यूपीएससी सेकेंड टॉपर ने बताया, क्या चाहते हैं कश्मीर के युवा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल सर्विस परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल करने वाले कश्मीरी युवा अतहर आमिर-उल-शफी खान का कहना है कि वे और उनकी पीढ़ी के आम युवा कश्मीर में आतंक और अशांति के माहौल को खत्म होते देखना चाहते हैं।
यही वजह है कि अब पहले से कहीं ज्यादा कश्मीरी नौजवान देश के बड़े व नामी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन ले रहे हैं तथा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं। यह ट्रेंड इसी तरह आगे बढ़ना चाहिए।
लखनऊ में इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट में ट्रेनिंग ले रहे आईआरटीएस अधिकारी अतहर आमिर ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि कश्मीरी युवाओं को अपने आवरण से बाहर निकलना होगा।
उन्हें अपने प्रदेश के चुनौतीपूर्ण हालात से निराश होना बंद कर देना चाहिए। उनके सामने ढेरों अवसर हैं जिनमें अच्छा प्रदर्शन करते हुए खुद को स्थापित करने के साथ ही वे कश्मीर का नाम रोशन कर सकते हैं।
2009 में आईएएस टॉप करने वाले शाह फैसल को अपना आदर्श बताते हुए अतहर कहते हैं कि उनके प्रदर्शन से पढ़ाई के जरिये अपने भविष्य बनाने का सपना देख रहे कश्मीरी युवाओं में नया उत्साह जगा है।
कश्मीर को बनाना चाहते हैं पर्यटकों का स्वर्ग
कश्मीर के युवाओं को मुख्य धारा में लाने के लिए अतहर सुझाव देते हैं कि प्रदेश की सरकार और जिलों के प्रशासन को हर स्तर पर युवाओं से बातचीत करनी होगी।
विकास के कार्यों में युवाओं को स्टेक होल्डर बनाना होगा, जिससे वे खुद को विकास प्रक्रिया का हिस्सा मानें। अतहर कहते हैं कि आम लोगों की पहुंच सिविल सेवकों तक होनी चाहिए, जिससे प्रशासन ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सके।
कश्मीर में इसके लिए विशेष तौर पर काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर न केवल प्राकृतिक रूप से सुंदर है, बल्कि सांस्कृतिक तौर पर भी वह बहुत अमीर प्रदेश है। लोगों को प्रशासन से जोड़ा जाएगा तो इसके परिणाम भी अच्छे आएंगे।
अतहर ने कहा कि कश्मीर को धरती की जन्नत कहा जाता है। उन्हें मौका मिला तो वे कश्मीर काडर में अपनी सेवाएं देकर कश्मीर को पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यटन कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हो सकता है। भारत से ज्यादा से ज्यादा लोग कश्मीर जाएंगे तो प्रदेश और वहां के लोगों की प्रगति में मदद मिलेगी।