आजम का गुस्सा हिट, बागी स्टाफ की लगेगी वाट!
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संसदीय कार्यमंत्री आजम खां के सचिवालय स्थित कार्यालय के बागी स्टाफ को जांच में दोषी करार दे दिया गया है।
सचिवालय प्रशासन विभाग ने आरोपी निजी व अपर निजी सचिवों को जांच के निष्कर्ष की जानकारी देते हुए उस पर पक्ष रखने का एक मौका दिया है।
संसदीय कार्यमंत्री आजम खां पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए दो निजी व पांच अपर निजी सचिवों ने अक्तूबर 2013 में काम से इन्कार कर दिया था।
सचिवालय प्रशासन विभाग ने इन कर्मियों के इस कृत्य को अनुशासनहीनता व कर्मचारी आचरण नियमावली के खिलाफ बताते हुए उन्हें आरोप पत्र थमा दिया था।
आजम ने लगाया था गंभीर आरोप
मामले की जांच प्रमुख सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास राहुल भटनागर को सौंपी गई थी। यह जांच काफी समय तक लंबित रही।
पिछले दिनों जब संसदीय कार्यमंत्री ने आरोपी कर्मियों व सचिव सचिवालय प्रशासन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए पत्र लिखा और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर कड़ी नाराजगी जताई, तब शासन हरकत में आया।
आजम के पत्र के बाद जांच अधिकारी ने सचिव सचिवालय प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
अब सचिवालय प्रशासन विभाग ने आरोपी कर्मचारियों को जांच में दोषी करार दिए जाने की जानकारी दी है और जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर 10 दिन में जवाब देने का एक और मौका दिया है।
ठोक-बजाकर कार्रवाई करने के मूड में विभाग
जानकार बताते हैं कि सचिवालय प्रशासन विभाग मामले में ठोक बजाकर कार्रवाई करना चाहता है ताकि कर्मचारियों को अदालत जाने पर तत्काल राहत न मिल सके।
मामला आजम खां से जुड़ा होने और इस पर की जाने वाली कार्रवाई से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों का भी सचिवालय प्रशासन विभाग लगातार आकलन कर रहा है।
आरोपी अपर निजी सचिवों व निजी सचिवों को तीन मार्च को जारी पत्र में जिस तरह दोषी करार दिया गया है, उससे साफ है कि उनके खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
दबाव में तो दोषी नहीं ठहराया?
गौरतलब है कि इस पूरे मामले ने यूपी में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। यह पहला मामला था जब आजम की तुनकमिजाजी और खराब व्यवहार के खिलाफ खुलकर विरोध हुआ था।
आजम के स्टाफ के समर्थन में कई विभाग भी खुलकर सामने आ गए थे। हालांकि, आजम की सरकार में मजबूत पकड़ का ही नतीजा है कि इस मामले में नुकसान स्टाफ का ही होता दिख रहा है।
सचिवालय अपर निजी सचिव संघ के अध्यक्ष अमर सिंह पटेल भी कहते हैं कि कर्मचारियों को मंत्री के दबाव में दोषी करार दिया जाना ठीक नहीं है।
यदि उनके खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर कार्रवाई की गई तो सचिवालय के कर्मचारी संगठन चुप नहीं बैठेंगे।