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केजीएमयू : मोटापा दूर करने वाली सर्जरी फरवरी से, खर्चा साढ़े तीन लाख रुपये, पहले 25 को होगा ये फायदा
Wed, 23 Jan 2019 03:54 PM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 23 Jan 2019 03:54 PM IST
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- फोटो : डेमो
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मोटापे की वजह से तमाम बीमारियों से घिरने वालों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें केजीएमयू में ही बेरियाट्रिक सर्जरी से ठीक किया जा सकेगा। सर्जरी विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। फरवरी से सुविधा मिलेगी। खास बात यह है कि शुरुआत में 25 गरीब मरीजों का मुफ्त ऑपरेशन होगा।
इसके लिए प्रदेश सरकार से मदद मांगी गई है। इस सर्जरी में एक मरीज पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है। बदलती जीवन शैली में मोटापा समस्या बन गया है। इससे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट और घुटने की बीमारी के मरीज बढ़े हैं।
मोटापा कम करने के लिए किए गए तमाम प्रयास नाकाफी होने पर अंतिम विकल्प बेरियाट्रिक सर्जरी है। इसमें पेट के आंतरिक हिस्से में जमी चर्बी को ऑपरेशन कर निकाला जाता है। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि मरीज को कम और उसकी जरूरत के हिसाब से खाना दिया जाए। इस ऑपरेशन के लिए केजीएमयू में सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एए सोनकर, प्रो. अवनीश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षय आनंद की टीम बनाई गई है।
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इसके लिए प्रदेश सरकार से मदद मांगी गई है। इस सर्जरी में एक मरीज पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है। बदलती जीवन शैली में मोटापा समस्या बन गया है। इससे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट और घुटने की बीमारी के मरीज बढ़े हैं।
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मोटापा कम करने के लिए किए गए तमाम प्रयास नाकाफी होने पर अंतिम विकल्प बेरियाट्रिक सर्जरी है। इसमें पेट के आंतरिक हिस्से में जमी चर्बी को ऑपरेशन कर निकाला जाता है। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि मरीज को कम और उसकी जरूरत के हिसाब से खाना दिया जाए। इस ऑपरेशन के लिए केजीएमयू में सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एए सोनकर, प्रो. अवनीश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षय आनंद की टीम बनाई गई है।
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‘आयुष्मान’ योजना में शामिल नहीं बेरियाट्रिक सर्जरी
बेरियाट्रिक सर्जरी आयुष्मान योजना में शामिल नहीं है। सूत्रों की मानें तो केजीएमयू प्रशासन ने इसके लिए प्रस्ताव भेजा है। तर्क दिया है कि बेरियाट्रिक सर्जरी के पैकेज को आयुष्मान में शामिल कर बड़ी आबादी को लाभान्वित किया जा सकता है।
क्या है बेरियाट्रिक सर्जरी
डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि इस सर्जरी का उपयोग उन लोगों में किया जाता है, जिनकी लंबाई की अपेक्षा वजन करीब 40 किलो अधिक हो। मोटापा कम होने के बाद मरीज को डायबिटीज, घुटने के दर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट संबंधी बीमारी कम होने लगती है।
इस सर्जरी में लैप बैंड सर्जरी के बाद खाने की क्षमता कम हो जाती है। डेढ़ से दो किलो वजन हर हफ्ते कम होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही पेट में जमा फैट को कम कर दिया जाता है।
क्या है बेरियाट्रिक सर्जरी
डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि इस सर्जरी का उपयोग उन लोगों में किया जाता है, जिनकी लंबाई की अपेक्षा वजन करीब 40 किलो अधिक हो। मोटापा कम होने के बाद मरीज को डायबिटीज, घुटने के दर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट संबंधी बीमारी कम होने लगती है।
इस सर्जरी में लैप बैंड सर्जरी के बाद खाने की क्षमता कम हो जाती है। डेढ़ से दो किलो वजन हर हफ्ते कम होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही पेट में जमा फैट को कम कर दिया जाता है।
निजी अस्पताल में 10 लाख रुपये है खर्च
बेरियाट्रिक सर्जरी के लिए 25 गरीब मरीजों की मुफ्त में सर्जरी होगी। इसमें उन्हें चुना जाएगा, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसका खर्च तीन से साढ़े तीन लाख रुपये है। ऐसी स्थिति में विपन्न और बीपीएल श्रेणी में आने वाले मरीजों के लिए राज्य सरकार से मदद मांगी है।
तर्क दिया है कि इस बीमारी की चपेट में तमाम गरीब भी हैं, लेकिन विपन्न और बीपीएल श्रेणी में आने वाले इन मरीजों पर इतने रुपये खर्च करने की इजाजत नहीं है। ऐसी स्थिति में इस बीमारी के लिए अतिरिक्त प्रावधान किया जाएगा। निजी अस्पताल में इस सर्जरी का खर्च करीब 10 लाख रुपये आता है।
तर्क दिया है कि इस बीमारी की चपेट में तमाम गरीब भी हैं, लेकिन विपन्न और बीपीएल श्रेणी में आने वाले इन मरीजों पर इतने रुपये खर्च करने की इजाजत नहीं है। ऐसी स्थिति में इस बीमारी के लिए अतिरिक्त प्रावधान किया जाएगा। निजी अस्पताल में इस सर्जरी का खर्च करीब 10 लाख रुपये आता है।
बजट मिलते ही सुविधा शुरू
केजीएमयू में नई-नई तकनीक से मरीजों का इलाज करने का प्रयास किया जा रहा है। बेरियाटिक सर्जरी भी इसका हिस्सा है। सर्जरी विभाग ने इसके लिए तैयारी की है। यह सर्जरी काफी महंगी है। ऐसे में गरीबों के लिए भी विकल्प रखा गया है। बजट मिलते ही सर्जरी विभाग सुविधा चालू कर देगा। - प्रोफेसर संतोष कुमार, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू