फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ayodhya rape case: Abortion can be done without permission from the board up to 24 weeks, these are the rules

अयोध्या दुष्कर्म मामला: 24 सप्ताह तक बिना बोर्ड से अनुमति लिए हो सकता है गर्भपात, ये हैं विभाग के नियम

Tue, 06 Aug 2024 06:36 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 06 Aug 2024 06:36 AM IST
सार

अयोध्या में किशोरी से बलात्कार के बाद गर्भपात को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बहस इस बात की है कि वह किशोरी बच्चे दे या न दे। ऐसा फैसला हो जिसमे उसकी जान का कोई खतरा न रहे। 
 

विज्ञापन
Ayodhya rape case: Abortion can be done without permission from the board up to 24 weeks, these are the rules
24 सप्ताह तक हो सकता है गर्भपात। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या में किशोरी से बलात्कार के बाद गर्भपात को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक अब 24 सप्ताह तक का गर्भपात चिकित्सक की निगरानी में हो सकती है, लेकिन 24 सप्ताह से अधिक समय होने पर राज्य स्तरीय बोर्ड से अनुमति लेनी होती है। बोर्ड की निगरानी में ही यह गर्भपात होगा।

विज्ञापन


सुरक्षित गर्भपात अधिनियम 1971 के तहत पहले 20 से अधिक के गर्भपात के लिए राज्य स्तरीय बोर्ड से अनुमति ली जाती थी, लेकिन वर्ष 2021 में हुए बदलाव के बाद इसे बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया है। राज्य स्तरीय बोर्ड की अध्यक्ष केजीएमयू स्त्री एवं प्रसुति रोग विभागाध्यक्ष हैं। इसी तरह बाल रोग, हृदय रोग, मानसिक रोग सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के आठ विभागाध्यक्षों को कमेटी में बतौर सदस्य नामित किया गया है। परिवार कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 12 सप्ताह तक के गर्भपात कोई भी चिकित्सक अकेले करा सकता है, जबकि 12 से 24 सप्ताह के लिए दो डॉक्टरों का पैनल होना चाहिए। लेकिन यह गर्भपात कोर्ट के आदेश अथवा गर्भवती की जान को खतरे की स्थिति में ही कराया जा सकता है।
विज्ञापन


गर्भस्थ शिशु का हो सकता है डीएनए टेस्ट
एसजीपीजीआई की प्रोफेसर डा. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि गर्भस्त शिशु का डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) टेस्ट किया जा सकता है, लेकिन एक फीसदी मामले में महिला की जान को खतरा रहता है। यही वजह है कि डीएनएन टेस्ट से पहले लीगल कार्यवाही पूरी करनी होती है। केजीएमयू की पूर्व विभागाध्यक्ष डा. एसपी जैसवार ने बताया कि डीएनए से पितृत्व परीक्षण सटीक रूप से किया जा सकता है। इसके लिए नॉनइनवेसिक प्रीनेटल पैटरनिटी (एनआईपीपी) टेस्ट भी किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश में सामान्य गर्भपात की स्थिति
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट 2019-21 के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 15 से 19 वर्ष के बीच 412 गर्भवती होती हैं, जिसमें 3.5 फीसदी किसी न किसी कारण गर्भपात कराती हैं। इसी तरह 20 से 29 वर्ष के बीच की 17280 गर्भवती में 2.8 फीसदी को गर्भपात कराना पड़ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed