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'500 साल बाद कुश की भूमिका में होंगे पीएम मोदी'
Tue, 28 Jul 2020 02:15 PM IST
Vikas Kumar
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 28 Jul 2020 02:15 PM IST
सार
-महाराज कुश ने बनवाया था श्रीरामजन्मभूमि पर पहला मंदिर
-अयोध्यावासियों के मन में त्रेतायुग की वह घटना सजीव होती दिख रही है
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पीएम मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अयोध्यावासियों के मन में त्रेतायुग की वह घटना सजीव होती दिख रही है, जब पहली बार श्रीरामजन्मभूमि मंदिर की नींव प्रभु राम के पुत्र महाराज कुश ने रखी थी। संत कहते हैं कि मोदी अब महाराज कुश की भूमिका में हैं। जैसे श्रीराम के प्रजा समेत दिव्यधाम को प्रस्थान करने से अयोध्या उजाड़ हो गई थी तो, कुशावती (कौशांबी) के राजा कुश ने आकर अयोध्या को बसाया। ठीक उसी तरह अयोध्यावासी ही नहीं बल्कि, समूचा विश्व मोदी के जरिए सदियों से बहुप्रतीक्षित रामायण कालीन दृश्य और नव्य अयोध्या का आकांक्षी है।
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दशरथ महल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्याचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य कहते हैं कि लोमश रामायण के अनुसार कुश ने कसौटी के 84 खंभों से युक्त मंदिर जन्मभूमि पर बनवाया था। मंदिर में जिन कसौटी के 84 खंभों को लगाया गया था, उसकी भी पौराणिक कथाएं हैं।
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जगतगुरु श्रीरामदिनेशाचार्य कहते हैं कि इन खंभों को प्रभु राम के पूर्वज इक्ष्वाकु वंश के महाराज अनरण्यक के आदेश पर विश्वकर्मा ने तैयार किया था। लेकिन बाद में रावण ने अनरण्यक को परास्त कर समूची अयोध्या में लूटपाट की और महल में लगे इन दिव्य खंभों को लंका ले गया। जिसे बाद में राम-रावण युद्ध के बाद हनुमान जी अयोध्या लाए थे। इसी खंभों से कुश ने श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाया था, जहां चैत्र शुक्ल रामनवमी के शुभ अवसर पर प्रभुराम के बालरूप की मूर्ति स्थापित हुई थी।
वे कहते हैं कि आज भी हनुमानगढ़ी में प्रतीक स्वरूप एक स्तंभ है, जिसकी भक्त परिक्रमा करते हैं। कहा जाता है कि उसे हनुमानजी लंका से लाए थे। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास कहते हैं कि अब लाखों वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महाराज कुश की भूमिका निभानी है। सेवानिवृत्त आईएएस नृपेंद्र मिश्र को शौर्य, बुद्धि और कौशल दिखाना होगा। इन्हीं के कंधे पर मंदिर की भव्यता टिकी है। यह कार्य आदि शिल्पी विश्वकर्मा की कृपा से चंद्रकांत सोमपुरा और उनके पुत्र निखिल व आशीष को कड़ी मेहनत से साकार करना होगा।