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आजम के स्टाफ को मिलेगी बगावत की सजा!
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
Updated Sat, 02 Nov 2013 12:10 PM IST
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संसदीय कार्य मंत्री एवं नगर विकास मंत्री आजम खां के स्टाफ के काम न करने का मामला उलझता जा रहा है।
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तीन दिन बीतने के बावजूद शासन इन कर्मियों के प्रत्यावेदन पर कोई फैसला नहीं कर पाया है।
संकेत है कि सरकार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है लेकिन इसके पहले सचिवालय के कामकाज में इसके संभावित असर का आकलन किया जा रहा है।
आजम खां के स्टाफ ने तीन दिन पहले अपमानित करने का आरोप लगाते हुए उनके कार्यालय में जाना बंद कर दिया था।
साथ ही सचिवालय प्रशासन विभाग से किसी अन्य विभाग में तैनाती की मांग की थी।
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मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद शासन ने कर्मियों को अर्दब में लेने की कोशिश करते हुए उन्हें फिर से विभाग में लौटने की हिदायत दी थी।
हालांकि सचिवालय संगठनों के जबर्दस्त समर्थन की वजह से कर्मचारी काम पर नहीं लौटे। शुक्रवार को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने सचिव सचिवालय प्रशासन अरविंद नारायण मिश्र से इस मामले में फीडबैक लिया।
सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों के काम पर न लौटने की सूचना पर इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का इशारा कर दिया गया हैं। इसके लिए आधार भी तलाश लिया गया है।
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कर्मचारियों द्वारा संसदीय कार्यमंत्री को लिखे गए पत्र को सचिवालय प्रशासन विभाग के अलावा उच्चाधिकारियों को सीधे भेजने व सचिवालय संघ को देने को कार्रवाई का पर्याप्त आधार के रूप में लिया जा रहा है।
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इसके बाद सचिव ने अपने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। यहां पूरी परिस्थिति पर विचार के बाद तय हुआ कि इस संबंध में दीपावली बाद निर्णय लिया जाएगा।
चर्चा है कि विभाग कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की दशा में उसके संभावित असर की थाह लेने में जुट गया है।
इसके लिए अधिकारियों को अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों से व्यक्तिगत संपर्क कर उनका मन और प्रकरण में उनकी मजबूती टटोलने का निर्देश दिया गया है।
आधिकारिक रूप से सचिवालय प्रशासन के अधिकारी पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का होगा विरोध
उधर सचिवालय के विभिन्न संवर्गों से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई तो वे संयुक्त रूप से इसका विरोध करेंगे।
शासन के कड़े रुख के संकेत के बाद सचिवालय संघ कार्यकारिणी की एक आपात बैठक हुई।
संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में सदस्यों ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा सचिवालय कर्मचारियों के विरुद्ध की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का संज्ञान न लेकर सरकार उल्टे पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही कार्रवाई का दबाव बना रही है।
बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
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