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Lucknow News: छतों से उड़ रही पतंगों पर लगे रोक, पुलों पर लगाए जाएं तार, तो रुकेंगे हादसे
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अमर उजाला संवाद में पहुंचे लोग।
लखनऊ। पतंग के मांझे से हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे। सबसे पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहे खतरनाक मांझों पर रोक लगानी होगी, उसके बाद पुलों पर भी तार लगाने की जरूरत है। ये बातें लखनऊ काइट कांटेस्ट व पतंग विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को तिलक मार्ग डालीबाग स्थित अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद में कहीं।
लखनऊ काइट कांटेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक सैयद शब्बीर हुसैन रिजवी ने कहा कि लखनऊ में मांझे से होने वाले हादसे तभी रुकेंगे, जब पुलों पर तार लगाए जाएंगे। उन्होंने ये भी दावा किया शहर में कोई भी पतंग विक्रेता खतरनाक मांझा नहीं बेचता है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ये आसानी से उपलब्ध रहता है, जिसका फायदा पतंगबाज उठाते हैं, फिर दुर्घटनाएं होती हैं। पतंग विक्रेता एसोसिएशन के सचिव नीरज रस्तोगी ने कहा कि खतरनाक मांझा सस्ता भी पड़ता है, ये ज्यादा मजबूत होता है, जल्दी टूटता नहीं है, फिर ऑनलाइन मिल भी जाता है। इसलिए इस पर सरकार को रोक लगानी होगी। कुछ सदस्यों ने ये माना कि लखनऊ में कहीं-कहीं पर 8400 और पांडा मांझा बिक रहा है, ये खतरनाक होता है।
संवाद के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि मैदान से उड़ने वाली पतंगों से हादसे नहीं होते। अधिकांश हादसे घरों की छतों से उड़ने वाली पतंगों के मांझों से होते हैं।
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ये रहे शामिल
पतंग विक्रेता एसोसिएशन के सदस्य अमित जैन, कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार गुप्ता, सचिव नीरज रस्तोगी, महामंत्री विवेक अग्रवाल, सदस्य मोहित रस्तोगी, उपाध्यक्ष नीरज यादव, सदस्य हरदेव सिंह, श्यामजी श्रीवास्तव, लखनऊ काइट कॉन्टेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक सैयद शब्बीर हुसैन रिजवी, अध्यक्ष यशपाल सिंह सोढ़ी, सदस्य प्रदीप विश्वकर्मा, आयुष चौरसिया, एम नूरूल हुदा, आशीष, सदस्य मो. शमीम, मो. फहीम और पप्पू गुप्ता ।
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लखनऊ काइट कांटेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक सैयद शब्बीर हुसैन रिजवी ने कहा कि लखनऊ में मांझे से होने वाले हादसे तभी रुकेंगे, जब पुलों पर तार लगाए जाएंगे। उन्होंने ये भी दावा किया शहर में कोई भी पतंग विक्रेता खतरनाक मांझा नहीं बेचता है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ये आसानी से उपलब्ध रहता है, जिसका फायदा पतंगबाज उठाते हैं, फिर दुर्घटनाएं होती हैं। पतंग विक्रेता एसोसिएशन के सचिव नीरज रस्तोगी ने कहा कि खतरनाक मांझा सस्ता भी पड़ता है, ये ज्यादा मजबूत होता है, जल्दी टूटता नहीं है, फिर ऑनलाइन मिल भी जाता है। इसलिए इस पर सरकार को रोक लगानी होगी। कुछ सदस्यों ने ये माना कि लखनऊ में कहीं-कहीं पर 8400 और पांडा मांझा बिक रहा है, ये खतरनाक होता है।
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संवाद के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि मैदान से उड़ने वाली पतंगों से हादसे नहीं होते। अधिकांश हादसे घरों की छतों से उड़ने वाली पतंगों के मांझों से होते हैं।
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ये रहे शामिल
पतंग विक्रेता एसोसिएशन के सदस्य अमित जैन, कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार गुप्ता, सचिव नीरज रस्तोगी, महामंत्री विवेक अग्रवाल, सदस्य मोहित रस्तोगी, उपाध्यक्ष नीरज यादव, सदस्य हरदेव सिंह, श्यामजी श्रीवास्तव, लखनऊ काइट कॉन्टेस्ट एसोसिएशन के संरक्षक सैयद शब्बीर हुसैन रिजवी, अध्यक्ष यशपाल सिंह सोढ़ी, सदस्य प्रदीप विश्वकर्मा, आयुष चौरसिया, एम नूरूल हुदा, आशीष, सदस्य मो. शमीम, मो. फहीम और पप्पू गुप्ता ।

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