{"_id":"6018632f8ebc3e33be253270","slug":"be-careful-if-you-have-fever-with-tremor-and-swelling-of-the-testicles-lucknow-news-lko562720182","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुखार के साथ कंपकंपी आए और अंडकोष में सूजन तो हो जाएं सावधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुखार के साथ कंपकंपी आए और अंडकोष में सूजन तो हो जाएं सावधान
विज्ञापन
कंपकंपी के साथ तेज बुखार आए और अंडकोष में सूजन हो जाए तो सावधान हो जाएं, यह फाइलेरिया हो सकता है। तत्काल इलाज शुरू हो जाए तो इस बीमारी को रोका जा सकता है।
इलाज नहीं होने पर अंडकोष अथवा पैर का मोटापा (फीलपांव) बढ़ता रहता है। कई बार स्थिति यह हो जाती है कि मरीज बेड से उठ नहीं पाता। ऐसा ही एक मामला केजीएमयू में पहुंचा है।
फाइलेरिया की वजह से मरीज का अंडकोष बढ़कर करीब 25 किलो हो गया था, जिसे सर्जरी कर ठीक किया गया है।
बांदा निवासी 50 साल के मरीज को करीब 10 साल पहले बुखार व कंपकंपी के साथ अंडकोष में दर्द व सूजन हुआ। कस्बे के चिकित्सक से इलाज कराया।
इसके बाद महोबा, प्रयागराज और फिर नई दिल्ली एम्स में भी इलाज कराया। धीरे-धीरे उसका अंडकोष बढ़कर करीब 25 किलो का हो गया। ऐसे में चार साल से वह घर में पड़ा था।
विज्ञापन
उसने सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। मरीज ने बताया कि उसे लगता था कि जिंदगी खत्म हो गई है। इंटरनेट पर किसी ने केजीएमयू में इस तरह सर्जरी होने की जानकारी पढ़ी और उसे बताया।
बृहस्पतिवार को वह ओपीडी में आया और उसी दिन मरीज को भर्ती कर लिया गया। अगले दिन प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार और डॉ. पंकज सिंह ने मरीज की सर्जरी की।
अब मरीज पूरी तरह से ठीक है और उसे सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सूजन अधिक होने की वजह से सर्जरी काफी जटिल थी। इसमें करीब पांच घंटे लगे। इसमें आंतरिक नसों को अलग करके मवाद को निकाला गया।
जानिए क्या होता है फाइलेरिया
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि मच्छर के काटने से फाइलेरिया होता है। जब फाइलेरिया ग्रस्त मरीज का मच्छर खून चूसता है कि माइक्रो फाइलेरिया उसके अंदर चला जाता है। फिर यही मच्छर जब दूसरे व्यक्ति को काटता है तो माइक्रो फाइलेरिया (शिशु कृमि) उसके शरीर में चला जाता है। इसके बाद यह मनुष्य के लसिका तंत्र में रहकर अपना कुनबा बढ़ाता रहता है। फिर खून में पहुंच जाता है। एक मादा 50 हजार शिशु कृमि को जन्म देती है। यह जिस स्थान पर रुकता है वहां टॉक्सिन छोड़ते हैं। इससे नस में सूजन आ जाती है।
यह है इलाज
डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि इसके लक्षण करीब आठ से 16 महीनों में सामने आते हैं। यदि मरीज की शुरुआती दौर में इलाज शुरू हो जाए तो दवाओं से नियंत्रण पाया जा सकता है। बाद में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। अंडकोष की तरह ही फीलपांव होने पर भी सर्जरी की जाती है। महिलाओं में स्तन में भी कई बार इसका असर दिखता है।
क्या है प्रमुख लक्षण
बुखार के साथ तेज कंपकंपी होना, अंडकोष में सूजन, दर्द एवं लालिमा बनना, पेशाब करने में समस्या होने लगे, पैरों में सूजन होने लगे (हाथीपांव), हांथों, लिंग, योनी अथवा स्तन में सूजन हो जाना आदि।
क्या है बचाव का तरीका
घर के आसपास गंदे पानी का जलभराव न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। लक्षण दिखे तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क कर इलाज शुरू कराएं।
विज्ञापन
इलाज नहीं होने पर अंडकोष अथवा पैर का मोटापा (फीलपांव) बढ़ता रहता है। कई बार स्थिति यह हो जाती है कि मरीज बेड से उठ नहीं पाता। ऐसा ही एक मामला केजीएमयू में पहुंचा है।
विज्ञापन
फाइलेरिया की वजह से मरीज का अंडकोष बढ़कर करीब 25 किलो हो गया था, जिसे सर्जरी कर ठीक किया गया है।
बांदा निवासी 50 साल के मरीज को करीब 10 साल पहले बुखार व कंपकंपी के साथ अंडकोष में दर्द व सूजन हुआ। कस्बे के चिकित्सक से इलाज कराया।
इसके बाद महोबा, प्रयागराज और फिर नई दिल्ली एम्स में भी इलाज कराया। धीरे-धीरे उसका अंडकोष बढ़कर करीब 25 किलो का हो गया। ऐसे में चार साल से वह घर में पड़ा था।
विज्ञापन
उसने सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। मरीज ने बताया कि उसे लगता था कि जिंदगी खत्म हो गई है। इंटरनेट पर किसी ने केजीएमयू में इस तरह सर्जरी होने की जानकारी पढ़ी और उसे बताया।
बृहस्पतिवार को वह ओपीडी में आया और उसी दिन मरीज को भर्ती कर लिया गया। अगले दिन प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार और डॉ. पंकज सिंह ने मरीज की सर्जरी की।
अब मरीज पूरी तरह से ठीक है और उसे सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सूजन अधिक होने की वजह से सर्जरी काफी जटिल थी। इसमें करीब पांच घंटे लगे। इसमें आंतरिक नसों को अलग करके मवाद को निकाला गया।
जानिए क्या होता है फाइलेरिया
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि मच्छर के काटने से फाइलेरिया होता है। जब फाइलेरिया ग्रस्त मरीज का मच्छर खून चूसता है कि माइक्रो फाइलेरिया उसके अंदर चला जाता है। फिर यही मच्छर जब दूसरे व्यक्ति को काटता है तो माइक्रो फाइलेरिया (शिशु कृमि) उसके शरीर में चला जाता है। इसके बाद यह मनुष्य के लसिका तंत्र में रहकर अपना कुनबा बढ़ाता रहता है। फिर खून में पहुंच जाता है। एक मादा 50 हजार शिशु कृमि को जन्म देती है। यह जिस स्थान पर रुकता है वहां टॉक्सिन छोड़ते हैं। इससे नस में सूजन आ जाती है।
यह है इलाज
डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि इसके लक्षण करीब आठ से 16 महीनों में सामने आते हैं। यदि मरीज की शुरुआती दौर में इलाज शुरू हो जाए तो दवाओं से नियंत्रण पाया जा सकता है। बाद में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। अंडकोष की तरह ही फीलपांव होने पर भी सर्जरी की जाती है। महिलाओं में स्तन में भी कई बार इसका असर दिखता है।
क्या है प्रमुख लक्षण
बुखार के साथ तेज कंपकंपी होना, अंडकोष में सूजन, दर्द एवं लालिमा बनना, पेशाब करने में समस्या होने लगे, पैरों में सूजन होने लगे (हाथीपांव), हांथों, लिंग, योनी अथवा स्तन में सूजन हो जाना आदि।
क्या है बचाव का तरीका
घर के आसपास गंदे पानी का जलभराव न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। लक्षण दिखे तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क कर इलाज शुरू कराएं।