कांठ मामले पर हाईकोर्ट का 'बड़ा फैसला'
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद की कांठ तहसील के नया गांव अकबरपुर छेदरी के शिव मंदिर में लाउड स्पीकर बजाने की इजाजत देने से इंकार कर दिया है।
मगर याचीगण को यह छूट दी है कि वह चाहे तो संबंधित अधिकारी (जिला प्रशासन) से अनुमति मांग सकते हैं। यदि प्रशासन के समक्ष ऐसा कोई आवेदन आता है तो वह उस पर ध्वनि प्रदूषण के नियमों और सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए निर्णय ले।
चुन्नू सिंह और दस अन्य ने याचिका दाखिल कर मंदिर पर कुछ समय के लिए लाउड स्पीकर बजाने की अनुमति मांगी थी।
शिकायत होने पर तत्काल हो कार्रवाई
न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम मुराबादबाद को निर्देश दिया है कि जिले में किसी भी धार्मिक स्थल, इमारत या स्थान पर लाउड स्पीकर या किसी ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले किसी दूसरे संयत्र के उपयोग की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
खंडपीठ ने कहा है कि इस संबंध में ध्वनि प्रदूषण (विनियम एवं नियंत्रण) नियम 2000 का जिला प्रशासन कड़ाई से पालन करे।
यह भी कहा है कि सभी थानों को इस बात की सूचना दी जाए कि वह अपने क्षेत्रों में उपरोक्त नियम का उल्घंन कर ध्वनि प्रदूषण फैलाने की गतिविधियों पर रोक लगाएं।
निर्देश दिया है कि यदि कोई नागरिक इस संबंध में शिकायत करता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
याचिका में ये दिया गया तर्क
याचीगणों का कहना था कि गांव में भगवान शिव का एकमात्र मंदिर है जिसमें वह पिछले 40 वर्षों से पूजा करते आ रहे हैं।
मंदिर की छत पर एक लाउड स्पीकर लगाया गया है जिसे सुबह और शाम को कुछ देर के लिए आरती के समय बजाया जाता है।
गत दिनों कुछ लोगों की शिकायत पर स्थानीय प्रशासन ने इसे हटा दिया। कहा गया कि इस मामले में अधिकारियों ने भेदभाव पूर्ण कार्य किया है और सिर्फ एक समुदाय को ही लाउड स्पीकर बजाने से रोका गया।
खंडपीठ ने सुप्रीमकोर्ट के तमाम निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण (विनियम एवं नियंत्रण) नियम 2000 का हवाला देते हुए कहा कि याचीगण को बिना संबंधित प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त किए ध्वनि संयत्र बजाने का अधिकार नहीं है।