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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ayodhya: Ram temple will be adorned with 125 themes of Ram Katha

रामकथा के 125 प्रसंगों से सजेगा राममंदिर, मूर्ति को आकार देने के काम में आई तेजी

Tue, 12 Nov 2019 05:02 PM IST
ishwar ashish नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Tue, 12 Nov 2019 05:02 PM IST
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Ayodhya: Ram temple will be adorned with 125 themes of Ram Katha
तैयार की जा रहीं प्रसंगों पर आधारित मूर्तियां। - फोटो : अमर उजाला

श्रीराम जन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर के लिए पत्थर तराशी के साथ ही मूर्तियों का भी निर्माण कार्य चल रहा है। विहिप के प्रस्तावित राममंदिर मॉडल के अनुसार राममंदिर के गर्भगृह के पास रामकथा कुंज विकसित किया जाएगा। रामकथा कुंज को 125 प्रसंगों से सजाकर यहां त्रेतायुग को जीवंत करने की तैयारी है। इसके लिए रामकथा प्रसंगों की मूर्तियों को आकार देने का काम पिछले छह वर्ष से जारी है।

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अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद अब राममंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। इन सबके बीच राममंदिर के गर्भगृह में बनने वाले रामकथा कुंज के लिए मूर्तियां बनाने का काम भी तेज कर दिया गया है। शीघ्र ही कारीगरों की संख्या बढ़ाने पर विचार हो रहा है। विहिप के प्रस्तावित राममंदिर मॉडल के अनुसार मंदिर के संपूर्ण परिसर की परिधि पर रामकथा कुंज निर्मित होगा।
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योजना के अनुसार दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ व रामजन्म से लेकर मां सीता के धरती में समाहित होने तथा राम की जलसमाधि से स्वधाम गमन तक के पूरे सवा सौ प्रसंग तैयार होने हैं। हर प्रसंग में औसतन छह मूर्तियां और प्रसंग के अनुरूप अन्य छवियों का अंकन किया जाना है। इस हिसाब से करीब 750 मूर्तियां तैयार की जाएंगी।
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अब तक पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर रामजन्म, बाललीला, वशिष्ठ के आश्रम में विद्या अध्ययन, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का, सुबाहु वध, सीता जन्म, अहिल्या उद्धार, स्वयंवर सभा, राम वनवास से लेकर सीता हरण तक के 35 प्रसंगों को आकार दिया जा चुका है।

विभिन्न प्रसंगों पर आधारित मूर्तियां हो रहीं तैयार

ये मूर्तियां सीमेंट, सरिया और कंक्रीट के मिश्रण से बनाई जा रही हैं। इन मूर्तियों को इस तरह बनाया जा रहा है कि ये श्रीराम के जीवनकाल के आरंभ से लेकर सरयू में जलसमाधि होने तक के सभी प्रमुख प्रसंगों से श्रद्धालुओं का रूबरू कराएं। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं कि 1991 में कल्याण सिंह सरकार ने राम जन्मभूमि न्यास को लगभग 42 एकड़ जमीन लीज पर दी थी।

लीज पर मिली इसी जमीन पर राम कुंज की स्थापना की तैयारी थी मगर 1993 में केंद्र सरकार ने उक्त जमीन का अधिग्रहण कर लिया। जिससे वहां रामकुंज की स्थापना की इच्छा पूरी न हो सकी। अब राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के साथ ही रामकथा कुंज को भी विकसित करने का स्वप्न साकार होगा।

रामसेवकपुरम में आकार ले रहे रामकथा के विभिन्न प्रसंग देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे मानो त्रेतायुग में आ गए हैं। हनुमान जी के बगल के अधिष्ठान पर दशरथ पु़त्रेष्टि यज्ञ कर रहे होते हैं। एक अन्य प्रसंग में चारों भाई गुरु के आश्रम में धनुष चलाने का अभ्यास कर रहे हैं।

तो एक प्रसंग में राम बनवास के बाद राजा दशरथ की मृत्यु का प्रसंग कुछ क्षण के लिए भावविभोर कर देता है। ऐसे ही अन्य प्रसंगों को जीवंत करने में जुटे मुख्य कारीगर रंजीत मंडल बताते हैं कि हमें भी इंतजार है कि कब ये मूर्तियां राममंदिर का हिस्सा बनेंगी और हमारा जीवन धन्य होगा।

2013 से चल रहा मूर्तियां बनाने का काम


मुख्य कारीगर रंजीत मंडल बताते हैं कि अशोक सिंघल के निर्देश पर 2013 से मूर्तियां बनाने का काम शुरू हुआ था। वे अपने पिता नारायण मंडल के साथ मूर्तियों को आकार देने में जुटे हैं। कहा कि फैसला आने के बाद मूर्तियों के काम में तेजी लाने का निर्देश मिला है। मूर्तियों का काम जल्द से जल्द पूरा हो इसके लिए बाहर से भी कारीगर बुलाने पर चर्चा चल रही है। करीब एक दर्जन कारीगर हो जाएं तो दो साल में इन प्रसंगों को मूर्तिमान करने का काम पूरा हो जाएगा।

त्रेतायुग को जीवंत करने का सपना होगा साकार
फैसला आने के बाद राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि पर जब भव्य राममंदिर का निर्माण होगा तब स्वाभाविक है उसके परिसर को सुसज्जित किया जाएगा। ऐसे में परिसर में रामकथा कुंज की स्थापना कर त्रेतायुग को जीवंत करने का हमारा स्वप्न भी साकार होगा। अगर काम तेज नहीं होगी तो हम समय से मूर्तियां दे नहीं पाएंगे। जो कारीगर हैं वह आसोम के हैं। शीघ्र ही उनके कुछ सहयोगी बढ़ाए जाएंगे। - शरद शर्मा, प्रांतीय मीडिया प्रभारी विहिप
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