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आयुष्मान घोटाला : अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध, साचीज के कर्मी रडार पर
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लखनऊ। आयुष्मान योजना में 9.94 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में रहस्य गहरा गया है। पूरे प्रकरण में अस्पतालों की संलिप्तता का शक जताया जा रहा है। हजरतगंज पुलिस स्टेट एजेंसी साचीज के कर्मचारियों व अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि किन लोगों ने ईमेल आईडी का दुरुपयोग कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया है।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के मुताबिक, साचीज के नोडल अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव से प्रकरण से संबंधित कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं। स्टेट एजेंसी की ओर से भी जांच की जा रही है। गड़बड़ी कहां पर हुई, इसके बारे में जानकारी की जा रही है। जल्द ही मामले का राजफाश कर दिया जाएगा।
ये है मामला
उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान में घपला उजागर हुआ था। हजरतगंज थाने में स्टेट एजेंसी साचीज के नोडल अधिकारी की ओर से अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है। छानबीन में एजेंसी के सीईओ, मैनेजर और लेखाधिकारी की ईमेल आईडी के दुरुपयोग और 39 अस्पतालों में 6239 लाभार्थियों के नाम से फर्जी भुगतान की बात सामने आई थी। पुलिस ने स्टेट एजेंसी से 39 अस्पतालों की सूची मांगी है। सूची मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही फर्जीवाड़ा करने वालों के बारे में जानकारी हो सकेगी।
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इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के मुताबिक, साचीज के नोडल अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव से प्रकरण से संबंधित कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं। स्टेट एजेंसी की ओर से भी जांच की जा रही है। गड़बड़ी कहां पर हुई, इसके बारे में जानकारी की जा रही है। जल्द ही मामले का राजफाश कर दिया जाएगा।
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ये है मामला
उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान में घपला उजागर हुआ था। हजरतगंज थाने में स्टेट एजेंसी साचीज के नोडल अधिकारी की ओर से अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है। छानबीन में एजेंसी के सीईओ, मैनेजर और लेखाधिकारी की ईमेल आईडी के दुरुपयोग और 39 अस्पतालों में 6239 लाभार्थियों के नाम से फर्जी भुगतान की बात सामने आई थी। पुलिस ने स्टेट एजेंसी से 39 अस्पतालों की सूची मांगी है। सूची मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही फर्जीवाड़ा करने वालों के बारे में जानकारी हो सकेगी।
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