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अयोध्या: राम मंदिर जाने के लिए 31 साल बाद हटाई गईं यातायात प्रतिबंध की बेड़ियां, 1992 के बाद से हुई थी सख्ती

Sun, 16 Jun 2024 09:41 AM IST
रोहित मिश्र नितिन मिश्र, अमर उजाला संवाद, अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 16 Jun 2024 09:41 AM IST
सार

 Ayodhya Ram Mandir Traffic Restrictions : राम मंदिर  जाने के लिए रामकोट में कदम दर कदम पड़ने वाली यातायात प्रतिबंध की बेड़ियां हटा ली गई हैं। अब आम लोग भी चार पहिया वाहन से काफी अंदर तक जा सकेंगे।

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Ayodhya Ram Mandir News: Traffic Restrictions Removed To Go To Ram Temple, Strictness Imposed Since 1992
अयोध्या राम मंदिर पथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 रामनगरी में लंबे समय से कदम दर कदम जकड़ी यातायात प्रतिबंध की बेड़ियां अब काफी हद तक हटा दी गई हैं। प्रशासन और पुलिस ने कई तरह की सुरक्षा बंदिशों में ढील दी है। टेढ़ी बाजार चौराहे से बैरियर हटा दिए गए। यहां से राम जन्मभूमि पथ के पास श्रीराम अस्पताल तक चार पहिया वाहनों को प्रवेश मिलने लगा है। रामघाट चौराहे पर भी वाहनों को नहीं रोका जाएगा।
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अयोध्या में प्रमुख पर्वों के अलावा वीकेंड यानि शनिवार व रविवार को श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक होती है। इस दौरान यातायात प्रतिबंधों का दंश अभी तक स्थानीय लोगों के साथ देश भर से आने वाले श्रद्धालु झेल रहे थे। रामनगरी में रहने वालों को तो सामान्य दिनों में भी सुरक्षा कारणों से तमाम झंझावतों का सामना करना पड़ता था। शनिवार से इसमें काफी राहत दे दी गई है।
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यातायात प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से सबसे ज्यादा राहत रामकोट के वासियों को मिली है। पहले टेढ़ी बाजार बैरियर व गोकुल भवन बैरियर पार कर वही वाहन जाते थे, जिन्हें विशेष अनुमति होती थी या फिर जिनके पास यलो जोन का पास हो। अब टेढ़ी बाजार से चार पहिया वाहन सीधे कटरा, अशर्फी भवन होते हुए रामपथ पर पहुंच सकते हैं।
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हालांकि उनवल बैरियर से रामजन्मभूमि की ओर चार पहिया वाहनों का प्रवेश अभी भी प्रतिबंधित है। इधर वही वाहन जा सकेंगे, जिनको कंट्रोल रूम से जाने की अनुमति दी गई होगी। रामघाट चौराहे से भी चार पहिया वाहनों का प्रवेश अभी तक प्रतिबंधित रहता था, लेकिन शनिवार से यहां सुगम आवाजाही शुरू हो गई। एसपी सिटी मधुबन सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए प्रतिबंधों में कुछ ढ़ील दी गई है। सुरक्षा मानकों के अनुसार चेकिंग और चौकसी पहले की तरह ही रहेगी।

अब कंट्रोल रूम के मैसेज व यलो जोन पास की बाध्यता खत्म

Ayodhya Ram Mandir News: Traffic Restrictions Removed To Go To Ram Temple, Strictness Imposed Since 1992
अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर। - फोटो : amar ujala

 सर गाड़ी का नंबर नोट है, देख लीजिए, राम मंदिर दर्शन के लिए जाना है। सुरक्षाकर्मी बोलते हैं, नंबर देखने की जरूरत नहीं है, आप जा सकते हैंं। दिल्ली के श्रद्धालु अमरनाथ साहू मुस्कुरा कर जय श्रीराम बोलते हुए आगे बढ़ जाते हैं। थोड़ी देर बाद निखिल गोस्वामी अपना चार पहिया वाहन लेकर आते हैं, सुरक्षाकर्मी को यलो जोन का पास दिखाते हैं, सुरक्षाकर्मी फिर कहते हैं, इसकी जरूरत नहीं, आप जा सकते हैं। यह दृश्य टेढ़ी बाजार बैरियर का है। जहां से अब तक वही चार पहिया वाहन गुजर पाते थे, जिनका नंबर कंट्रोल रूम से नोट कराया गया हो या फिर जिनके पास यलो जोन का पास है, लेकिन शनिवार को यहां बैरियर हटा दिए गए। रोक-टोक भी खत्म हो गई। इसके चलते श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों का आवागमन अयोध्याधाम में पहले की तुलना में काफी सुगम हो गया है।

1993 में बने एक्ट के बाद रामकोट में बढ़ गए प्रतिबंध
छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद रामकोट में प्रतिबंध बढ़ा दिए गए थे। इसके बाद 1993 में अयोध्या एक्ट बनाया गया, जिसके बाद प्रतिबंधों में और इजाफा हो गया। पांच जुलाई वर्ष 2005 को राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले के बाद रामकोट को सुरक्षा प्रतिबंधों में जकड़ दिया गया। स्थानीय लोगों के लिए यलो जोन के पास बनाए गए। स्थानीय निवासियों को रोजाना असुविधा का सामना करना पड़ता था।

यूं ही नहीं दी गई प्रतिबंधों में ढील

अयोध्या धाम में यातायात प्रतिबंधों की बेड़ियां यूं ही नहीं खोली गई हैं। चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा की पराजय के बाद शासन-प्रशासन की आंख खुली है। भाजपा की पराजय के बाद से अयोध्या वासियों को सोशल मीडिया पर कोसा भी जा रहा था। इसके बाद रामनगरी के साधु-संतों ने प्रतिक्रिया भी दी थी। संतों ने भाजपा की हार का एक कारण अयोध्या में बेवजह के यातायात प्रतिबंधों को भी बताया था। महंत अवधेश दास कहते हैं कि रणनीतियां बनाने में शासन व प्रशासन से चूक हो गई। जो काम अब प्रशासन कर रहा है, वहीं पहले कर दिए होते तो आज शर्मिंदा न होना पड़ता। उनका इशारा लोकसभा चुनाव में भाजपा की पराजय की ओर था। अबकी रामनवमी मेले में इस कदर प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे कि श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम रही। भक्त अपने गुरु आश्रमों व मठ-मंदिरों तक पहुंच ही नहीं पाए। सीमाओं पर ही वाहनों को रोक दिया जाता था। साधु-संतों के साथ अयोध्या का हर एक नागरिक और यहां आने वाले श्रद्धालु इन प्रतिबंधों से परेशान थे।

इस फैसले का हुआ स्वागत

 प्रशासन का यह अच्छा निर्णय है। आए दिन प्रवेश के लिए पुलिस से नोक-झोंक होती थी। गोवंशों के लिए भूसा लाने की गाड़ियां तक नहीं आ पातीं थीं। पुलिस से बात करने पर जांच-पड़ताल के बाद ही वाहनों को प्रवेश मिलता था। -महंत शशिकांत दास

पिछले कुछ वर्षों से रामकोट वासी कैद से हो गए थे। चार पहिया वाहन लेकर रामकोट में प्रवेश करना मुश्किल था। शादी-विवाह, भंडारा आदि कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों को परेशानी होती थी। भक्त मंदिर तक बड़ी मुश्किल से पहुंच पाते थे। प्रशासन का निर्णय सराहनीय है। -महंत जयराम दास

रामकोट के दुकानदारों की बुरी हालत थी। दुकानदारी के लिए माल तक लाने में परेशानी होती थी। आए दिन सुरक्षाकर्मियों से व्यापारियों की बहस होती थी। सुरक्षा प्रबंधों में ढील का सबसे ज्यादा लाभ निश्चित रूप से व्यापारियों को मिलेगा। - पंकज गुप्त, व्यापारी

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद बढ़े प्रतिबंधों ने परेशानी बढ़ा दी थी। स्कूल जाने वाले बच्चे तक परेशानी झेलते थे। टेढी बाजार, रामघाट व नयाघाट से चार पहिया वाहनों को प्रवेश मिलता ही नहीं था। अब प्रतिबंधों में कुछ कमी की गई है। प्रशासन का यह देर से लिया गया अच्छा निर्णय है। - डॉ. आनंद उपाध्याय, चिकित्सक

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