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बलरामपुर : सियासी राह खोज रही आधी आबादी, संसदीय चुनाव में अभी तक सिर्फ एक महिला को मिली जीत
Sat, 23 Mar 2024 02:42 PM IST
ishwar ashish
मंगलदेव गिरि, अमर उजाला, बलरामपुर
मंगलदेव गिरि, अमर उजाला, बलरामपुर
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 23 Mar 2024 02:42 PM IST
सार
बलरामपुर संसदीय सीट पर 1977 के चुनाव में कांग्रेस की सुभद्रा जोशी ने राजनीति के महारथी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पराजित कर नारी शक्ति का एहसास कराया था। यहां से विधानसभा में भी एक ही महिला प्रत्याशी स्थान बना सकी है।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
संसदीय चुनाव में राजनीति की दिशा तय करने का दम महिलाएं रखती हैं। श्रावस्ती संसदीय क्षेत्र में तो इनकी अहमियत साफ नजर आती है। 7.32 लाख महिला मतदाता वोट की ताकत पूरे दम से दिखाती हैं। इसके बाद भी ये सियासी मुकाम हासिल नहीं कर सकीं।
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भले ही अभी महिला नेतृत्व को अवसर नहीं मिल सका, लेकिन जब भी उन्हें मैदान में उतारा गया तो जीत का बड़ा संदेश भी दिया। बलरामपुर संसदीय सीट से 1977 के चुनाव में कांग्रेस की सुभद्रा जोशी ने राजनीति के महारथी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पराजित कर नारी शक्ति का एहसास कराया। इसी तरह बलरामपुर सदर विधानसभा से 2002 के चुनाव में सपा ने गीता सिंह को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने भाजपा के कद्दावर व कल्याण सिंह सरकार में गन्ना मंत्री रहे हनुमंत सिंह से जीत हासिल की।
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श्रावस्ती लोकसभा में लगाया जोर
- श्रावस्ती लोकसभा में भाग्य आजमाने के लिए आधी आबादी ने जोर लगाए रखा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पौत्री अंजली मिश्रा ने शहर में ठिकाना बनाया। बीते पांच साल सक्रिय भी रहीं। इसी तरह शेरावाली शुक्ला, ललिता सिंह, विनीता यादव, माधुरी सिंह त्रिपाठी व श्वेता त्रिपाठी भी टिकट के लिए जोर लगाए रहीं। फिलहाल भाजपा से टिकट तय होने और गठबंधन की सीट सपा के खाते में जाने से संभावितों का शोर थम गया है।
सबसे कम उम्र में बनीं अध्यक्ष
- एमएलके महाविद्यालय की छात्रा आरती तिवारी ने जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर खुद की नई पहचान बनाई। महिलाओं का शानदार नेतृत्व करते हुए मिसाल बनीं।
मतदान में आगे: सर्वाधिक मतदान प्रतिशत की बात करें तो वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने सबसे अधिक 55.09 फीसदी मतदान किया, जबकि पुरुषों का मतदान 48.03 फीसदी रहा। इसमें गैंसड़ी विधानसभा की 59.82 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, वहीं आधी आबादी 55.69 फीसदी के साथ उतरौला में दूसरा, 55.50 के साथ तुलसीपुर में तीसरा व 49.35 के साथ सदर सीट बलरामपुर में चौथा स्थान हासिल किया।
2017 में जिले की चारों विधानसभा सीटों पर आधी आबादी का मतदान प्रतिशत अव्वल रहा। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में 55.89 फीसदी के साथ महिलाओं का मत 46.39 प्रतिशत पुरुषों के सापेक्ष अव्वल रहा। आधी आबादी का 2022 के चुनाव में विधानसभा गैंसड़ी में 55.30, तुलसीपुर में 54.10, उतरौला में 51.27 व सदर में 50.90 फीसद मतदान रहा।