आजम ने राजनाथ को फिर भेजा 'इमोशनल' खत!
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आजम खां ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आधिकारिक ईमेल आईडी पर 21 अक्तूबर को एक मेल भेजा। मामला था उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों द्वारा दिए गए सांप्रदायिक बयानों का।
आजम ने राजनाथ को संविधान की मूल भावना, देश में सांप्रदायिक सौहार्द व उनकी जिम्मेदारी का बोध कराते हुए उनसे ऐसे बयानों पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन एक हफ्ता बीत जाने पर भी गृह मंत्रालय से कोई जवाब नहीं आया।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ की ओर से आजम के 'इमोशनल' खत का जवाब न मिलना आजम को अखर गया और उन्होंने मंगलवार को एक और खत लिखा और इसकी कॉपी मीडिया को भी कर दी।
आजम ने लिखा, 'प्रतीत होता है कि उक्त पत्र आपके संज्ञज्ञन मं लाया ही नहीं गया। अतः इस पत्र को अनुस्मारक के रूप में आपको पुनः भेजते हुए मीडिया बंधुओ को भी इसलिए जारी कर रहा हूं ताकि यह गंभीर मामला अविलंब आपके संज्ञान में आ सके और आपके स्तर से यथोचित कार्यवाही का निर्णय लिया जा सके।'
पढ़िए, आजम का खत (पार्ट-1)
आजम ने 21 अक्तूबर, 2014 को राजनाथ सिंह के लिए जो खत लिखा, वो हूबहू हम यहां आपके लिए पेश कर रहे हैं।
माननीय गृह मंत्री जी, आदाब अर्ज। आज सुबह से ही सभी टीवी चैनलों पर गृह मंत्रालय के हवाले से प्रभावी खबर दिखाई जा रही है कि भारत सरकार द्वारा देशभर में प्रमुख स्थानों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है, जिसमें देश के अन्य जनपदों के साथ उत्तर प्रदेश के भी कुछ जनपदों को इंगित किया गया है।
हाई अलर्ट में विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी भी पोस्टर, वाणी या प्रचार माध्यम से किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी अभिव्यक्ति न की जाए, जिससे किसी व्यक्ति अथवा धर्म को आघात पहुंचे।
हालांकि मुझे बहुत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि भारत सरकार के स्तर पर हुए राजनीतिक परिवर्तन का प्रमुख श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्राप्त होने के कारण, उसके अध्यक्ष द्वारा एक बार पहले और अब दूसरी बार, लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्मेलन में दोहराया गया है कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं।
बात केवल यहीं पर खत्म नहीं होती कि मुसलमानों को खास तौर पर निशाना बनाते हुए कहा गया है कि वे एक पंथ हैं बल्कि उनके द्वारा कव्वालियों और मजरात के बारे में भी बहुत ही अपमानजनक और दिल दुखाने वाली बातें कही गई हैं।
पढ़िए, आजम का खत (पार्ट-2)
मुझे इस बात का भी अंदेशा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में मिली जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता कोई ऐसी गलती न कर बैठें, जिससे अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा दिए गए भाषणों से प्रभावित होने वाले संकीर्ण विचारधारा के लोग तथा मुस्लिम समाज के दुश्मन उसका लाभ उठाने में कामयाब हो सकें।
इस तरह की संकीर्ण मानसिकता रखने वालों के द्वारा इस बात का भी ख्याल नहीं रखा गया कि इस महीने में दिवाली का पावन पर्व है, साथ ही यह महीना मोहर्रम का मुकद्दस महीना भी है। इस मौके पर सौहार्द और सहिष्णुता की खास जरूरत है।
चूंकि यह बात मेरे द्वारा एक ऐसे व्यक्ति को लिखी जा रही है, जो खुद उत्तर प्रदेश रह चुके हैं, लिहाजा मैं उम्मीद करूंगा कि आप द्वारा राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ के गैरजिम्मेदाराना बयान और मुस्लिमों को अपमानित करने के उद्देश्य से प्रयोग किए गए बयानों को संज्ञान में लिया जाएगा।
पढ़िए, आजम का खत (पार्ट-3)
यह संज्ञान आप इसलिए भी लेंगे क्योंकि इस्लाम धर्म भी अन्य धर्मों की तरह
शांति का प्रतीक है। उसका अपमान करना, उसके मानने वालों को अपमानित करना
तथा भारत की दूसरी बड़ी आबादी को भयभीत करना और उन्हें सहमी-सहमी जिंदगी
गुजारने के लिए मजबूर करना किसी भी तरह से देश हित में नहीं है।
आपसे खास उम्मीद रखता हूं और आशा करता हूं कि महान भारत देश के गृह मंत्री के रूप में आप द्वारा, देश में जो भी माहौल बन रहा है या बनाया जा रहा है, उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
साथ ही, यह भी उम्मीद करता करता हूं कि चूंकि इस देश क कानून और संविधान में सभी को बराबरी का दर्जा हासिल है इसलिए आप द्वारा कोई ऐसा निर्णय भी लिया जाएगा, जिससे कम से कम संविधान की इस मूल भावना का सम्मान हो।
साथ ही मेरा यह भी विचार है कि त्योहारों के इस महीने में तथा आगे भी किसी संस्था या राजनैतिक व्यक्ति द्वारा तुच्छ लाभ के लिए ऐसा कोई बयान नहीं दिया जाना चाहिए, जिससे किसी वर्ग विशेष में खौफ पैदा हो बल्कि कोशिश यह की जानी चाहिए कि देश में आपसी भाईचारा बढ़े और सौहार्द कायम रहे।