मेधावियों का गढ़ बना बाराबंकी, इस बार भी अव्वल
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यह सवाल किसी के भी जेहन में कौंध सकता है कि आखिर बाराबंकी में क्या है जो यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में यहां की ही मेधाएं इधर कुछ वर्षों में लगातार परचम फहरा रही हैं।
इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में तो लगातार यह चौथा वर्ष है जब बाराबंकी ही टॉपर बना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाराबंकी में अब तक जितने भी टॉपर्स निकले हैं वह सब नॉन एडेड विद्यालय से ही हैं।
इस संबंध में विभिन्न विद्यालयों से जुडे़ प्रधानाचार्य, प्रबंधक और शिक्षकों से बातचीत की गई तो नतीजा निकला कि यह सब प्रतिस्पर्धा का परिणाम है और यह प्रतिस्पर्धा विद्यालय प्रबंधतंत्र से लेकर छात्रों तक में पैदा हुई है।
286 छात्रों के 80 फीसदी से ज्यादा नंबर
सबसे पहले वर्ष 2005 में महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज के छात्र शैलेश शर्मा ने बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश की सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
कहते हैं कि प्रतिस्पर्धा यहीं से शुरू हुई। इस वर्ष भी इस कॉलेज में इंटरमीडिएट परीक्षा में 905 छात्र बैठे थे।
इसमें 286 छात्र 80 से लेकर 97 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं। यहां के प्रधानाचार्य रामकिशोर शुक्ला कहते हैं कि निश्चित रूप से बाराबंकी में निजी कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
इनका कहना है कि हमारे कॉलेज में 77 शिक्षक हैं जिनमें 37 गैर जिलों के हैं। रामकिशोर कहते हैं कि शैक्षिक गुणवत्ता की प्रतिस्पर्धा में वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। यही कारण है कि बाराबंकी में शिक्षा का स्तर इंटरमीडिएट तक काफी अच्छा है। गैर जनपदों के भी छात्र अब यहां प्रवेश लेते हैं।
बच्चों के लिए अभिभावक हैं गंभीर
अभिभावकों की इस चिंता ने ही विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ा दिया है। इनका कहना है कि कौन अभिभावक नहीं चाहता कि उसका बच्चा अच्छे विद्यालय में बेहतर शिक्षा पाए।
बाराबंकी के लिए तो लखनऊ बेहतर विकल्प था वहां भी अच्छे विद्यालय हैं लेकिन आज अगर बाराबंकी के कई प्रमुख निजी विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट छात्रों की बेहतर संख्या है तो इसका कारण ये है कि यहां बेहतर शिक्षा मिल रही है।
लगातार सुधरा शैक्षिक स्तर
सांई इंटर कालेज के शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा कहते हैं बाराबंकी के छात्रों के लगातार टॉप करने से सवाल खड़ा होता है कि कहीं कुछ दाल में काला तो नहीं पर ऐसा है नहीं, शिक्षा में माफियागिरी कोई एक संस्थान कुछ निश्चित समय तक ही चला सकता है लेकिन बाराबंकी में ऐसा नहीं है, कई संस्थान हैं जिनके यहां की मेधाओं ने इधर के कुछ वर्षों में बोर्ड की परीक्षाओं में अपनी-अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
पायनियर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य रेखा मिश्रा कहती हैं कि उनके विद्यालय के किसी बच्चे ने टॉप भले न किया हो लेकिन शैक्षिक प्रतिस्पर्धा का नतीजा है कि विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
यंग स्ट्रीम इंटर कालेज के प्रबंधक केएम चतुर्वेदी कहते हैं कि बाराबंकी ने शैक्षिक गुणवत्ता का एक प्लेटफार्म बीते वर्षो में हासिल किया तो अब लगातार उसे लांघने के ही प्रयास में लगा है।
वह कहते हैं कि पिछली बार 484 अंक पाकर इंटरमीडिएट की परीक्षा इसी जिले की छात्रा अर्जिता वर्मा ने टॉप किया था। इस बार यहीं की दो छात्राओं ने 487 अंक पाकर टॉप किया है। इस बार 484 अंक पाने वाली छात्रा मेरिट में तीसरे स्थान पर हैै। यह प्रतिस्पर्धा का ही नतीजा है कि बाराबंकी मेरिट को दिन ब दिन बेहतर कर रहा है।
आठ वर्षों से यूपी बोर्ड में कायम है जलवा
पिछले चार वर्षों से लगातार इंटरमीडिएट में टॉप करने वालों में बाराबंकी के छात्र-छात्राओं का नाम रहा है। वर्ष 2006 में मेरिट में आने के बाद जिले के छात्रों ने लगातार दो वर्षों तक हाईस्कूल की परीक्षा में प्रदेश में टॉप किया।
वर्ष 2011 में श्री सांई इंटर कॉलेज के किसान के बेटे ज्ञान प्रकाश वर्मा ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया।
वर्ष 2012 में तो मेधावियों ने इतिहास ही रच डाला जब महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज की छात्रा अपूर्वा व अभिलाषा इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रदेश की संयुक्त टॉपर बनीं जबकि दूसरे नंबर पर भी इसी स्कूल की छात्रा पूजा व तीसरे नंबर पर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्रा शालिनी ने अपनी सफलता का परचम लहराया।
वहीं वर्ष 2013 में फिर रामसेवक यादव स्मारक इंटर कालेज की छात्रा अर्जिता वर्मा ने जहां प्रदेश टाप किया वहीं प्रदेश की टॉप टेन सूची में जिले के आठ मेधावियों ने अपना नाम दर्ज करवाया था। इस वर्ष भी प्रथम, द्वितीय, व तृतीय स्थान पर बाराबंकी के मेधावी ही काबिज रहे और इसी के चलते शिक्षा क्षेत्र में प्रदेश व देश में एक बार फिर जिले का डंका बज रहा है।