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'कांग्रेसी आरामतलबी छोड़ने को तैयार नहीं, क्या करता सपा में चला आया'

Sun, 15 May 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 15 May 2016 02:06 AM IST
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Beni Prasad Verma speaks over joining SP.
बेनी प्रसाद वर्मा - फोटो : amar ujala

पिछले कई दशक सूबे का प्रमुख पिछड़ा सियासी चेहरा माने जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा शुक्रवार को सपा में शामिल हो गए। इसके साथ ही उन्होंने यूपी कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर चर्चा की।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनका उपयोग नहीं कर रही थी। उन्होंने कई बार पार्टी नेतृत्व से यूपी पर ध्यान देने का आग्रह किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। कांग्रेसी आरामतलबी छोड़ने को ही नहीं तैयार थे। कब तक हाथ पर हाथ रखे बैठा रहता। कोशिश करके हार गया। कांग्रेसी खुद नहीं चाहते कि यूपी में पार्टी मजबूत हो। मेरे पास सपा में लौटने के अलावा कोई विकल्प था ही नहीं।
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- आरोप है कि आपने स्वार्थ में कांग्रेस छोड़ी?

बिल्कुल निराधार आरोप है। मैं दो साल से ज्यादा समय से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से यूपी पर ध्यान देने की बात कर रहा था। कह रहा था कि कोई ऐसा चेहरा सामने लाएं जिस पर लोगों को भरोसा हो। यह संदेश जाए कि कांग्रेस यूपी में गंभीर है। सरकार बनाना चाहती है, पर कुछ नहीं हुआ। चुनाव सिर पर है, लेकिन न कोई सक्रियता, न कोई प्रबंधन। किसी राजनीतिक दल जैसा संघर्ष करने का उत्साह भी नहीं। ऐसे में कांग्रेस छोड़ने के अलावा चारा ही क्या था।

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'भाजपा के लोगों से मेरे व्यक्तिगत रिश्ते'

Beni Prasad Verma speaks over joining SP.
बेनी प्रसाद वर्मा व मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

- आपके तो भाजपा व बसपा में जाने की भी चर्चा थी?

बसपा को तो मैंने कभी पार्टी ही नहीं माना। वहां हमारे जैसा आदमी क्या करता। जहां तक भाजपा की बात है तो इस पार्टी के लोगों से हमारे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। लोगों ने संपर्क किया भी था, पर मैं ठहरा शुरू से समाजवादी। भाजपा की विचारधारा का विरोधी। भाजपा में कैसे चला जाता?

- आप राज्यसभा और अपने पुत्र के पुनर्वास के लिए तो सपा में नहीं गए?

मैंने सपा में जाने के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। मुलायम सिंह यादव बड़े भाई हैं। हमारे संरक्षक हैं। जिस रूप में हमारा और हमारे परिवार का उपयोग करना चाहेंगे, करेंगे। जो लोग हम पर स्वार्थ साधने का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें समझ होनी चाहिए कि सपा व कांग्रेस में कोई वैचारिक मतभेद नहीं है। लोहिया व जेपी भी कांग्रेस से ही तो निकले थे।

'अतीत की बातों को भूलना ही पड़ता है'

Beni Prasad Verma speaks over joining SP.

- पुरानी बातों को भूल जाना क्या आसान है?

अतीत को भूलना ही पड़ता है। वक्त कहां ठहरता है। समय सबसे बड़ा फैक्टर है। वह धीरे-धीरे सब कुछ भुला देता है।

- आज सपा में युवाओं का दबदबा है। कैसे एडजस्ट करेंगे?

समाजवादी पार्टी हमारा घर है। परिवार में संघर्ष नहीं, बल्कि समन्वय होता है। छोटों को आगे बढ़ते देख खुशी होती है। युवा आगे बढ़ेंगे, मजबूत होंगे तो सीना तो हमारा ही चौड़ा होगा।

मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है...
बेनी बाबू यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जद यू अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यूपी में सक्रियता के चलते उनकी सपा में वापसी हुई है। कहते हैं, ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है।’

उत्तर प्रदेश तो मुलायम का ही है। यहां नीतीश का कोई इफेक्ट नहीं चलने वाला। वह बिहार में ही ठीक लगते हैं। उनके सक्रिय होने से यूपी की सियासत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। इसलिए हमारे सपा में जाने के पीछे नीतीश फैक्टर नहीं है।

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