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कोविड अस्पतालों में बेड फुल, मरीज परेशान
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कोविड अस्पतालों में बढ़ी परेशानी।
- फोटो : ??? ?????
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कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार ने कोविड अस्पतालों की व्यवस्था बिगाड़ दी है। कोविड अस्पतालों में बेड कोरोना मरीजों से फुल हो चुके हैं। बेड व वेंटिलेटर के लिए मरीज भटक रहे हैं।
भर्ती होने के लिए पॉजिटिव मरीज कंट्रोल रूम में लगातार फोन कर रहे हैं, मगर उन्हें राहत नहीं मिल रही है।
संक्रमित होने के बाद यदि कोई निजी कोविड अस्पताल में भर्ती होना चाहता है तो इसके लिए सीएमओ कार्यालय की अनुमति जरूरी है।
सीएमओ डॉ. संजय के मुताबिक, निजी अस्पतालों में भर्ती होने के लिए विभाग की अनुमति जरूरी है। बेड खाली होने पर ही मरीज को उसकी पसंद के अस्पताल में भर्ती मिल सकती है।
प्रमुख अस्पतालों के आईसीयू वार्ड फुल
बृहस्पतिवार और शुक्रवार को 900 से अधिक मरीज मिले जबकि शनिवार को यह आंकड़ा एक हजार के पार हो गया। मौजूदा वक्त में 5408 एक्टिव केस हैं। यही वजह है की डेडीकेटेड 15 कोविड-19 अस्पताल फुल हो गए हैं। केजीएमयू से लेकर लोहिया संस्थान, एसजीपीजीआई, लोकबंधु, मेदांता व इंटीग्रल जैसे निजी अस्पतालों में भी बेड खाली नहीं हैं। वेंटिलेटर व आईसीयू के लिए मारामारी है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो सकता है।
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भर्ती होने के लिए पॉजिटिव मरीज कंट्रोल रूम में लगातार फोन कर रहे हैं, मगर उन्हें राहत नहीं मिल रही है।
संक्रमित होने के बाद यदि कोई निजी कोविड अस्पताल में भर्ती होना चाहता है तो इसके लिए सीएमओ कार्यालय की अनुमति जरूरी है।
सीएमओ डॉ. संजय के मुताबिक, निजी अस्पतालों में भर्ती होने के लिए विभाग की अनुमति जरूरी है। बेड खाली होने पर ही मरीज को उसकी पसंद के अस्पताल में भर्ती मिल सकती है।
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प्रमुख अस्पतालों के आईसीयू वार्ड फुल
बृहस्पतिवार और शुक्रवार को 900 से अधिक मरीज मिले जबकि शनिवार को यह आंकड़ा एक हजार के पार हो गया। मौजूदा वक्त में 5408 एक्टिव केस हैं। यही वजह है की डेडीकेटेड 15 कोविड-19 अस्पताल फुल हो गए हैं। केजीएमयू से लेकर लोहिया संस्थान, एसजीपीजीआई, लोकबंधु, मेदांता व इंटीग्रल जैसे निजी अस्पतालों में भी बेड खाली नहीं हैं। वेंटिलेटर व आईसीयू के लिए मारामारी है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो सकता है।
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