{"_id":"693b34a240d90dc6330e12ec","slug":"awadhi-dialect-was-described-through-poems-lucknow-news-c-13-knp1002-1511959-2025-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: कविताओं से किया अवधी बोली का बखान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: कविताओं से किया अवधी बोली का बखान
विज्ञापन
लखनऊ। कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बृहस्पतिवार को अवधी समारोह-2025 किया गया। श्री चौहान उप्र साहित्य सभा के अवधी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अवधी की विशेषताएं बताई गईं। डॉ. राम बहादुर मिश्र को समर्पित अवधी ग्रंथ अवध अवधी: विविध संदर्भ का विमोचन हुआ। कविताओं से अवधी का बखान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि अवधी भाषा साहित्य और संस्कृति की परंपरा प्राचीन और समृद्ध है। यह मात्र बोली नहीं, बल्कि अवध की पहचान है। यह वह बोली है जिसे भगवान राम बोलते थे।
समारोह की अध्यक्षता कर रहीं पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह ने अवधी का महत्व समझाया। ग्रंथ के प्रबंध संपादक रमाकांत ''रामिल'', डॉ. शिवप्रकाश अग्निहोत्री, डॉ. राम बहादुर मिश्र और भाषा विवि के भाषा समन्वयक और अवधी शोध पीठ के डॉ. नीरज शुक्ला ने भी संबोधित किया। नेपाल के साहित्यकार कृष्णा पांडेय और डॉ. हरिप्रसाद तिमिर सीना ने विचार रखें। डॉ. सेतलाल, प्रो. अर्जुन पांडेय, अजय प्रधान, सूर्य प्रसाद शर्मा, लोकगायिका कुसम वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि अवधी भाषा साहित्य और संस्कृति की परंपरा प्राचीन और समृद्ध है। यह मात्र बोली नहीं, बल्कि अवध की पहचान है। यह वह बोली है जिसे भगवान राम बोलते थे।
विज्ञापन
समारोह की अध्यक्षता कर रहीं पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह ने अवधी का महत्व समझाया। ग्रंथ के प्रबंध संपादक रमाकांत ''रामिल'', डॉ. शिवप्रकाश अग्निहोत्री, डॉ. राम बहादुर मिश्र और भाषा विवि के भाषा समन्वयक और अवधी शोध पीठ के डॉ. नीरज शुक्ला ने भी संबोधित किया। नेपाल के साहित्यकार कृष्णा पांडेय और डॉ. हरिप्रसाद तिमिर सीना ने विचार रखें। डॉ. सेतलाल, प्रो. अर्जुन पांडेय, अजय प्रधान, सूर्य प्रसाद शर्मा, लोकगायिका कुसम वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन