कश्मीर से धारा 370 हटने से अटल जी की आत्मा को मिली होगी शांतिः सीएम योगी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राम को सांप्रदायिक बताना संकीर्ण राजनीति का परिचायक है। आज अयोध्या की पहचान वहां के दीपोत्सव से भी हो रही है। इसमें राम चंद्र जी जहां-जहां गए, वहां के कलाकारों को बुलाकर प्रस्तुति दी जाती है। पिछले दिनों इंडोनेशिया के भी कलाकारों की प्रस्तुति हुई। फिर इंडोनेशिया की रामलीला के पात्रों को मैंने लखनऊ आवास पर सम्मान के लिए बुलाया। मैं यह देखकर हैरान था कि उसमें सभी पात्र मुस्लिम थे।
मैंने उनसे कहा कि आप मुस्लिम होने के बावजूद राम, सीता या हनुमान बने। उन्होंने कहा हमारे यहां राम को लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पूजते करते हैं। हमारा मजहब कुछ भी हो लेकिन हम पूर्वज नहीं बदल सकते। इस पर मैंने कहा की अगर भारत के अंदर कोई ऐसा करता तो यहां तो फतवा जारी हो गया होता।
सीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर केजीएमयू कन्वेंशन सेंटर में आयोजित "अटल स्मृति काव्य संध्या" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुवे कहा कि अगर मन मे देश और आराध्य के प्रति सही भाव होता तो वामपंथी व सोशलिस्ट देश के साथ नमकहरामी न करते। लोहिया भाजपा के नहीं थे, लेकिन भारतीयता को जानते थे। आज लोहिया के नाम पर राजनीति करने वाले परिवारवाद, जातिवाद, गुंडागर्दी को बढ़ावा देते हैं। किसानों की जमीन हड़पने वाले आज फिर वातावरण खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ग्राम सड़क योजना में बनी सड़क के किसान लाभान्वित, दीनदयाल उपाध्याय योजना से मिली बिजली से किसान और गरीब को ही लाभ।
स्वच्छ भारत मिशन का लाभ भी गांव, गरीब को ही मिला और बीमारी कम हुई। हमने किसी जाति, धर्म को देखकर काम नही किया। हमने किसी काम मे हिन्दू-मुश्लिम नहीं देखा। अब लोगों के पास कहने को कुछ नहीं रह गया तो भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। कल शुक्रवार को सुशाशन दिवस किसानों की आत्मनिर्भर दिवस के रूप में मनाएंगे। कश्मीर से धारा 370 हटने से अटल जी की आत्मा को शांति मिली होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने कवि और साहित्यकार की संवेदनशीलता को राजनीति में भी अक्षुण्ण रखा। अटल जी ने यह बताया कि राजनीति मूल्यों और आदर्शों की होनी चाहिए तथा इसे अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रचारित व प्रसारित भी किया। सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ उनकी स्मृतियां और संस्मरण लोगों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आदर्शों व मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध होकर हम अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
उन्होंने जो सपना देखा था, वह आज साकार हो रहा है। जब योग्य लोग सार्वजनिक जीवन में परम्परा और संस्कृति के साथ प्रतिबद्धताओं को दोहराते हैं, तो उसके अच्छे परिणाम मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अटल जी की परम्परा का वहन करते हुए प्रतिबद्ध होकर देश और जनता की भलाई के लिए कार्य कर रहे हैं।
सीएम ने कहा कि सार्वजनिक समारोहों और कार्यक्रमों में कोरोना से बचाव के उपाय लगातार अपनाए जाने चाहिए। कोरोना के संक्रमण से अभी मुक्ति नहीं मिली है, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में इसका नया स्ट्रेन देखने को मिला है। सतर्कता और बचाव से ही हम कोरोना को परास्त करते हुए दुनिया को सन्देश देने में सफल होंगे।
इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, विधि मंत्री तथा अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउण्डेशन के अध्यक्ष बृजेश पाठक, भाजपा के संगठन महामंत्री सुनील बंसल, महापौर संयुक्ता भाटिया, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, मंत्री मोहसिन रजा, विधायकगण आदि उपस्थित थे। काव्य संध्या में युवा कवि कुमार विश्वास ने अटल जी को समर्पित एकल काव्य पाठ किया गया।
टूटता तिलस्म आज, सच से भय खाता हूं, गीत नया गाता हूं...
‘बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं। टूटता तिलस्म आज, सच से भय खाता हूं। गीत नया गाता हूं...’ अटलजी की इस गीत को जब कवि विश्वास ने बृहस्पतिवार को केजीएमयू कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अटल स्मृति काव्य संध्या के मंच से गाना शुरू तो वहां बैठे लोग साथ गुनगुनाने लगे। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. कल्बे सादिक व लालजी टंडन को भी नमन किया।
इससे पहले अपने चिर-परिचित अंदाज में कुमार विश्वास ने लखनऊ को समर्पित ‘गोमती का मचलता ये पानी भी है। हिंद के उस गदर की कहानी भी है। गंज हजरत चिकन चौक की आबरू, ये शाम-ए-अवध तर्जुमा रुबरु-रुबरु। लखनऊ, लखनऊ’ से कार्यक्रम की शुरुआत की।
कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने ‘कलेजे में जलन, आंखों में पानी छोड़ जाती हो। अगर उम्मीद की चुनर को धानी छोड़ जाती हो’ प्रस्तुत किया। फिर विश्वास ने एक के बाद एक ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है।, ‘इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा’ प्रस्तुत कर खूब गुदगुदाया। इसके साथ ही ‘मुझे वो मारकर खुश है, की सारा राज उसका है। यकीनन कल है मेरा, आज बेशक आज उसका है’ प्रस्तुत कर राजनीति पर तंज भी कसा। विश्वास बोले, राजनीति 5, 10 साल रहेगी लेकिन कविता तो हजारों साल रहेगी। वहीं ‘एशिया के हम परिंदे, आशमा है हद हमारी... हम हैं देशी पर पूरी दुनिया मे छाए हम’ प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। उन्होंने कहा कि आज मैं दावा करता हूं कि अगले साल भारत चांद तक पहुंचेगा।
अटल जी को बताया राजनीति का अजातशत्रु, नेताओं पर किया कटाक्ष
कुमार विश्वास ने कहा कि अटलजी अपने विरोधियों में भी प्रिय थे। वे राजनीति के अजातशत्रु थे। वो अकेले विपक्ष थे। कुमार विश्वास ने राजनेताओं पर खूब तीर छोड़े। भाजपा अध्यक्ष को कहा कि वो तो भूल गए कि कार्यक्रम पार्टी का नहीं है। पीएम और गृहमंत्री पर कहा कि इनको आराम नहीं, बिहार निपटा नहीं कि बंगाल की घोषणा कर दी। बोले गुजरात वाले गृहमंत्री के पहले दिल्ली में आजादी के काफी नारे लगते थे, अब नहीं लगते। पता है कि ये वाला होम डिलीवरी करवा देगा। कार्यक्रम के बीच मे खड़े लोगों से परेशान कुमार विश्वास ने उनकी भी खूब खिंचाई की।
चिकन पकड़े पर ही रह गया...
सीएम योगी के सामने कुमार विश्वास ने कहा कि आपने अब ऐसी व्यवस्था कर दी है कि चिकन केवल कपड़े पर ही रह गया। इसी तरह एंटी रोमियो स्कवॉयड पर उन्होंने कहा कि पहले लोग रात आठ बजने के बाद सोचते थे कि बेटी घर क्यों नहीं आई। अब सोचते हैं कि बेटा घर क्यों नहीं आया। कहीं थाने में.....
भगवान राम को याद कर हुए भावुक
कुमार विश्वास ने कहा कि जब अयोध्या जाता तो वर्षों से प्रभु राम को टेंट में देखता था तो खुद से सवाल करता था। यह कहते हुए कुमार विश्वास भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वे मनुष्यता की परिभाषा हैं। किंतु राजनीति ने उन्हें उलझाए रखा। उन्होंने ‘मानवता की खुली आंख के सबसे सुंदर अपने राम... दुनियाभर ने देखे अपने-अपने राम’ प्रस्तुत कर सबको भावुक कर दिया।
छात्र जीवन से कुमार के साथ : ब्रजेश पाठक
विधि मंत्री व अटल बिहारी वाजपेयी फाउंडेशन के अध्यक्ष ब्रजेश पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुमार विश्वास के साथ छात्र जीवन से साथ रहा हूं। काफी संघर्ष का समय था। इससे पहले उन्होंने अतिथियों को शॉल, स्मृति चिह्न व पुस्तकें देकर सम्मानित किया।
अटली लखनऊ के पर्याय थे : दिनेश शर्मा
विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि अटलजी लखनऊ के पर्याय थे। एक बार उनके जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं ने उनके वजन के बराबर का लड्डू बांटने का निर्णय लिया। जब उनसे मिलकर बताया तो मुस्कुराते बोले, मेरा वजन बहुत बढ़ गया है। उनकी एक बात के कई अर्थ होते थे। आज टंडनजी की भी याद आ रही है। विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अटलजी को याद करते हुए उनकी पंक्तियां दोहराई ‘अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।’
इनका हुआ सम्मान
अटलजी के साथ रहे विद्या सागर गुप्त, विधायक सुरेश श्रीवास्तव, राम कुमार शुक्ल, डॉ. राजीव लोचन, विंध्यवासिनी कुमार, सुरेश तिवारी, मनोहर सिंह, हृदय नारायण श्रीवास्तव, विनोद बाजपेयी, राम आसरे, राम नारायण साहू, रमेश तूफानी, रंजना द्विवेदी, विजय कुमार श्रीवास्तव, रमा शंकर शुक्ल को सीएम व अन्य अतिथियों ने सम्मानित किया।