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अयोध्या: भक्तों की संख्या बढ़ने के बावजूद आखिर क्यों घटता गया चढ़ावा, एसआईटी के यह बात बनी गुत्थी

Thu, 25 Jun 2026 07:15 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 25 Jun 2026 07:15 PM IST
सार

Ram Temple offerings controversy: राम मंदिर में श्रद्धालुओं के अर्पित चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चढ़ावे में अनियमितता के आरोपों ने कई प्रश्न खड़े किए हैं। 

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Ayodhya: Why has the offering of offerings been declining despite the increase in the number of devotees
राम मंदिर चढ़ावे चोरी मामला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन इसके विपरीत मंदिर को प्राप्त होने वाले चढ़ावे और कुल आय में साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई है। यही विरोधाभास अब राम मंदिर की दान व्यवस्था की जांच कर रही एसआईटी के लिए भी महत्वपूर्ण जांच बिंदु बन गया है।

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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मंदिर को 363.34 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2024-25 में 327.07 करोड़ रुपये रहा, जबकि वर्ष 2025-26 में कुल आय केवल 220.81 करोड़ रुपये दर्ज की गई। यानी तीन वर्षों में कुल आय में करीब 142 करोड़ रुपये की कमी आई है। दिलचस्प तथ्य यह है कि इसी अवधि में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही। 2023 में 5.75 करोड़, 2024 में 16.44 और पिछले साल 2025 में 22.42 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। इस साल मई तक सात करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आ चुके हैं।
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ट्रस्ट के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 70 से 80 हजार श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं। पर्व, त्योहार और सप्ताहांत पर यह संख्या दो से तीन गुना तक पहुंच जाती है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी इस तथ्य का भी परीक्षण कर रही है कि जब मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है, तो फिर दान और चढ़ावे की राशि में लगातार गिरावट किस कारण से दर्ज हो रही है। जांच एजेंसी दान संग्रहण, गणना, रिकॉर्डिंग, बैंक जमा प्रक्रिया तथा विभिन्न माध्यमों से प्राप्त दान के आंकड़ों का मिलान कर रही है।

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राम मंदिर ट्रस्ट के खाते में 1940 करोड़ रुपये जमा

Ayodhya: Why has the offering of offerings been declining despite the increase in the number of devotees
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस - फोटो : अमर उजाला

वित्तीय वर्ष 2023-24 में दानपात्र से 24.50 करोड़ रुपये, काउंटर पर 53 करोड़ रुपये और विदेशी दान के रूप में 10.43 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि कुल आय 363.34 करोड़ रुपये रही थी। वर्ष 2024-25 में विभिन्न माध्यमों से कुल 153.71 करोड़ रुपये दान मिला। इसमें दानपात्र से 105.38 करोड़ रुपये, दान काउंटर से 34.99 करोड़ रुपये तथा ऑनलाइन माध्यम से 12.80 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वहीं वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को कुल 220.81 करोड़ रुपये की आय हुई, जिसमें केवल हुंडी (दानपात्र) से 54.79 करोड़ रुपये और ऑनलाइन माध्यम से 8.33 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इन आंकड़ों ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है। ट्रस्ट का कहना है कि उसके बैंक खातों में वर्तमान में लगभग 1940 करोड़ रुपये जमा हैं, जबकि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों पर अब तक करीब 1800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

आस्था की चौखट पर उठे सवाल, देशभर में गूंज रहा चढ़ावा विवाद

 राम मंदिर में श्रद्धालुओं के अर्पित चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चढ़ावे में अनियमितता के आरोपों ने केवल प्रशासनिक प्रश्न ही खड़ा किया है, बल्कि आस्था, विश्वास और जवाबदेही को लेकर भी व्यापक बहस छेड़ दी है।

राम मंदिर में बीते दिनों चढ़ावा चोरी के मामले की शुरुआत मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के लगाए गए आरोपों से हुई। आरोप सार्वजनिक होते ही चर्चा का दायरा अयोध्या से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। सोशल मीडिया मंचों पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कोई इसे व्यवस्था की गंभीर चूक बता रहा है तो कोई जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दे रहा है।

आरोपों और शिकायतों के सार्वजनिक होने के बावजूद अब तक रिपोर्ट दर्ज न होना भी चर्चा का व्यापक केंद्र बना है। यही कारण है कि जनमानस में तरह-तरह के प्रश्न उठ रहे हैं। प्रकरण की सच्चाई और जांच की दिशा जानने के लिए लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है।

करोड़ों लोगों की भावनाओं का केंद्र है राम मंदिर

राम मंदिर केवल पत्थरों से निर्मित एक भव्य स्थापत्य नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का केंद्र है। रामलला के चरणों में समर्पित होने वाली हर अर्पण राशि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए विवाद का असर केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे से भी जुड़ गया है जो देशभर के श्रद्धालु रामलला के दरबार से जोड़कर देखते हैं। धार्मिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी आवश्यकता पारदर्शिता की होती है। क्योंकि मंदिरों की सबसे बड़ी पूंजी धन नहीं, बल्कि जनविश्वास होता है। फिलहाल आरोप, प्रत्यारोप और चर्चाओं के बीच यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बना हुआ है। 

एसआईटी की जांच रिपोर्ट और एफआईआर का इंतजार
सोशल मीडिया पर राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी चर्चा में हैं। लोग उन पर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। इनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों में सक्रिय रहे गोपाल राव सर्वाधिक निशाने पर हैं। इसके अलावा चंपत राय के करीबी टिन्नू का नाम भी हर किसी की जुबान पर है। चर्चा अब चाक-चौराहों से लेकर घर-घर तक पहुंच गई है। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट और आरोपियों पर एफआईआर का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है लेकिन अब तक मामले में पुलिस को तहरीर नहीं मिली है। सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि अब तक उनके संज्ञान में तहरीर मिलने जैसी बात सामने नहीं आई है।

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