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अखिलेश जी, आजम और अहमद हसन में ये कैसा बैर?
अजीत बिसारिया/लखनऊ
Updated Thu, 21 Nov 2013 12:55 AM IST
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नगर विकास मंत्री आजम खां ने राज्य कर्मचारियों की हड़ताल के बहाने एक बार फिर स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन पर निशाना साधा है।
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इस बार उन्होंने सरकारी पैथोलॉजी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करते हुए उसे गैर भरोसेमंद बताया। उन्होंने सरकारी मुलाजिमों पर काम न करने का तोहमत भी लगाया।
कहा, सरकारी दफ्तरों में काहिली का ही नतीजा है कि हड़ताल से कहीं भी आम लोगों को कोई दिक्कत नहीं हो रही है।
पर्यटन भवन में टीपू सुल्तान के योगदान को याद करने के लिए बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद आजम खां मीडिया से मुखातिब थे।
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पहले तो उन्होंने टीपू सुल्तान के अलावा किसी अन्य विषय पर बातचीत करने से इन्कार कर दिया, मगर मंच से नीचे उतरते ही वे मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब देने लगे।
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हड़ताल का मुद्दा आते ही इशारे ही इशारे में अहमद हसन के स्वास्थ्य महकमे का उदाहरण देते हुए सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘सरकारी दफ्तरों में सामान्य दिनों में भी कर्मचारी कभी काम करते हैं और कभी नहीं। इसलिए आम लोगों ने सोच लिया है कि ये ऐसे ही दिन हैं जिनमें कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं।’
आजम यहीं नहीं रुके। कहा, ‘हां, ब्लड टेस्ट नहीं हो पा रहा है, लेकिन सामान्य दिनों में भी लोग रिलायबल (भरोसेमंद) जगहों पर ही ब्लड टेस्ट कराना पसंद करते हैं।
हड़ताल के दौरान भी वे ऐसा ही कर रहे होंगे।’ भरोसेमंद जगहों से उनका इशारा प्राइवेट पैथोलॉजी या जांच केंद्रों की ओर था।
आजम ने मीडिया को भी नहीं बख्शा। कहा,‘मीडिया हमारे पीछे पड़ा है। हम बड़ी सभाएं करते हैं, जिनमें लाखों लोग खड़े होकर समाजवादी नेताओं को सुनते हैं, मगर ज्यादा तरजीह नरेंद्र मोदी की रैलियों को दी जाती है। मोदी की रैलियों में खाली कुर्सियों की तरफ मीडिया का ध्यान ही नहीं जाता’।
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