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विहिप को झटका, 84 कोसी परिक्रमा पर लगा ग्रहण
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 20 Aug 2013 10:16 AM IST
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राज्य सरकार ने विश्व हिंदू परिषद की प्रस्तावित अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा पर रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि विहिप ने इस यात्रा की अनुमति मांगते हुए कहा है कि यात्रा राम मंदिर बनाने की मांग को लेकर की जा रही है।
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इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में पारित आदेश व कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए हैं।
राज्य सरकार के इस फैसले से अवगत कराते हुए प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने सोमवार को एनेक्सी के मीडिया सेंटर में खबरनवीसों से कहा कि विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने 25 अगस्त से 13 सितंबर के दौरान अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने इस यात्रा को विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने की मांग को लेकर आयोजित करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विहिप के इस आग्रह पर उन जिलों के डीएम व एसपी को निर्देश दिए थे कि वे अपने जिलों में स्थिति का आकलन लेते हुए यात्रा को लेकर फैसला करें और इससे शासन को अवगत कराएं।
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प्रमुख सचिव गृह ने कहा कि सभी जिलों के अधिकारियों ने यात्रा कराने की अनुमति से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि शासन ने इसके बाद यात्रा की अनुमति न दिए जाने अथवा उस पर रोक लगाने के अपने औपचारिक फैसले से अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
प्रमुख सचिव गृह ने क हा कि शासन का यह फैसला मुख्यतया दो कारणों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विवादित स्थल को लेकर इलाहाबाद उच्च अदालत की लखनऊ की विशेष खंडपीठ द्वारा जो फैसला किया गया था, उसके कई पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखे गए थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने इन पक्षों को सुनने के बाद नौ मई 2011 को यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा विवादित स्थल पर मंदिर बनाने की मांग को लेकर आयोजित की जा रही थी, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में संभव नहीं है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि दूसरा कारण यह है कि परंपरागत रूप से 84 कोसी परिक्रमा इस वर्ष संपन्न हो चुकी है। उन्होंने कहा कि परंपरागत तरीके से यह परिक्रमा चैत्र की पूर्णिमा से शुरू होकर वैशाख की पूर्णिमा तक चलती है।
यह अवधि 25 अप्रैल से 20 मई के दौरान व्यतीत हो गई। अब विहिप द्वारा भाद्रपद के माह में फिर से परिक्रमा करने की अनुमति मांगना नई परंपरा की शुरूआत करने के बराबर है। नई परंपरा की अनुमति दिया जाना उचित नहीं है।
इस मौके पर डीजीपी देवराज नागर ने कहा कि परिक्रमा छह जिलों से होकर पूरी होती है। इनमें फैजाबाद, बाराबंकी, गोंडा, अंबेडकरनगर, बस्ती व बहराइच शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नई परंपरा डालते हुए फिर से परिक्रमा की अनुमति दिया जाना कानून-व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं है। इसी वजह से परिक्रमा की अनुमति नहीं दी जा सकती है।