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लखनऊः बांग्लादेशियों की बस्ती से राजभवन सहित कई प्रमुख स्थलों को खतरा
Wed, 23 Oct 2019 02:48 PM IST
Amulya Rastogi
प्रवेंद्र गुप्ता , अमर उजाला, लखनऊ
प्रवेंद्र गुप्ता , अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 23 Oct 2019 02:48 PM IST
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सदर रामलीला मैदान के पास बसी अवैध बस्ती
- फोटो : amar ujala
लखनऊ के सदर रामलीला ग्राउंड और हैदर कैनाल किनारे सड़क पर बनी अवैध बस्ती बांग्लादेशियों की है। इन्हें कई बार हटाया जा चुका है, लेकिन ये फिर काबिज हो जाते हैं। कबाड़ का काम करने वाले इन बस्ती के कुछ लोगों की गतिविधियां भी ठीक नहीं है। बस्ती से थोड़ी दूर पर ही राजभवन व अन्य प्रमुख सरकारी कार्यालय हैं।
ऐसे में सुरक्षा कारणों से बस्ती को हटाने के साथ ही यहां रहने वालों की गोपनीय जांच भी कराने को नगर आयुक्त ने डीएम को पत्र भेजा है। बसपा सरकार में सदर में हैदर कैनाल के किनारे शुभम नगर के साथ ही रामलीला मैदान से भी अवैध कब्जेदारों को हटाया गया था।
उसके बाद फिर बसे तो तो करीब पांच साल पहले कब्जे हटाए गए थे, लेकिन ये फिर वापस जम जाते हैं। रामलीला मैदान का सौंदर्यीकरण भी हुआ। उसकी चहारदीवारी बनाई गई और गेट भी लगाया गया, लेकिन पुलिस और नगर निगम की ढिलाई से ये फिर बस जाते हैं। इसमें स्थानीय नेताओं की भी शह रहती है।
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ऐसे में सुरक्षा कारणों से बस्ती को हटाने के साथ ही यहां रहने वालों की गोपनीय जांच भी कराने को नगर आयुक्त ने डीएम को पत्र भेजा है। बसपा सरकार में सदर में हैदर कैनाल के किनारे शुभम नगर के साथ ही रामलीला मैदान से भी अवैध कब्जेदारों को हटाया गया था।
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उसके बाद फिर बसे तो तो करीब पांच साल पहले कब्जे हटाए गए थे, लेकिन ये फिर वापस जम जाते हैं। रामलीला मैदान का सौंदर्यीकरण भी हुआ। उसकी चहारदीवारी बनाई गई और गेट भी लगाया गया, लेकिन पुलिस और नगर निगम की ढिलाई से ये फिर बस जाते हैं। इसमें स्थानीय नेताओं की भी शह रहती है।
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हर बार कागजी कवायद
रामलीला मैदान के साथ ही उसके पास हैदर कैनाल पर बनी सड़क पर इनके कब्जे हैं। इनमें से कुछ कबाड़ का कारोबार करते हैं। ये लोग कहां से आए और कहां के रहने वाले हैं, इनका रिकार्ड कैसा है, इसकी जानकारी लोगों को नहीं है। आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए यह गंभीर मसला है, क्याेंकि बस्ती से थोड़ी ही दूरी पर राजभवन व योजना भवन है। एनेक्सी सचिवालय है और थोड़ा आगे विधानसभा व बापू भवन है। इसे लेकर अब प्रशासन चिंतित है। नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर वहां रहने वालों की जांच कराने व कब्जे हटवाने के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराने को कहा है।
बांग्लादेशियों की गिनती, उनको चिह्नित करना, अवैध रूप से देश में आए बांग्लादेशियों पर कानूनी कार्रवाई के अलावा बीते साल नगर निगम ने यह आदेश किया था कि वह बांग्लादेशियों से सफाई नहीं कराएगा। इसके लिए कार्यदायी संस्थाओं के अलाव कचरा प्रबंधन का काम करने वाली निजी कंपनी ईकोग्रीन से कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा गया था, लेकिन सफाई की गाड़ी डगमगाने पर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
बांग्लादेशियों की गिनती, उनको चिह्नित करना, अवैध रूप से देश में आए बांग्लादेशियों पर कानूनी कार्रवाई के अलावा बीते साल नगर निगम ने यह आदेश किया था कि वह बांग्लादेशियों से सफाई नहीं कराएगा। इसके लिए कार्यदायी संस्थाओं के अलाव कचरा प्रबंधन का काम करने वाली निजी कंपनी ईकोग्रीन से कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा गया था, लेकिन सफाई की गाड़ी डगमगाने पर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
यहां भी बसी हैं बंग्लादेशी बस्तियां
शहर में खाली प्लाट, नाला-नाली और बालू अड्डा, फैजुल्लागंज, इदिरा प्रियदशिर्नी वार्ड, हरी नगर, कुकरैल, रिंग रोड व पेपर मिल कॉलोनी सहित कई इलाकों में इनकी झुग्गियां बसी हैं। इन्हें यहीं के ठेकेदारों ने बसाया है। कूड़ा सफाई के अलावा प्लास्टिक बीनने में भी इनका बड़ा काम है।
नाला सफाई और भवन निर्माण के क्षेत्र में भी इनकी बड़ी मांग है, क्योंकि यह ठेकेदारों की नजर में बेहतर काम करते हैं। कूड़ा-कचरा और कबाड़ व मजदूरी का काम कराने वाले ठेकेदारों के मुताबिक इस समय शहर में करीब दो लाख बांग्लादेशी हैं।
प्रशासन की मदद से हटाएंगे
अवैध बस्तियों में बसे लोग कहां के हैं कौन हैं, इसकी जांच भी कराई जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। पहले कई बार बस्तियों को हटाया गया, लेकिन ये फिर काबिज हो गए। कुछ तो कबाड़ का कारोबार भी कर रहे हैं। अवैध बस्तियों को हटाने के साथ ही कबाड़ का काम करने वालों को भी शहर से बाहर किया जाएगा। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त
नाला सफाई और भवन निर्माण के क्षेत्र में भी इनकी बड़ी मांग है, क्योंकि यह ठेकेदारों की नजर में बेहतर काम करते हैं। कूड़ा-कचरा और कबाड़ व मजदूरी का काम कराने वाले ठेकेदारों के मुताबिक इस समय शहर में करीब दो लाख बांग्लादेशी हैं।
प्रशासन की मदद से हटाएंगे
अवैध बस्तियों में बसे लोग कहां के हैं कौन हैं, इसकी जांच भी कराई जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। पहले कई बार बस्तियों को हटाया गया, लेकिन ये फिर काबिज हो गए। कुछ तो कबाड़ का कारोबार भी कर रहे हैं। अवैध बस्तियों को हटाने के साथ ही कबाड़ का काम करने वालों को भी शहर से बाहर किया जाएगा। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त