लखनऊ। करिके गवनवा भवनवा में छोड़ि कर अपने परईलन पुरुबवा बलमुआ...। जमीन से जुड़े ऐसे गीत रचने वाले भोजपुरी के शेक्सपियर के नाम से मशहूर भिखारी ठाकुर के जीवन का सार रंगमंच पर उतरा। मौका था संगीत नाटक अकादमी में बुधवार से शुरू पांच दिवसीय कला उत्सव रंग-ए-आवारगी के आयोजन का।
पहले दिन नाटक कहत भिखारी ने भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व को बड़ी संजीदगी के साथ टटोलने का प्रयास किया। रूपांतर गोरखपुर संस्था की ओर से आयोजित समारोह में मंचित नाटक का निर्देशन सुनील जायसवाल ने किया, जिसे अपर्णेश मिश्र ने लिखा। भिखारी ठाकुर के नाटकों विदेशिया, बेची बेचवा सहित विभिन्न कथानकों को इस नाटक में समेटने की कोशिश की गई। संगीत पक्ष को विवेक श्रीवास्तव और शगुन श्रीवास्तव ने अपनी आवाज से सुरीला बना दिया। अपर्णेश मिश्र, आदित्य राजन, हरिकेश पांडेय, पवन कुमार, सृष्टि गौड़, रितिका सिंह, निकिता,श्रीवास्तव, निशीकांत पांडेय, चंदन यादव, विक्की प्रजापति, पंकज सैनी ने बेहतरीन अभिनय किया।

संगीत नाटक अकादमी में नाटक कहत भिखारी का मंचन करते कलाकार।

संगीत नाटक अकादमी में नाटक कहत भिखारी का मंचन करते कलाकार।

संगीत नाटक अकादमी में नाटक कहत भिखारी का मंचन करते कलाकार।