बाल विवाह रोका तो गांव में किया गया गैंगरेप, पढ़ें भंवरी देवी की आपबीती
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राजस्थान में सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत ‘साथिन’ के रूप में काम करते हुए करीब 24 साल पहले जब भंवरी देवी ने जयपुर के भटेड़ी गांव में एक बाल विवाह रुकवाने की कोशिश की तो उनके साथ सामूहिक दुराचार किया गया।
जब न्याय पाना चाहा तो न पुलिस से मदद मिली न न्यायालय से, लेकिन जब उनके साथ हुए अनर्थ की खबर फैली तो आम नागरिक और संगठन बड़ी संख्या में उनके समर्थन में उतर आए। आपबीती सुनाते हुए भंवरी देवी ने महिलाओं से आह्वान किया कि अगर उन्हें अपने या अपने जैसी किसी महिला के लिए न्याय चाहिए तो खुद जागना होगा।
सीएमएएस में आयोजित सेमिनार में संघर्ष भरे जीवन के लिए भंवरी देवी को सम्मानित किया गया। इस दौरान बातचीत में भंवरी देवी ने बताया कि वे आज भी साथिन के रूप में अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इसके लिए उन्हें 2,400 रुपये हर महीने मिलते हैं।
प्रदेश सरकार से 12 साल पहले मिली करीब 50 हजार रुपये की मदद और कुछ सम्मान के जरिए वे अपने परिवार को संभाले हुए हैं। उनके एक बेटे की शादी हो चुकी है। एक बेटी भी है।
महिला हिंसा खत्म करने के विषय पर वे कहती हैं कि केवल बातें करते रहने या सम्मान करने से कुछ नहीं होगा। इसके लिए लड़ाई लड़नी होगी जो मंच पर बैठकर नहीं गांवों और सड़कों पर उतरकर लड़ी जा सकती है।
भंवरी देवी ने बताया, कैसे रुकेंगे दुराचार
भंवरी कहती हैं कि दुराचार अपने आप नहीं रुकेंगे। इनके खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी। खास तौर से खुद महिलाओं को। यह लड़ाई सिर्फ कानून-व्यवस्था और पुलिस से नहीं है, बल्कि उस मास्टर से भी है जो सरकार से पैसा लेकर स्कूल में पढ़ाने नहीं आता।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों से भी जो बच्चों को पोषाहार नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि यह सब लड़कियों को मजबूत करने के लिए बनाई गई व्यवस्था है। अगर लड़की पढ़ेगी नहीं तो आगे नहीं बढ़ेगी। उसे पोषण नहीं मिलेगा तो वह संघर्षशील नहीं बन पाएगी।
हिंसा पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के सवाल पर वे कहती हैं कि इसके लिए पीड़िताओं को संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके बिना पुलिस और सरकार को भी आपको न्याय दिलाने में कोई रुचि नहीं होगी।
अत्याचार सहने की आदत खत्म करनी होगी
भंवरी देवी ने कहा कि अत्याचार को सहने की शक्ति उनमें नहीं बची है। इसलिए वे आवाज उठाना सीख गई हैं। उन्हें नहीं पता कि महिलाओं पर अत्याचार कब रुकेंगे, लेकिन इसके लिए अत्याचार सहने की आदत खत्म करनी होगी।
भंवरी देवी ने बताया कि वे सामाजिक कार्यकर्ता लाजवंती आहूजा के साथ मिलकर महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ रही हैं। अब तक 636 समूहों को जोड़ा है जो ब्लॉक लेवल पर काम करते हैं।
आहूजा बताती हैं कि भंवरी देवी इनके लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं। वहीं भंवरी कहती हैं, पढ़-लिख नहीं पाई, लेकिन इस काम के जरिए साइन करना सीख गई हूं।