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अयोध्या के दीयों से दिखी 2022 की राह : प्रतीकों के सहारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए सियासी संदेश

Thu, 04 Nov 2021 07:30 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 04 Nov 2021 07:30 AM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी ने 31 वर्ष पहले अयोध्या में आज के दिन कारसेवकों पर गोली व लाठी चलने की याद दिलाकर, अगली कारसेवा पर फूल बरसाने और गोली चलाने वालों के कारसेवा में शामिल होने की बेकरारी, जैसे वाक्यों से इसका संकेतों में एहसास भी करा दिया।

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ayodhya ke deeyon se dikhee 2022 kee raah : Chief Minister Yogi Adityanath gave political message with the help of symbols
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही प्रतीकों के सहारे राजनीतिक संदेश देने में माहिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरयू तट पर जो कहा और जो किया, उससे बुधवार को वहां जले 9.50 लाख से ज्यादा दीयों की रोशनी में 2022 की राह को रोशन करने का साफ संदेश निकलता दिखाई दिया। जिसने बता दिया कि विपक्ष चाहे जितनी कोशिश करे, उसके नेता मंदिर जाएं, टीका लगाएं, अपनी सरकार बनने पर श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का कार्य अधिक भव्यता व दिव्यता के साथ करने का आश्वासन दें, लेकिन इस मोर्चे पर उनके लिए मोदी व योगी के नेतृत्व से पार पाना मुश्किल होगा।

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मुख्यमंत्री योगी ने 31 वर्ष पहले अयोध्या में आज के दिन कारसेवकों पर गोली व लाठी चलने की याद दिलाकर, अगली कारसेवा पर फूल बरसाने और गोली चलाने वालों के कारसेवा में शामिल होने की बेकरारी, जैसे वाक्यों से इसका संकेतों में एहसास भी करा दिया।

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योगी ने अयोध्या के सांस्कृतिक समारोह के सहारे लोगों को हिंदुत्व की ताकत से देश व प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव की याद दिलाई। साथ ही यह भी समझाने की कोशिश की कि अभी बहुत काम बाकी है, जिसके लिए हिंदुत्व की बुनियाद पर राजनीतिक समीकरणों को मजबूती देना जरूरी है। 

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सवाल बढ़ाएंगे विपक्ष की समस्या
अयोध्या में पांचवें सांस्कृतिक महोत्सव में 9.50 लाख से अधिक जले दीयों ने हिंदुत्व के सरोकारों पर मोदी व योगी सरकार की आस्था, समर्पण व संकल्प का संदेश दिया। साथ ही नैमिषारण्य, काशी, विंध्याचल, प्रयाग सहित पांच हजार से ज्यादा स्थलों का उनके शास्त्रीय महत्व के साथ विकास कराए जाने की बातों ने लोगों के मन में विपक्ष के नेताओं की नीति व नीयत को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया।
 

सवाल यह कि विपक्ष के जो नेता आज खुद को हिंदू बताने को बेकरार हैं उन्हें इन स्थानों का सांस्कृतिक सरोकारों के साथ विकास कराकर, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करके लोगों को रोजगार मुहैया कराने की सुध अपनी सरकारों में क्यों नहीं आई। इन स्थानों पर तो अयोध्या, मथुरा और काशी की तरह कोई विवाद भी नहीं था। साफ है कि भाजपा ने चुनावी मैदान में विपक्षी नेताओं के हिंदू होने के दावे की काट की तैयारी कर ली है ।

ayodhya ke deeyon se dikhee 2022 kee raah : Chief Minister Yogi Adityanath gave political message with the help of symbols
सरयू की आरती करते सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला

रामराज्य के आदर्श के उल्लेखों के साथ मुख्यमंत्री का प्रदेश में गरीबों को होली तक दाल, तेल, नमक सहित हर महीने 35 किलोग्राम मुफ्त राशन देने की घोषणा भाजपा विरोधियों की मुश्किलें और बढ़ाएगी। योगी ने इस काम को प्रधानमंत्री मोदी सरकार के रामराज्य की परिकल्पना साकार करने के संकल्प के साथ जोड़ा और संकेतों से यह समझाने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वह तथा भाजपा की अन्य राज्य सरकारें रामराज्य के आदर्श पर काम करके लोगों को गरीबी से निकालने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही जिस तरह गरीबों की समस्याओं के समाधान को हिंदुत्व की आस्था से जुड़े स्थलों के विकास से सृजित होने वाले रोजगार के अवसरों से जोड़ा उससे भी यह साफ हो गया कि 2022 की चौसर पर भाजपा की तरफ से विपक्ष की हिंदुत्व के मुद्दे पर चौतरफा घेराबंदी की तैयारी है।


कब्रिस्तान से भी दी एजेंडे को धार
हिंदुत्व के मुद्दे पर विपक्ष की घेराबंदी में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी, इस बात का संकेत भी मिल गया।  पहले की सरकारों में कब्रिस्तानों पर खर्च होने वाला धन अब सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर व्यय हो रहा है, मुख्यमंत्री ने यह कहकर भी भाजपा व गैर भाजपा सरकारों की आस्था व प्राथमिकताओं को समझाने की कोशिश की। इससे उन्होंने सिर्फ हिंदुओं की नब्ज पर हाथ ही नहीं रखा, बल्कि अयोध्या के विकास के लिए फिर करोड़ों रुपये की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास और हिंदुओं के अन्य आस्था के स्थलों पर हो रहे कामों का जिक्र करते हुए लोगों के दिमाग में यह बात भी बैठाने की कोशिश की 2022 में भाजपा सरकार फिर क्यों जरूरी है।

 

इससे यह संदेश भी निकलता दिखा कि जरा सी चूक भारतीय सांस्कृतिक आस्था पर भरोसा रखने वालों को देश व प्रदेश में फिर दूसरे दर्जे का नागरिक बना देगी। भगवान राम की वापसी के मंचन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ जिस श्रद्धा व समर्पण भाव से उनकी अगवानी की...। तिलक किया...। आरती उतारी...। संतों के सम्मान में पूरी सरकार पलक पांवड़े बिछाती दिखी...। संतों का सम्मान हुआ...। सरयू आरती के साथ रामलीला के सरोकारों के संदेश को सम्मान सहित समाज के लोगों को एहसास कराने की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की... । दुनिया के कुछ देशों के राजदूतों की उपस्थिति में भगवान राम की सांस्कृतिक विरासत और चेतना को मुख्यमंत्री ने वैश्विक विस्तार को और मजबूती देने की जिस तरह से कोशिश की, उससे सरयू तट पर जले लाखों दीपों की ज्योति 2022 की राजनीतिक बिसात पर हिंदुत्व के सरोकारों की छटा को और ज्यादा बिखेरती दिखी ।

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