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Bahraich: 10 मिनट तक संघर्ष कर तेंदुए के जबड़े से बेटे को खींच लाई मां, मौत के पंजे से बच्चे को छुड़ाया
Sun, 23 Nov 2025 08:53 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 23 Nov 2025 08:53 PM IST
सार
तेंदुआ बच्चे को खींचकर ले जाने की कोशिश कर रहा था। मां ने बिना किसी भय के बेटे को तेंदुए की पकड़ से खींचने का प्रयास किया, तेंदुए के जबड़े से बेटे को छुड़ाने के लिए मां ने करीब 10 मिनट तक जान की बाजी लगा दी।
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तेंदुए के हमले में घायल हुई महिला।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
जंगल से सटे दुर्गा गौढ़ी गांव में शनिवार देर शाम एक मां ने अपने छह वर्षीय बेटे को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाने के लिए करीब 10 मिनट तक संघर्ष किया। हमले में मां-बेटा दाेनों गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। दोनों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
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गांव निवासी श्रीदेवी (37) देर शाम को घर के बरामदे में बैठकर बेटे जितिन (6) को पुचकारते हुए काम कर रही थीं। तभी अचानक सड़क पार झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने हमला बोल दिया। तेंदुआ बच्चे को खींचकर ले जाने की कोशिश कर रहा था। मां ने बिना किसी भय के बेटे को तेंदुए की पकड़ से खींचने का प्रयास किया, तेंदुए के जबड़े से बेटे को छुड़ाने के लिए मां ने करीब 10 मिनट तक जान की बाजी लगा दी। इस पर तेंदुआ मां पर भी टूट पड़ा और उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया।
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मां-बेटे की चीख सुनकर ग्रामीण मौके की ओर दौड़े। लोगों की भीड़ देखकर तेंदुआ दोनों को छोड़कर जंगल की ओर गया, तब उनकी जान बच सकी। परिजनों ने रात में ही निजी वाहन की व्यवस्था कर घायल मां-बेटे को सीएचसी मिहींपुरवा पहुंचाया, जहां हालत गंभीर देख उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, दोनों का इलाज जारी है।
रात में ही धौरहरा रेंज की टीम गांव पहुंची और मौके पर पगचिह्नों की जांच कर तेंदुए के हमले की पुष्टि की। टीम ने ग्रामीणों से भी घटना के बारे में जानकारी ली और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया।
सीमा विवाद में अटका मुआवजा
दुर्गा गौढ़ी गांव ग्राम पंचायत जंगल मटेरा का मजरा है, जो कतर्नियाघाट के सुजौली रेंज और लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा रेंज की सीमा पर स्थित होने के कारण अक्सर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहता है। ग्राम प्रधान प्रेम मुरारी ने बताया कि घटना गंभीर होने के बावजूद अभी तक पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की सहायता या मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि दो अलग-अलग रेंज की सीमा पर बसे होने के कारण विभाग यह तय करने में देर कर देता है कि जिम्मेदारी किसकी है, और इसका खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। ग्राम प्रधान ने बताया कि परिजन रात में ही खुद वाहन की व्यवस्था कर गंभीर रूप से जख्मी मां और बच्चे को अस्पताल ले गए।
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