दीपावली पर जहरीली गैसें आपको बना सकती है बीमार
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अस्थमा के मरीज को पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसें और बीमार बना सकती हैं। पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में ठंड बढ़ने से अस्थमा पेशेंट की हालत पहले ही नाजुक होती है। ऐसे में पटाखों से होने वाले धुएं से अस्थमा के मरीज को बचना चाहिए।
केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. सूर्यकांत बताते हैं कि दमा के रोगियों में सांस की नली हाइपर एक्टिव होती है। एलर्जिक मरीजों को ऐसे पदार्थों से अटैक पड़ सकता है जो शरीर के लिए अनुकूल न हों। एलर्जी पैदा करने वाले तत्व श्वांस नली में प्रवेश करते हैं तो फेफड़ों की सुरक्षा के लिए हमारा इम्यून सिस्टम इन तत्वों का रास्ता रोकता है।
इसी से हमें सांस लेने में परेशानी होने लगती है। उन्होंने बताया कि सर्दी की शुरुआत और पटाखों का धुआं ऐसे कारक हैं जो अस्थमा के मरीजों को नुकसान पहुंचाते हैं। फेफड़े की नलियों में सूजन के कारण होने वाली इस बीमारी में प्रदूषित वातावरण जानलेवा हो सकता है।
डॉ. संतोष कुमार के अनुसार फुलझड़ी और अनार जैसे पटाखों में बेहद नुकसानदेह कॉपर, कैडमियम, लेड, मैगनीज, जिंक, सोडियम, पोटेशियम जैसे रसायनिक तत्व होते हैं। इसलिए इन तत्वों के जलने से निकलने वाला धुआं (सल्फर डाईऑक्साइड) मरीजों को नुकसान पहुंचाता है। मरीज एलर्जिक है तो उसे आतिशाबाजी के धुएं से बचना चाहिए।
साथ ही छाती रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। एलर्जी के कारण अस्थमा अटैक पड़ने से खांसी और आंखों से पानी भी आ जाता है।
आयुर्वेद में भी है बचाव
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पीसी चौधरी के मुताबिक, अस्थमा के अटैक से बचाव के लिए पिपली चूर्ण एक ग्राम शहद के साथ सुबह खाली पेट रोजाना लें। इसके अलावा हरिद्राखंड पांच-पांच ग्राम दूध के साथ या गुनगुने पानी से लें।
एलर्जी है तो आधी चम्मच अजवाइन और कलौंजी बराबर मिलाकर एक कप पानी में एक मिनट तक उबाल कर पी लें। यह सांस की नलियों को फैला देगा और सांस लेने में आसानी होगी। चाय पीते हों तो बिना दूध के तुलसी की पत्ती, काली मिर्च और अदरक मिलाकर पिएं। इसके अलावा व्यवसादि वटी दिन तीन बार चूसें। इलाज डॉक्टर की सलाह से शुरू करें।
इमरजेंसी में यहां से लें मदद
सीएमओ कंट्रोल रूम नंबर- 0522-2622080
स्वास्थ्य विभाग निदेशालय- 18001805145
केजीएमयू, ट्रॉमा सेंटर- 9453004209
केजीएमयू, प्लास्टिक सर्जरी- 9415200444
संजय गांधी पीजीआई - 0522- 2668700
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान- 0522- 6692000 6692001, 6692002
लोहिया अस्पताल - 08004003391
सिविल अस्पताल - 0522-2239007
बलरामपुर अस्पताल - 0522- 2624040
आरएलबी राजाजीपुरम- 0522- 2661370
निशुलक एंबुलेंस सेवा- 108 व 102 सेवा
अस्पताल के अधिकारियों के फोन नंबर
लोहिया अस्पताल, सीएमएस
डॉ. ओंकार यादव, 8765676903
सिविल अस्पताल, चिकित्सा अधीक्षक
डॉ. आशुतोष दुबे, 9415117798
बलरामपुर अस्पतल, सीएमएस
डॉ. राजीव लोचन, 7408404674
अस्थमा के लक्षण
•दिवाली से एक दिन पहले से पांच दिन बाद तक घर में रहें
•सुबह टहलने से कुछ दिन तौबा करें
•सुबह प्रदूषित वायु ही मिलेगी
•शाम को घर से निकलें तो गर्म कपड़े पहनें
•भाप जरूर लें, चाहें लेते हो या न लेते हों
•बच्चों का विशेष ज्यादा ध्यान रखें
•अस्थमा मरीज को जुकाम है तो ये दौरे की चेतावनी है
•बेहद प्रदूषण वाली जगहों से बचें
•हल्का खाना खाएं और जल्दी सो जाएं
•सांस लेने में तकलीफ
•सांस लेते समय नाक से आवाज
•अक्सर खांसी और घरघराहट
•खांस के कारण रात को सो न पाना
•सुबह होते ही खांसी शुरू हो जाना
•छाती में दबाव, जकड़न या घुटन महसूस होना
•दम घुटता सा महसूस होना
फेफड़ों के सही से कार्य न करने के कारण सांस की बीमारी अस्थमा है। इससे फेफड़ों की वायु नालियों में संक्रमण हो जाता है और वह संकरी हो जाती है। साथ ही फेफड़ों में कई प्रकार की एलर्जी हो जाती है। धूल, सर्दी, परागकण, फर, धूम्रपान और वायु प्रदूषण इस बीमारी को बढ़ाते हैं। अगर बच्चों को सुबह और रात को कफ होता है तो उसे भी अस्थमा होने की आशंका हो सकती है।