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ढाई इंच के चीरे से बंद कर दिया दिल का छेद, 24 घंटे में मिली छुट्टी

Sun, 21 Aug 2016 05:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 21 Aug 2016 05:32 PM IST
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atrial septal defect surgery at kgmu
केजीएमयू में हार्ट सर्जरी के बाद मरीज और डॉक्टरों की टीम - फोटो : amar ujala

महज ढाई इंच का चीरा, ढाई घंटे की सर्जरी और दिल के छेद की जन्मजात बीमारी से निजात मिल गई। महज 24 घंटे में 13 साल की बच्ची को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। यह कमाल किया केजीएमयू के कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) के डॉ. विजयंत देवनराज की टीम ने। 

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डॉ. विजयंत देवनराज ने बताया कि मछली मोहाल लखनऊ की रहने वाली 13 वर्षीय तुबा को जन्मजात दिल में छेद (आर्टीरियल सेप्टल डिफेक्ट) था। इसकी वजह से उसकी सांस फूलती रहती थी। वह सामान्य बच्चों की तरह न तो खेल पाती थी और न ही दौड़-भाग पाती थी।
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थोड़ी-सी मेहनत से उसकी सांस फूलने लगती थी। तुबा के पिता मो. हरीन उसे ओपीडी में लेकर आए। डॉ. विजयंत के मुताबिक जब परिवारीजनों को यह बताया गया कि बगैर सर्जरी दिल का छेद नहीं बंद किया जा सकता तो वे घबरा गए।  डॉ. देवनराज के मुताबिक ऑपरेशन में पूरे सीने को नहीं खोलने का फैसला किया गया। 
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सिर्फ दाहिनी तरफ बगल से पसलियों के बीच ढाई इंच के एक चीरे से पूरी सर्जरी की गई। इससे हड्डी को नहीं काटना पड़ा और ज्यादा खून भी नहीं बहा। रक्षाबंधन के बाद 19 अगस्त को उसकी सर्जरी की गई और 20 अगस्त को तुबा को डिस्चार्ज कर दिया गया। 

सर्जरी में डॉ. विवेक, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. अजय पांडेय, एनेस्थेटिस्ट डॉ. दिनेश कौशल, पर्फ्यूजनिस्ट मनोज, नवनीत कौर, नर्स एडलीन और मनीषा का सहयोग रहा।

नहीं पड़ी वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत

atrial septal defect surgery at kgmu
डेमो प‌िक

डॉक्टरों के मुताबिक आमतौर पर ओपन हार्ट सर्जरी के बाद मरीज को कम से कम 12 घंटे वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है। इसके बाद दो दिन आईसीयू और पांच दिन वार्ड में मरीज को रखना पड़ता है। 

जबकि इस विधि से सर्जरी के बाद 24 घंटे में मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। तुबा को मात्र ऑपरेशन टेबिल पर ही हार्ट लंग मशीन पर रखा गया। इसके बाद उसे किसी तरह के वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ी। चीरे का दाग भी उम्र बढ़ने के साथ लगभग गायब हो जाएगा। 

केजीएमयू के सीटीवीएस विभाग के सर्जन जल्दी ही एक और कीर्तिमान गढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। 24 घंटे में दिल की सर्जरी के बाद मरीज को घर वापस भेजने वाली टीम अब बिना बेहोश किए ही दिल की सर्जरी करेगी। डॉ. विजयंत ने बताया कि देश के एक या दो संस्थानों में ही इस तरह की सर्जरी हो रही है। 

केजीएमयू में भविष्य में मरीज को बिना बेहोश किए (अवेक सर्जरी) की जाएगी। इसमें मरीज ऑपरेशन थिएटर में अपनी आंखें खुली रखेगा। सर्जरी के दौरान होने वाली बातचीत वह न सुन सके, इसके लिए उसे ईयर फोन लगाया जाएगा। इस तरह की सर्जरी केजीएमयू में जल्दी ही शुरू हो सकेगी। 

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