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Lucknow News: कला-संस्कृति में बढ़ेंगे कॅरिअर के अवसर
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लखनऊ। कला-संस्कृति में कॅरिअर बनाने वाले युवाओं के लिए राजधानी लखनऊ में एक या दो नहीं, बल्कि 11 संस्थानों में यूजी-पीजी और डिप्लोमा करने के मौके मिलेंगे। इसके अलावा मथुरा स्थित वृंदावन शोध संस्थान को भी भातखंडे संस्कृति विवि से संबद्ध कर दिए जाने से यहां भी डिग्री-डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में दाखिला मिल सकेगा।विवि की ओर से सभी अकादमी, संस्थानों को एक पत्र जारी कर वर्तमान में संचालित कोर्स का ब्योरा, प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या, शुल्क ढांचे व उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा मांगा है। कुलसचिव तुहीन द्विवेदी के मुताबिक, इस संदर्भ में विवि प्रशासन की ओर से सभी को पत्र जारी कर दिया गया है।
जानिए, कहां-कैसी संभावनाएं, खुलेंगे शोध के रास्ते
- भारतेंदु नाट्य अकादमी के प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. सुमित श्रीवास्तव के मुताबिक, अभी तक सिर्फ दो साल का डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हो रहा था। अब पीजी की मान्यता मिल जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि विद्यार्थियों के लिए कॅरिअर के नए रास्ते खुलेंगे। शोध को बढ़ावा मिलेगा। नेट-जेआरएफ कर के आगे बढ़ सकेंगे।
-अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक लवकुश ने बताया कि हमारे पाठ्यक्रमों की रूपरेखा रामायण को केंद्र में रखते हुए सनातन संस्कृति, वैदिक साहित्य जैसे वृहद संभावनाओं वाले कॅरिअर के विकल्पों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। फिलहाल विवि से स्वीकृति के बाद ही इस पर ज्यादा कुछ कहा जा सकता है।
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- कथक संस्थान की सचिव सरिता श्रीवास्तव के मुताबिक, हमारे यहां लखनऊ विवि के मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम पहले से ही संचालित हो रहे हैं। प्रवेश भी उन्हीं मानकों के अनुरूप होते हैं। चूंकि पहले से ही कोर्स चल रहे हैं, इसलिए नई व्यवस्था में कोई दिक्कत नहीं होगी।
यहां शुरु होंगे पाठ्यक्रम, दाखिले के अवसर बढ़ेंगे
उप्र राज्य ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, भारतेंदु नाट्य अकादमी, अयोध्या शोध संस्थान, बिरजू महाराज कथक संस्थान, लोक जनजाति कला व संस्कृति संस्थान, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, उप्र जैन विद्या शोध संस्थान, संत कबीर अकादमी, उप्र कैफी आजमी अकादमी, वृंदावन शोध संस्थान मथुरा, अखिल भारतीय संस्कृति परिषद।
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जानिए, कहां-कैसी संभावनाएं, खुलेंगे शोध के रास्ते
- भारतेंदु नाट्य अकादमी के प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. सुमित श्रीवास्तव के मुताबिक, अभी तक सिर्फ दो साल का डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हो रहा था। अब पीजी की मान्यता मिल जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि विद्यार्थियों के लिए कॅरिअर के नए रास्ते खुलेंगे। शोध को बढ़ावा मिलेगा। नेट-जेआरएफ कर के आगे बढ़ सकेंगे।
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-अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक लवकुश ने बताया कि हमारे पाठ्यक्रमों की रूपरेखा रामायण को केंद्र में रखते हुए सनातन संस्कृति, वैदिक साहित्य जैसे वृहद संभावनाओं वाले कॅरिअर के विकल्पों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। फिलहाल विवि से स्वीकृति के बाद ही इस पर ज्यादा कुछ कहा जा सकता है।
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- कथक संस्थान की सचिव सरिता श्रीवास्तव के मुताबिक, हमारे यहां लखनऊ विवि के मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम पहले से ही संचालित हो रहे हैं। प्रवेश भी उन्हीं मानकों के अनुरूप होते हैं। चूंकि पहले से ही कोर्स चल रहे हैं, इसलिए नई व्यवस्था में कोई दिक्कत नहीं होगी।
यहां शुरु होंगे पाठ्यक्रम, दाखिले के अवसर बढ़ेंगे
उप्र राज्य ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, भारतेंदु नाट्य अकादमी, अयोध्या शोध संस्थान, बिरजू महाराज कथक संस्थान, लोक जनजाति कला व संस्कृति संस्थान, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, उप्र जैन विद्या शोध संस्थान, संत कबीर अकादमी, उप्र कैफी आजमी अकादमी, वृंदावन शोध संस्थान मथुरा, अखिल भारतीय संस्कृति परिषद।