अलर्ट: सारे काम छोड़कर सबसे पहले बदलिए एटीएम पिन वर्ना...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश के सबसे बड़ी वित्तीय जानकारियों की चोरी में एक दो नहीं बल्कि 19 बैंकों के एटीएम डेबिट कार्ड की जानकारियां लीक होने की आशंका है। एसबीआई के एटीएम डेबिट कार्ड ब्लॉक किए जा रहे हैं, वहीं बाकी बैंक अपने ग्राहकों को एटीएम कार्ड की पिन बदलने के लिए सुझाव दे रहे हैं।
खासतौर से पिछले कुछ महीनों में अगर आपने यस बैंक का एटीएम उपयोग किया है तो। इन सभी को बैंकों और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई)की ओर से सुझाव दिया जा रहा है कि वे अपने एटीएम का पिन तुरंत बदलवाएं।
नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के एमडी व सीईओ एपी होता के अनुसार समस्या का पता ग्राहकों की शिकायतें आने पर लगा। कार्ड धारकों ने बताया कि चीन और अमेरिका में उनके कार्ड से फ्रॉड करके खरीदारी की जा रही है, जबकि वे भारत में ही थे।
इसे डाटा चोरी का मामला मानते हुए एनपीसीआई ने सभी एटीएम टर्मिनलों और देश में ऑनलाइन पेमेंट का काम कर रहे तीन कार्ड नेटवर्कों, रूपे, वीजा और मास्टर कार्ड के साथ सितंबर में जांच शुरू की। सामने आया कि पिछले कुछ महीनों (सूत्रों के अनुसार अप्रैल से सितंबर) के दौरान डाटा चोरी हुआ। आशंका है कि इसे पेमेंट गेट-वे से चोरी किया गया।
32 लाख कार्ड का डाटा हुआ चोरी
चोरी किए गए डाटा में से 19 बैंकों के 641 बैंक खातों के डाटा का उपयोग करते हुए चीन और अमेरिका में 1.30 करोड़ रुपये के पेमेंट के मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। एनपीसीआई को आशंका है कि 32 लाख कार्ड का डाटा चोरी हुआ है, हालांकि आशंका है कि यह संख्या 65 लाख तक हो सकती है।
फॉरेंसिक ऑडिट में अब तक सामने आया है कि एक खास बैंक (सूत्रों के अनुसार यस बैंक) से ट्रांजेक्शंस के दौरान अपनाए जा रहे पेमेंट गेटवे पर यह डाटा चोरी हुआ। पेमेंट गेटवे ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों द्वारा क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट के काम आता है।
यह गेटवे वेबसाइट से बैंक के बीच पैसा ट्रांसफर करने मार्ग को सुरक्षित रखता है, इस दौरान यह कार्ड की जानकारी, पिन या वन टाइम पासवर्ड के जरिए सुनिश्चित करता है कि पेमेंट सही व्यक्ति द्वारा सही व्यक्ति को किया रहा है। हर बैंक का अपना पेमेंट गेटवे नहीं होता, बैंक मिले-जुले पेमेंट गेट का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि एक गेटवे से चोरी किए गए डाटा में 19 बैंकों के कार्ड धारकों का डाटा शामिल है।
खास बात है कि यह पेमेंट गेटवे पेमेंट कार्ड इंडस्ट्री सिक्योरिटी स्टैंडर्ड (पीसीआई-डीएसएस) से सर्टिफाइड था जो अंतरराष्ट्रीय मानक है। फिलहाल जांच जारी है। एनपीसीआई के सूत्रों के अनुसार इसके बाद ही अधिकृत रूप से बताया जाएगा कि कौनसे बैंक और पेमेंट गेटवे से डाटा चोरी हुआ।
सभी कार्ड धारकों को सुझाव दिया गया है कि वे अपने एटीएम कार्ड के पिन बदलें, बैंकों को सुझाव दिया गया है कि जिन 32 लाख कार्ड का डाटा चोरी होने की बात सामने आई है, उन्हें बदला जाए। साथ ही जो उपभोक्ता पिन न बदलें, उनके कार्ड ब्लॉक करके नए कार्ड बैंक अपने खर्च पर जारी करे।
अपने ही एटीएम से निकालें पैसे
हमारे सिस्टम ने कुछ सप्ताह पहले गैर-एचडीएफसी नेटवर्क से डेबिट कार्ड की जानकारी से खिलवाड़ की बात पकड़ी थी। हमने तुरंत उन खाताधारकों को एटीएम पिन बदलने के लिए कहना शुरू कर दिया था जिन्होंने इन संदेहास्पद नेटवर्क पर अपने एटीएम का उपयोग किया था।
हमारा सुझाव यही है कि हमारे कि खाताधारक एचडीएफसी एटीएम का ही उपयोग करें क्योंकि हम यह वादा नहीं कर सकते कि दूसरे बैंकों के एटीएम भी हमारी जैसी सुरक्षा दे पाएंगे।
आईसीआईसीआई : तरुणा व्यास, कम्युनिकेशन मैनेजर, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस ग्रुप
हमारे पास पिछले महीने जानकारी आ गई थी और मैं यह बात पुख्ता तौर से कह सकती हूं कि हमारे बैंक से डाटा की लीकेज नहीं हुई है।
हम अपने उपभोक्ताओं को सूचित कर रहे हैं कि वे एटीएम पिन बदलें और इसकी जानकारी किसी को न दें। दूसरे बैंक और एटीएम की सुरक्षा हमारे नियंत्रण में नहीं हो सकती, ऐसे में ग्राहकों को पहले से बताया जाता रहा है कि वे हर तीन महीने में अपने एटीएम पिन को बदल दिया करें।
एटीएम कार्ड किए जा रहे हैं ब्लॉक
बैंक कस्टमर्स को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। बैंकों को हमने एडवायजरी जारी की है कि वे सुरक्षा के एहतियात के तौर पर फिर से कार्ड इश्यू करें। जो 19 बैंक इस डाटा की चोरी की चपेट में आए हैं, उन्हें चेतावनी जारी कर दी गई कि वे अलर्ट रहें।
फिलहाल हम फॉरेंसिक जांच के स्तर पर हैं, इसलिए बैंकों के नाम और जिस बैंक से डाटा लीक होने की आशंका है, उसका नाम जारी नहीं किया जा रहा है।
बैंक ग्राहकों को सूचित कर रहे हैं कि वे अपना एटीएम पिन बदलें, जिन्होंने सूचना के बाद भी पिन नहीं बदले हैं, उनके एटीएम ब्लॉक किए जा रहे हैं।
जिन एटीएम डेबिट कार्ड का डाटा लीक होने की बात कही जा रही है, उनमें यूपी के करीब सात लाख कार्ड हैं। इनमें से अधिकतर एसबीआई के हैं। इस बीच एसबीआई ने उपभोक्ताओं के एटीएम कार्ड बंद करने की प्रक्रिया शुक्रवार को और तेज कर दी। उत्तर प्रदेश में अब तक एक लाख से अधिक कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर एसबीआई के हैं। त्योहारों के समय आई इस मुसीबत से खाताधारक परेशान हैं।
लखनऊ परिमंडल के सूत्रों के अनुसार अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कुल कितने एटीएम कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। यह प्रक्रिया मुंबई हेडक्वार्टर से हो रही है। एसबीआई का दावा है कि जल्द ही नए कार्ड ग्राहकों को उनके पते पर भेज दिए जाएंगे।
पैसा निकला तो यूं होगा भुगतान
दूसरी ओर एसबीआई में एटीएम से जुड़े मामलों को देख रहे अल्टरनेट चैनल डिपार्टमेंट के डीजीएम एसके पोरवाल ने इस संबंध में कोई जानकारी होने से इन्कार किया। इससे समझा जा सकता है कि एसबीआई खाताधारकों के प्रति किस कदर असंवेदनशील है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लखनऊ में नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एटीएम कार्ड का डाटा चोरी होने के बाद किसी के द्वारा शॉपिंग या अन्य तरीके से जिनके खाते से पैसा निकाला गया है, ऐसे उपभोक्ताओं का पैसा संबंधित बैंक देगा। यही वजह है कि बैंकों ने एटीएम कार्ड ब्लॉक कर नए कार्ड जारी करने का निर्णय किया है।