एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में इस अफसर ने लिया बड़ा फैसला, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश व अन्य मुद्दों से आहत अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय, डॉ. बीपी अशोक ने सोमवार को इस्तीफे की पेशकश कर दी। राष्ट्रपति को भेजे पत्र में उन्होंने 7 मांगों को मानने या इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा है, इस परिस्थिति में मुझे बार-बार यही विचार आ रहा है कि अब नहीं तो कब, हम नहीं तो कौन। हालांकि उन्होंने देश में आक्रोशित दलित युवकों से शांति की भी अपील की है। पत्र की प्रति उन्होंने पुलिस महानिदेशक को भी भेजी है।
डॉ. अशोक ने पत्र में लिखा है कि एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है। संसदीय लोकतंत्र को बचाया जाए। रूल ऑफ जज, रूल ऑफ पुलिस के स्थान पर रूल ऑफ लॉ का सम्मान किया जाए। महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व अभी तक नहीं दिया गया है।
उच्च न्यायालयों में एससी, एसटी, ओबीसी व माइनॉरिटी की महिलाओं को अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। प्रमोशन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। श्रेणी 1 से श्रेणी 4 तक साक्षात्कार युवाओं में आक्रोश पैदा करते हैं। सभी साक्षात्कार खत्म किए जाएं। जाति के खिलाफ स्पष्ट कानून बनाया जाए।
बसपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा में रहे हैं डॉ. अशोक
डॉ. बीपी अशोक बसपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। जबकि बसपा शासन में एएसपी सिटी लखनऊ (पूर्वी) के रूप में तैनाती के दौरान सड़क पर गाड़ी खड़ी करने के मुद्दे पर पत्रकारों से अभद्रता पर उन्हें निलंबित भी किया गया था। इस प्रकरण में पत्रकारों ने तत्कालीन सीएम मायावती के आवास पर देर रात तक हंगामा किया था।
यही नहीं, बसपा शासन में अखिलेश यादव को गिरफ्तार करने पर भी वह चर्चा में आए थे। डॉ. अशोक दलित मूवमेंट से जुड़े हुए हैं। उन्हें एक अप्रैल को बहुजन सशक्तिकरण संघ के बैनर तले डॉ. आंबेडकर माह के आयोजन में बतौर मुख्य वक्ता बुलाया गया था।
उनके पिता व सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी देवी प्रसाद अशोक भी बहुजन आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उन्हें कांशीराम का नजदीकी माना जाता था।