जानिए इस बार राम मंदिर के लिए चाहिए किस तरह का दान?
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संतों की तरफ से अयोध्या का राममंदिर बनाने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। इस बार इस निर्माण के लिए एक अलग किस्म के पत्थर मगाएं जा रहे हैं। निर्माण के लिए भक्तों से शिलादान अभियान में अभी कई पेंच हैं।
श्रीरामजन्मभूमि न्यास ने सवा रुपये प्रति व्यक्ति दान लेने के पुराने अभियान की जगह इस बार शिलादान लेने की घोषणा की है। रणनीतिकार कहते हैं कि शिला कोई ऐसी-वैसी नहीं चाहिए, सिर्फ राजस्थान के वंशी पहाड़ का ही शिलाखंड राममंदिर निर्माण में प्रयुक्त हो सकता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि भक्त कैसे वंशी पहाड़ का शिलादान करने आगे आएंगे। जाहिर है कि कहीं न कहीं धन संग्रह के बाद ही शिलाएं खरीदकर प्रांत, मंडल, जिला या इलाका वार अयोध्या लाई जाएंगी।
चाहिए वही पत्थर
एक बार फिर विहिप और संत-धर्माचार्यों ने मंदिर निर्माण के लिए शिलादान की योजना बनाई है। इसके कितने चरण और क्या-क्या पड़ाव होंगे, सब गोपनीय रखा गया है। मगर शिलादान की घोषणा विहिप सुप्रीमों व रामजन्मभूमि न्यास प्रमुख ट्रस्टी अशोक सिंहल के करने के साथ कई सवाल उठ रहे हैं।
पिछली बार की तरह सवा रुपये का दान न लेकर पत्थर दान अयोध्या में लेने की नई रणनीति में भक्त कैसे हिस्सा लें, सब जानना चाहते हैं। इस मामले में कारसेवकपुरम में जुटे विहिप सुप्रीमो अशोक सिंहल, महामंत्री व कार्यशाला प्रमुख चंपत राय, पुरुषोत्तम सिंह आदि की टीम एक बात के लिए स्पष्ट दिखी कि पत्थर तो वही दान में लिया जाएगा, जिसकी उपयोगिता राममंदिर निर्माण में हो।
पहले तल के लिए राजस्थान के वंशी पहाड़ के पत्थरों के शिलाखंड तराशे गए हैं, दूसरे तल में भी यही पत्थर लगेंगे। विहिप के रणनीतिकारों का मानना है कि पत्थर दान की पूरी रणनीति अभी बननी है। इसके बाद दानदाताओं को पूरी जानकारी दी जाएगी। लेकिन एक बात तय है कि इस बार धनसंग्रह करके न्यास शिलाखंड नहीं खरीदेगा। दान पत्थर का ही लिया जाएगा, वह भी वंशी पहाड़ के पत्थर का।
क्या कहते हैं 'जिम्मेदार'
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि दूसरे तल के निर्माण के लिए दान में वंशी पहाड़ की कच्ची शिलाएं ही दान में ली जाएंगी। अब शिलाएं कैसे दानदाता मंगाएंगे, क्या स्वरूप होगा, इस पर रणनीति बन रही है। शिलाएं अयोध्या कैसे भक्त लेकर आएंगे, इसका भी कार्यक्रम तय होगा।