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कम बरसात से मानसूनी ट्रफ का स्थायी विस्थापन शुरू

Thu, 01 Sep 2022 02:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 02:03 AM IST
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atmosphere change due to rain
रोली खन्ना
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लखनऊ। सामान्य बरसात के पूर्वानुमान से उम्मीद लगाए बैठे लोगों को अगस्त से भी निराशा ही हाथ लगी। अगस्त में जुलाई के सापेक्ष 37.4 मिमी. कम बारिश रिकॉर्ड की गई। कम बरसात से मानसूनी ट्रफ का स्थायी विस्थापन शुरू हो गया है। अब मौसम विज्ञानी सितंबर से और किसान नौ से 23 सितंबर तक चलने वाले हथिया नक्षत्र में बरसात होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल जून से लेकर अगस्त तक हुई बरसात का ट्रेंड देखकर यह कहना बहुत ही मुश्किल है कि उम्मीद कितनी पूरी हो पाएगी।
वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक प्रो. ध्रुवसेन सिंह कहते हैं कि बीते समय में जिस तरह का असामान्य व्यवहार मौसम कर रहा है, उसके पीछे क्षेत्रीय और अति स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं। इसका एक उदाहरण है मंगलवार को हुई बरसात। कहीं एकदम सूखा रहा, कहीं झूम के पानी बरसा। यही वजह है कि मानसून ट्रफ स्थायी रूप से उड़ीसा की ओर विस्थापित हो रहा है। यही वजह है कि कम दबाव का क्षेत्र वहां बनने से उत्तर प्रदेश बरसात से अछूता रह जा रहा है। सूखते जलस्रोत, कम होती हरियाली जैसे कारणों की हमें चिंता करना होगी।
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कम बारिश ने राजधानी के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि यही हाल रहा तो रबी फसलों के साथ धान, आलू की अगेती और गेहूं की पैदावार पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कम दबाव का बनता क्षेत्र बरसात करवाता है, अब इसके उड़ीसा की तरफ शिफ्ट होने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। वहीं आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता का कहना है कि सितंबर में अभी अच्छी बारिश होने की संभावना है।
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घटती बारिश....आंकड़ों की जुबानी
मौसम विभाग के आंकड़ों को देखें तो अगस्त में एक दिन में उच्चतम 30 अगस्त को 28.6 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई। बीते दस वर्षों में एक माह के एक दिन में बरसात का उच्चतम प्रतिशत 38.5 से 161.8 मिमी. तक रहा है। वहीं किसी एक साल में सर्वाधिक पानी बरसने का अगस्त में रिकॉर्ड 2018 में 641.9 मिमी. रहा। इस सीजन में अब तक (एक जून से 31 अगस्त तक) राजधानी में 126.9 मिमी पानी बरसा, जबकि जुलाई में 164.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
पारे ने तो रिकॉर्ड नहीं तोड़ा, पर उमस ने किया बेहाल
जहां तक इस मौसम में गर्मी की बात है तो बीते वर्षों में पारे में उतार-चढ़ाव देखने को मिले। अगस्त मेंअधिकतम पारा 35 से 38 डिग्री के बीच बना रहा। जबकि 2022 के अगस्त में तो 31 डिग्री से 36 डिग्री के बीच ही सिमटा रहा। इसके बावजूद गर्मी का कारण बढ़ती उमस रही। वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक सीएम नौटियाल कहते हैं कि नमी अधिक होगी तो भी पसीना कम सूखेगा और असुविधा होगी। पानी हो या गर्मी जिस असुविधाजनक तरीके से इनकी प्रवृत्ति में असामान्य बदलाव दिख रहे हैं।
किसानों की चिंता बढ़ी, पहले खरीफ, अब रबी पर असर
चंद्रभानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जून-जुलाई में बहुत कम बारिश से धान की रोपाई किसान नहीं कर पाए थे। जिनके पास निजी साधन थे, उनका नुकसान कम हुअर। अगस्त में गर्मी भी अधिक रही, वहीं आद्रता भी अधिक रही। इससे धान की फसल में कीट व बीमारियों का प्रकोप बढ़ा। आलू की अगेती प्रजातियां 15 सितंबर से शुरू होनी है, बरसात न होने से असर पड़ेगा। चना, दाल, तिलहन, उड़द, मसूर व जौ की बोवाई पर भी असर रहा। निगोहां के पटसा के किसान प्रभात कहते हैं कि धान पीला पड़ रहा है। अघैया के संदीपन रावह कहते हैं कि उ़ड़द व तिलहन पर भी असर है।

जब हथिया पूंछ हलावे तो घर बैठे गेहूं आवे...
निगोहां के किसान फूलचंद कहते हैं कि गांव में कहावत है कि जब हथिया पूंछ हलावे तो घर बैठे गेहूं आवे...। यदि यह सच हो जाता है, तो अच्छी बरसात हो जाती है और काफी दिनों तक नमी बनी रहती है। खेती की अच्छी पैदावार होती है। हथिया नक्षत्र 9 से 23 सितंबर तक रहेगा।
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