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यूपी की इस अनपढ़ महिला को सम्मानित करेंगे राष्ट्रपति, पढ़िए क्यों?

Wed, 06 Jan 2016 10:18 AM IST
Updated Wed, 06 Jan 2016 10:18 AM IST
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bhanwati is honoured by president pranab mukherjee

‘हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा।’ बहराइच के टेड़िया गांव की 42 साल की भानमती पर एकदम सटीक बैठती हैं ये लाइनें। 10 साल पहले लोग उन्हें घरेलू महिला के रूप में जानते थे। चूल्हा-चौका और घर का काम ही उनकी जिंदगी थी। 2005 में वनग्राम वासियों के लिए आजादी आंदोलन शुरू हुआ तो वे भी कूद पड़ीं।

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एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में। पर, जोश, जज्बा और कुछ कर गुजरने की चाहत इतनी थी कि वे अगुवा बन गईं। शराब के खिलाफ अलख जगाने वाली भानमती की कहानी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तक पहुंची।

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महिला हक की लड़ाई लड़ रहीं महिलाओं को लेकर मंत्रालय ने फेसबुक पर वोटिंग करवाई गई तो उनका नाम देश की सर्वश्रेष्ठ 100 महिलाओं में आ गया। इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 22 जनवरी को भानमती के साथ भोजन करेंगे और उन्हें सम्मानित करेंगे।

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कभी फल-सब्जी बेचती थीं

bhanwati is honoured by president pranab mukherjee

मिहींपुरवा विकास खंड के वनग्राम टेड़िया की भानमती टोकरियों में फल व सब्जी बेचकर या ट्रेन में पल्लेदारी करके परिवार का भरण पोषण करती थीं।

वर्ष 2005 में 150 वर्षों से नागरिक हकों से वंचित वनग्राम वासियों के हक के लिए वनग्राम आजादी आंदोलन शुरू हुआ तो वे इसके साथ जुड़ गईं। अनपढ़ थीं, पर सीखने व बोलने की क्षमता ने जल्द ही भानमती को एक महिला अगुवाकार की भूमिका में खड़ा कर दिया।

इसी संघर्ष के दौरान भानमती को डवलपमेंट एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवासंमेंट (देहात) संस्था का सान्निध्य मिला तो उन्होंने सूचना के अधिकार, नरेगा, मानवाधिकार, महिला अधिकार, बाल अधिकार मुद्दों पर प्रशिक्षण हासिल किया। इसके बाद सक्रिय अगुवाकार के रूप में अव्यवस्थाओं के खिलाफ उठ खड़ी हुईं।

खूब यातनाएं सहीं पर डरी नहीं

bhanwati is honoured by president pranab mukherjee

भानमती ने पहली बार क्षेत्रीय कोटेदार के भ्रष्टाचार व कालाबाजारी के खिलाफ एक के बाद एक 54 आवेदन डाले। आखिरकार, प्रशासन को उसका कोटा निरस्त करना पड़ा। जनता को उसका हक दिलवाने वाली भानमती को इस दौरान कई यातनाएं भी सहनी पड़ीं, पर वे डरीं नहीं।

भानमती ने गांव में शराब की नौ भट्ठियां भी तुड़वाईं। शराब के चलते घर बर्बाद हो रहे थे, महिलाओं को यातना सहनी पड़ रही थी। अब तो यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।

10 ग्राम पंचायतों की महिलाओं को लेकर कर रहीं संघर्ष
भानमती वनग्राम अधिकार मंच की अध्यक्ष भी हैं। 10 ग्राम पंचायतों के करीब तीन हजार महिलाओं को लेकर वह संघर्ष कर रही हैं।

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