अवैध खनन के खेल से खुद को नहीं बचा पाईं सोशल मीडिया पर स्टार छवि रखने वाली आईएएस चंद्रकला
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2008 बैच की आईएएस चंद्रकला सपा शासनकाल में पहली बार कलेक्टर बन कर हमीरपुर गईं तो आम लोगों की सुनवाई करने वाली छवि पेश करने की कोशिश की लेकिन वहां अवैध खनन चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद चंद्रकला को मथुरा भेज दिया गया। यहां वह चार महीने ही रह पाईं।
यहां से बुलंदशहर गईं तो कड़क मिजाज और भ्रष्टाचार के खिलाफ छवि पेश करने की कोशिश की। उन्होंने नगर पालिका के इंटरलॉकिंग कार्य में घटिया ईंट का इस्तेमाल सामने आने पर मातहतों को ऐसी झाड़ लगाई कि सोशल मीडिया पर छा गईं। वहीं एक युवक ने साथ में सेल्फी लेने की कोशिश की तो उसे जेल भिजवा दिया।
आ गई थीं भाजपा के निशाने पर
चुनाव के पहले सपा सरकार ने उन्हें मेरठ भेजा तो वह भाजपा नेताओं के निशाने पर आ गईं। आरोप लगे की वह सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता की तरह काम कर रही हैं। चंद्रकला ने नई सरकार आने के पहले ही प्रदेश से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का रास्ता बना लिया था।
योगी सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए मार्च 2017 में ही मुक्त कर दिया। लेकिन वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर एक साल भी नहीं बिता पाईं और यूपी लौट आईं। यहां प्रदेश सरकार ने उन्हें विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा के पद पर तैनाती दी। मगर, वह चार महीने बाद ही स्टडी लीव पर चली गईं।
पूरे पांच वर्ष रहीं डीएम
आईएएस अफसर बी. चंद्रकला सपा राज की उन चुनिंदा आईएएस अफसरों में शामिल रहीं, जिन्हें सरकार के पूरे पांच वर्ष जिलाधिकारी रहने का अवसर मिला। हमीरपुर में अवैध खनन का मामला चर्चा में आने के बाद वह वहां से हटाई तो गईं, लेकिन एक जिले से दूसरे जिले की कलेक्टर बनाई जाती रहीं। अवैध खनन में नाम आने के बावजूद सोशल मीडिया में वह कड़क अफसर की छवि बनाए रहीं।