अंगदान के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। विश्व अंगदान दिवस पर मंगलवार को शहीद पथ स्थित एक निजी अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। विशेषज्ञों ने लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित किया।
डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग दो लाख लोगों को किडनी की जरूरत होती है, लेकिन इसकी उपलब्धता महज आठ हजार है। अगर जागरूकता आए तो यह अंतर कम हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक व्यक्ति का सही समय पर लिया गया एक फ़ैसला कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है, लेकिन देश में अंगों की ज़रूरत और उपलब्धता के बीच का अंतर अब भी बहुत बड़ा है।देश में लगभग 50 हजार लिवर की हर साल जरुरत होती है होती है, लेकिन इसकी उपलब्धता सिर्फ 1,700 से 1,800 है। लगभग 5 लाख लोग दिल, लिवर, किडनी या फेफड़े जैसे अंगों के ट्रांसप्लांट के इंतज़ार के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। ब्रेन डेड के बाद अंगदान की प्रक्रिया में तेजी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हृदय और फेफड़े 4-6 घंटे, लिवर 6-12 घंटे, किडनी 30 घंटे तक, आंतें 6 घंटे और पैंक्रियाज 6 घंटे तक ही सुरक्षित रहते हैं। इस मौके पर डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, डॉ. अनीश श्रीवास्तव, डॉ. राकेश कपूर, डॉ. आरके शर्मा मौजूद रहे।