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शराब के शौकीनों के लिए महंगी खबर

Wed, 29 Jan 2014 09:13 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लख्ानऊ
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लख्ानऊ Updated Wed, 29 Jan 2014 09:13 AM IST
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beer and rum in up get costlier

राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को प्रदेश की नई आबकारी नीति पर मुहर लगा दी। नई नीति पहले की तरह ही दो साल के अनुमोदित की गई है।

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हालांकि, नई नीति मार्च में प्रभावी होनी थी, लेकिन राज्य सरकार ने लोक सभा चुनावों के मद्देनजर इस पर एक माह पहले ही फैसला ले लिया।

सरकार ने इस बार एक्साइज ड्यूटी और लाइसेंसिंग फीस में वृद्धि करते हुए सालाना राजस्व बढ़ा दिया है। इसके परिणाम स्वरूप देशी और विदेशी शराब तो महंगी हुई ही, साथ ही बीयर के दाम भी बढ़ गए हैं।

एक अप्रैल से शराब के शौकीनों को शौक पूरा करने के लिए अधिक दाम चुकाने होंगे। नई नीति के मुताबिक दो सौ एमएल के देशी शराब के पव्वे का मौजूदा दाम 55 रुपये से बढ़कर अब 60 रुपये हो जाएगा।
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जबकि सपा सकार द्वारा मजदूरों के लिए लाई गई ‘शाम की दवा’ (सस्ते दाम की देशी शराब) की जो विशेष श्रेणी पिछले साल लागू की गई थी, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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विदेशी शराब के 180 एमएल के पव्वे के दामों में भी 15 रुपये तक की बढ़त हो जाएगी। जबकि 750 एमएफ की बोतल पर यह वृद्धि 50 से 60 रुपये होगी।

मसलन प्रचलित ब्रांड ‘बैग पाइपर’ के पव्वे के दाम अब 105 रुपये से बढ़कर 120 रुपये हो जाएंगे, जबकि उच्च श्रेणी के ब्रांड ‘100 पाइपर’ के पव्वे के दाम 335 रुपये से बढ़कर 360 रुपये हो जाएगा।

ऐसे ही बीयर के दामों में सरकार ने वृद्धि कर दी है। नई व्यवस्था में 650 एमएल की किंग फिशर स्ट्रांग बीयर की बोतल के दाम 110 से बढ़कर 120 रुपये हो जाएंगे

जबकि काल्सबर्ग स्ट्रांग बीयर के दाम 170 से 185 रुपये हो जाएंगे। लेकिन सरकार ने वाइन व कम तीव्रता के मादक पेयों के दाम या उसकी फीस में कोई बढ़त नहीं की है।

इसकी वजह यह है कि इससे हासिल होने वाले राजस्व की भागीदारी कम है और इसका व्यवसाय अभी विकसित दशा में है। सरकार इसे अभी बढ़ावा देना चाहती है। लिहाजा इसके दामों में या फीस आदि में कोई वृद्धि नहीं की है।

अब शापिंग माल्स में नहीं खुलेगी शराब की दुकान
नई आबकारी नीति को लागू करने के साथ ही सरकार ने एक अहम फैसला यह लिया है कि उसने अब से शापिंग माल्स में विदेशी शराब की (प्रीमियम वेंड्स) की दुकानों के खुलने पर रोक लगा दी है।

राज्य सरकार ने शापिंग माल्स में प्रीमयम वेंड्स नाम से शराब की दुकान खोलने की व्यवस्था पिछली आबकारी नीति में की थी। जिसे इस बार समाप्त कर दिया गया है।

बढ़ गई लाईसेंस फीस और ड्यूटी
नई नीति में सरकार ने देशी शराब की बेसिक लाइसेंसिंग फीस में एक रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इस वजह से 2013-14 के लिए निर्धारित बेसिक लाइसेंस फीस 23 रुपये

प्रति बल्क लीटर वर्ष 2014-15 में बढ़कर 24 रुपये हो जाएगी। ऐसे ही देशी शराब की लाइसेंस फीस (प्रति माह ली जाने वाली ड्यूटी) में 20 व 23 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

इसका नतीजा यह हुआ है कि वर्ष 2013-14 के लिए तय लाइसेंस फीस 184 रुपये प्रति बल्क लीटर अब 2014-15 में बढ़कर 204 रुपये हो गई है।

लगभग 22 फीसदी अधिक राजस्व का होगा लाभ
हालांकि, सरकार ने आबकारी नीति को दो सालों के लिए प्रभावी किया है। लेकिन यह व्यवस्था भी कर ली है कि हर साल इस नीति से सरकारी खजाना भरता रहे।

वर्ष 2013-14 में अनुमानित राजस्व प्राप्ति 11,875 करोड़ के सापेक्ष वर्ष 2014-15 में 14,500 रुपये राजस्व निर्धारित किया गया है।

नई नीति को लेकर बुलाई गई अफसरों की बैठक
नई नीति के अनुमोदित होते ही प्रमुख सचिव आबकारी व आबकारी आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिलों में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त, उप आबकारी आयुक्त व जिला आबकारी अधिकारियों की बैठक बुलाई ली है।


गुरुवार 30 जनवरी को बुलाई गई बैठक में जिलों में तैनात अधिकारियों को नई नीति के बारे में अवगत कराते हुए सभी के राजस्व लक्ष्यों का निर्धारण भी किए जाने की संभावना है।

नवीनीकरण कर होगा दुकानों का व्यवस्थापन
पुरानी व्यवस्था को जारी रखते हुए सरकार ने शराब की दुकानों का व्यवस्थापन नवीनीकरण के जरिए करने का फैसला किया है।

सिर्फ उन्हीं दुकानों को नीलामी के जरिए आवंटित किया जाएगा, जिनमें नवीनीकरण नहीं कराया गया हो अथवा जो खाली हो रही हों।

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