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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों की जमानत अर्जी खारिज
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लखनऊ। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर उन्हें चार गुने दाम पर बेचने के आरोपी अमन उर्फ सैयद आयाम हुसैन रिजवी और मो. अनस की जमानत अर्जी को प्रभारी सत्र न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्ता ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने आरोपियों की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा किया गया कृत्य समाज विरोधी व मानवता के विरुद्ध है। पकड़े गए दोनों आरोपी कोरोना पीड़ित मरीजों की जान बचाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करके चार से पांच गुने अधिक दामों में बेच रहे थे जिससे जनसामान्य में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो रहा था। भय का माहौल बनाकर आरोपी आर्थिक लाभ कमा रहे थे और जरूरतमंद व्यक्तियों को इस प्राण बचाने वाले इंजेक्शन से वंचित कर महामारी को बढ़ावा दे रहे थे। लिहाजा ऐसी स्थिति में आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाना किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं है।
जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी का तर्क था कि दोनों ही आरोपियों के पास से रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा इंजेक्शन को बेचने से प्राप्त हुई रकम भी पुलिस ने बरामद की है। आरोप है कि दोनों ही अभियुक्त एरा मेडिकल कॉलेज के पास जाकर जरूरतमंदों को कई गुने दाम पर इंजेक्शन बेचकर कालाबाजारी करते थे। आरोपियों ने बताया था कि उनका एक गिरोह है जिसमें मेडिकल स्टोर वाला भी शामिल है।
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कोर्ट ने आरोपियों की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा किया गया कृत्य समाज विरोधी व मानवता के विरुद्ध है। पकड़े गए दोनों आरोपी कोरोना पीड़ित मरीजों की जान बचाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करके चार से पांच गुने अधिक दामों में बेच रहे थे जिससे जनसामान्य में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो रहा था। भय का माहौल बनाकर आरोपी आर्थिक लाभ कमा रहे थे और जरूरतमंद व्यक्तियों को इस प्राण बचाने वाले इंजेक्शन से वंचित कर महामारी को बढ़ावा दे रहे थे। लिहाजा ऐसी स्थिति में आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाना किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं है।
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जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी का तर्क था कि दोनों ही आरोपियों के पास से रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा इंजेक्शन को बेचने से प्राप्त हुई रकम भी पुलिस ने बरामद की है। आरोप है कि दोनों ही अभियुक्त एरा मेडिकल कॉलेज के पास जाकर जरूरतमंदों को कई गुने दाम पर इंजेक्शन बेचकर कालाबाजारी करते थे। आरोपियों ने बताया था कि उनका एक गिरोह है जिसमें मेडिकल स्टोर वाला भी शामिल है।
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