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Lucknow News: शिव ज्योतिर्लिंगों को अर्पित बेलपत्र अब त्वचा को देंगे नई दमक

Fri, 30 Jan 2026 01:56 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 01:56 AM IST
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Belpatra offered to Shiva Jyotirlingas will now give a new glow to the skin.
सीमैप का ज्योतिर्लिंगों पर चढ़ाए गए बेलपत्रों से बनी त्वचा क्रीम।
विनीत चतुर्वेदी
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लखनऊ। ज्योतिर्लिंगों पर चढ़ा बेलपत्र केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि इसमें आस्था, शुद्धता और प्रकृति का गहरा संदेश छिपा है। सदियों से शिवालयों में अर्पित यह त्रिदलीय पत्र पूजा के बाद उपेक्षा का शिकार हो जाता था। कहीं सूखकर बिखरता, तो कहीं नदियों में बहकर प्रदूषण बढ़ाता। अब उसी पवित्र बेलपत्र को वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसा सम्मान मिला है, जिसने आस्था को आरोग्य और सौंदर्य से जोड़ दिया है। केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिकों ने बेलपत्र के औषधीय गुणों को पहचानते हुए अन्य जड़ी-बूटियों को मिलाकर एक ऐसी हर्बल क्रीम विकसित की है जो त्वचा में गहराई तक नमी पहुंचाती है, जलन और रूखापन कम करती है तथा बैक्टीरिया व फंगल संक्रमण से बचाव में सहायक है।

सीएम योगी के सुझाव से मिले चौंकाने वाले नतीजे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दूरदर्शी सुझाव से यह शोध शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने सीमैप के वैज्ञानिकों को शिव को अर्पित होने वाले पवित्र बेलपत्र के औषधीय गुणों पर शोध करने का सुझाव दिया था। इसी प्रेरणा से सीमैप के वैज्ञानिकों ने बेलपत्र पर गहन शोध किया। अध्ययन के दौरान बेलपत्र को प्रयोगशाला में विभिन्न कसौटियों पर परखा गया, जिसके परिणामस्वरूप रसायन-रहित हर्बल स्किन क्रीम विकसित की गई।
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इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अनिर्बान पाल, डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सुएब लुकमान, डॉ. आरएस वर्मा और उनकी टीम ने किया, जिनके प्रयोगों से बेलपत्र के ऐसे प्रभाव सामने आए, जो वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाले साबित हुए।
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पवित्र ज्योतिर्लिंगों से इकट्ठा किए बेलपत्र

इस स्किन क्रीम में मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकालेश्वर में ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्रों के साथ ही ओमकारेश्वर मध्य प्रदेश, काशी विश्वनाथ वाराणसी, त्र्यम्बकेश्वर महाराष्ट्र और चित्रकूट के प्राचीन शिव मंदिर में चढ़ाए गए बेलपत्र को मिलाया गया। इसके साथ ही सीमैप के औषधीय बागान से भी बेलपत्र लिए गए।

बेलपत्र और तुलसी की पत्तियों के गुण में मिली समानता
शोध में पाया गया कि बेलपत्र में 80 से 85 प्रतिशत तक लेमोनिन जैसे प्रभावी तत्व मौजूद हैं। इसके साथ ही इसमें तुलसी की पत्तियों के बराबर (0.5 से 0.7 प्रतिशत) इसेंशियल ऑयल भी पाया गया। यही नहीं, बेलपत्र एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है, जो त्वचा को भीतर तक पोषण देकर उसे स्वस्थ और चमकदार बनाता है।


जादुई है क्रीम की खूबियां
इस क्रीम में मौजूद जड़ी-बूटियों के अर्क और इसेंशियल ऑयल त्वचा को पोषण देते हैं। यह त्वचा को साफ, स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद करता है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो त्वचा को सुरक्षित रखता है और बैक्टीरिया व फंगल संक्रमण से बचाव में भी मदद करता है, जिससे त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ बनी रहती है। सीमैप के निदेशक डाॅ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी के अनुसार, शिवमंदिरों में चढ़ाए जाने वाले आस्था के प्रतीक बेलपत्र से बनी यह क्रीम प्योर हर्बल, स्वदेशी व सुरक्षित है।आस्था और विज्ञान का ऐसा संगम है, जो पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।
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