इन वजहों से पहले ही सिमट सकता है विधानमंडल का सत्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य विधानमंडल दल का सत्र छोटा होने के संकेत हैं। विपक्ष के रुख और रमजान माह को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
आधिकारिक तौर पर विधानमंडल सत्र 19 जून से 18 जुलाई तक चलाने का कार्यक्रम जारी हुआ है।
विपक्ष ने पहले दिन से ही आक्रामक तेवर अख्तियार कर रखा है। सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने दोनों सदनों में धरना, प्रदर्शन किया।
20 जून को बजट रखे जाने से पहले भी दोनों सदनों में हंगामा हुआ। विपक्ष की मंशा बहस और सवाल से ज्यादा सरकार को कठघरा में खड़ा करने की है।
27 जून तक सत्रावसान संभव
सरकार को मौजूदा सत्र में वित्तीय वर्ष 2014-15 का बजट पास कराना है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 से 26 जून तक बजट पर सामान्य चर्चा प्रस्तावित है।
27 जून को आय-व्यय की अनुदान मांगों पर विचार एवं मतदान होगा। 30 जून से तीन जुलाई तक फिर यही हाउस बिजनेस है। सात से 10 जुलाई तक बजट पर फिर चर्चा और मतदान होगा।
उसी दिन विनियोग विधेयक 2014 रखा जाना है। 14 से 16 जुलाई तक बजट पर जारी रखते हुए 17 जुलाई को अनुदान मांगों पर मतदान प्रस्तावित है।
आखिरी दिन 18 जुलाई को आधा दिन गैरसरकारी कामों और आधा दिन विधायी कार्यों के लिए रहेगा।
बसपा पहले ही जता चुकी है आपत्ति
विपक्षी दलों के रुख को देखते हुए लगता नहीं कि बजट पर इतनी लंबी चर्चा चलेगी। विपक्ष के हंगामी तेवर हैं तो सत्ता पक्ष की दिलचस्पी भी बहस से ज्यादा बजट पास कराने में है।
ऐसे में संभव है कि सत्र को छोटा कर दिया जाए। 29 जून से रमजान शुरू हो रहा है। बसपा माह-ए-रमजान में सत्र बुलाने पर आपत्ति जता चुकी है।
इन हालात में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुछ नेताओं को लगता है कि कार्यमंत्रणा समिति हाउस बिजनेस को संक्षिप्त कर बजट पास कराने का फैसला कर सकती है।
इससे समय से पहले सत्रावसान का रास्ता साफ हो जाएगा। एक वरिष्ठ विधायक ने अनुमान जताया है कि 27 जून को भी सत्रावसान हो सकता है, हालांकि ज्यादातर इसके जुलाई के पहले सप्ताह तक चलने की संभावना जता रहे हैं।