fraud: यूपी बिजली विभाग में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश में करीब 10952 बिजली मीटर घटिया मिले हैं। मीटर लगाने वाली कंपनी का भुगतान रोक दिया गया है। 

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Big disclosure: 10 thousand electricity meters found substandard in UP, company's payment stopped, preparation
बिजली मीटर।

विस्तार

 प्रदेश में करीब 10952 बिजली मीटर घटिया मिले हैं। मीटर लगाने वाली कंपनी का भुगतान रोक दिया गया है। उसे काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नियमानुसार सालभर में एक फीसदी मीटर खराब होने की आशंका रहती है, जबकि यहां 4.86 फीसदी मीटर खराब पाए गए हैं। अब पूरे प्रदेश में नए सिरे से बिजली मीटरों की जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले पश्चिमांचल में घटिया किस्म की केबिल पकड़ी गई थी।

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उत्तर प्रदेश में करीब 3.45 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के घरों में मीटर संबंधित विद्युत वितरण निगम द्वारा मीटर लगाया जाता है। वर्ष 2023 में लिंकवेल टेलीसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने दक्षिणांचल में तीन अनुबंध के जरिए 2.25 लाख और मध्यांचल में एक लाख साधारण मीटर की आपूर्ति की गई। इस दौरान सालभर के अंदर ही दक्षिणांचल में 10952 मीटर खराब मिले। मीटरों में डिस्प्ले न होना, मीटर रीडिंग उपकरणों में गड़बड़ी सहित कई तरह की अनियमितता पाई गई है। ऐसे में दक्षिणांचल ने संबंधित कंपनी का भुगतान रोक दिया है। कंपनी की प्रतिभूति राशि जब्त करने और उसे काली सूची में डालने के लिए अंतिम नोटिस भी जारी कर दी गई है। दूसरी तरफ मध्यांचल सहित पूरे प्रदेश में मीटरों की नए सिरे से जांच शुरू कर दी गई है। जांच शुरू होते ही पूरे प्रदेश में हलचल मची हुई है।
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क्या है नियम
किसी भी कंपनी की ओर से लगने वाले मीटर में एक साल के अंतर एक फीसदी की खराबी पर संबंधित कंपनी को मुफ्त में मीटरों को बदलना पड़ता है। तीन साल के अंदर डेढ़ फीसदी की खराबी पर एक साल के लिए कंपनी को काली सूची में डाला जाता है। पांच साल के अंदर दो फीसदी की खराबी पर कंपनी को दो साल के लिए काली सूची में डालने और उसकी जमानत राशि जब्त करने का नियम है। दक्षिणांचल में पकड़ सालभर के अंदर के ही 4.86 फीसदी मीटर गड़बड़ मिले हैं।
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काली सूची में डाली जा चुकी हैं कंपनियां
गोवा में स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर काली सूची (ब्लैक लिस्टेड) में डाली गई एचपीएल को उत्तर प्रदेश में भी काली सूची में डाल दिया गया है, जबकि जीनस को काली सूची में डालने की तैयारी है। इन दोनों कंपनियों ने प्रदेश के विभिन्न विद्युत वितरण निगमों में स्मार्ट मीटर लगाने का टेंडर हासिल किया है। उत्तर प्रदेश में करीब 27 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसमें पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने मेसर्स जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को करीब 7200 करोड़ की लागत से स्मार्ट मीटर लगाने का काम दिया है। इसी तरह दो अन्य कंपनियों ने टेंडर हासिल करके मीटर लगाने का काम (सबलेट) एचपीएल इलेक्ट्रिक पावर लिमिटेड को दिया गया है। इसी तरह पश्चिमांचल में माहभर पहले विभागीय जांच में घटिया केबिल पकड़ी गई थी। इस केबिल के लगने से न सिर्फ शार्ट सर्किट की आशंका बनी रहती बल्कि किसी भी वक्त बड़ा हादसा भी हो सकता था।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
बिजली संबंधी कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा। सभी निगमों के प्रबंध निदेशकों, निदेशकों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी गड़बड़ी मिले तत्काल कार्रवाई करें। थर्ड पार्टी जांच भी कराई जा रही है। - डा. आशीष कुमार गोयल, अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन


उपभोक्ताओं के हितों से हो रहा खिलवाड़
प्रदेश में घटिया मीटर लगाए जा रहे हैं। विभागीय जांच में अपने आप तथ्य सामने आ रहे हैं। पश्चिमांचल में घटिया केबिल मामले में संबंधित कंपनी के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गी। गुणवत्ता से समझौता करने का मतलब है कि उपभक्ताओं के हितों से खिलवाड़ करना। परिषद की मांग है कि दागी कंपनियों के काम पर तत्काल रोक लगे। जितने मीटर लगे हैं, उनकी गुणवत्ता जांची जाएं।- अवधेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष उपभोक्ता परिषद





 

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