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'वो तो जेल से छूट ही जाएगा, तुम्हारा सोचो क्या होगा'

Sun, 17 Apr 2016 03:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 17 Apr 2016 03:59 AM IST
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Ashiana gangrape case victim's father got threatened.
गौरव शुक्ला चेहरा ढ़के हुए - फोटो : amar ujala

‘जिसे तुमने जेल भिजवाया है, वो आज नहीं तो कल बाहर आ जाएगा। लेकिन तुम अपना सोचो, तुम्हारा हम क्या हाल करेंगे...।’ आशियाना दुराचार कांड की पीड़िता के पिता के फोन पर ऐसी धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने शनिवार को इस बारे में बताया कि इन धमकियों की वजह से वह परेशान हैं।

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हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब उन्हें यह धमकियां मिली हैं। दूसरी ओर पीड़िता ने डीजपी को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि गौरव शुक्ला को लखनऊ जेल में विशेष सहूलियतें न दी जाएं।
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धमकियों को लेकर पीड़िता के पिता ने कहा कि फोन पर कोई लगातार धमका रहा है। इन धमकियों में गालियां देना और नुकसान पहुंचाने की बातें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन फोन कॉल की वजह से वह डरे हुए हैं। इस समय उनकी बेटी को पुलिस की सुरक्षा मिली हुई है। हर समय आशियाना थाने से दो पुलिसकर्मी असलहे के साथ उनके साथ रहते हैं। लेकिन उनका कहना है कि पुलिस के साथ होने की वजह से वह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई दफा उन्हें धमकियां मिल चुकी हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की थी। इसमें वे फोन नंबर भी दिए गए थे, जिनसे फोन किए जा रहे थे। अब जैसे-जैसे सजा का दिन करीब आता जा रहा है, फिर से धमकियां दी जाने लगी हैं। वह इसकी शिकायत पुलिस को देंगे।

कैदियों जैसा व्यवहार हो गौरव के साथ...

Ashiana gangrape case victim's father got threatened.
गौरव शुक्ला सफेद शर्ट में - फोटो : amar ujala

उधर पीड़िता ने गौरव शुक्ला को लखनऊ जेल में दी जा रही विशेष सहूलियतों को रोकने के लिए पत्र लिखा है। उसने अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर बताया कि जेल में उस तक क्रीम और परफ्यूम तक पहुंचाया जा रहा है। यह कैसे संभव है? उसके साथ भी बाकी कैदियों जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

पत्र में पीड़िता ने लिखा है कि 11 साल तक गौरव शुक्ला अपनी उम्र को लेकर विवाद पैदा करके बचता रहा है। अब जब कोर्ट ने उसे दोषी करार दे दिया है और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, तब उससे वीआईपी जैसे रखा जाएगा तो यह पीड़िता के मनोबल को गिराने वाला साबित होगा।

उसने अपने जीवन के हर एक दिन गौरव शुक्ला को जेल भेजे जाने का इंतजार किया है। अब जब वह जेल भेजा जा चुका है तो उससे सामान्य कैदियों जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

बाल सुधारगृह में भी मिला था खास रुतबा
पीड़िता ने पत्र में बताया है कि 2 मई 2005 को दुराचार करने वाले गौरव शुक्ला को गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे तब भी खास सहूलियतें दी गई थीं। उम्र को लेकर पैदा किए विवाद की वजह से उसे संप्रेक्षण गृह में भेजा गया था, लेकिन यहां बीमारी का बहाना बनाया था। इसके बाद 10 अक्तूबर 2005 को उसे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती किया गया था। तब भी इसकी शिकायत पुलिस व सरकार से की गई थी।

एसी चैंबर में बैठकर पल-पल की खबर लेता रहा गौरव

Ashiana gangrape case victim's father got threatened.

गौरव शुक्ला को शनिवार को सजा सुनाई जानी थी। इसके बावजूद सजा का खौफ उसके चेहरे पर नहीं दिखा। शनिवार की सुबह जब वह कचहरी पहुंचा तो काफी निश्चिंत लग रहा था। लॉकअप के बजाय वह पास ही स्थित सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी के एसी चैंबर में आसन जमा कर बैठ गया।

परिवारीजन उसके साथ मौजूद थे और परिचित उसकी आवभगत में जुटे थे। कोई पराग बूथ से केसरवाला दूध और पेड़े ला रहा था तो कोई दही और मट्ठा उठा लाया। इस दौरान कोर्टरूम में मौजूद अपने साथियों से गौरव पल-पल की खबर लेता रहा।

गौरव को सजा सुनाई जानी थी। इसके चलते कचहरी में खासी गहमा-गहमी थी। उसके समर्थक और करीबी सुबह ठीक दस बजे ही सातवीं मंजिल पर स्थित कोर्टरूम के आसपास डट गए थे। ठीक 10.16 बजे गौरव भी जेल से कचहरी के लिए रवाना हुआ।

दोपहर तक वह कोर्ट नहीं पहुंचा तो समर्थकों ने फोन मिलाना शुरू किया। पता चला गौरव नीचे ही है। लगभग सभी समर्थक नीचे आ गए। यहां गौरव एसी चैंबर में दरबार लगाए बैठा था। कोर्टरूम में मौजूद साथी उसे पल-पल की गतिविधियों से अपडेट कर रहे थे। गौरव के लिए घर का खाना भी आया। खाना खाने के बाद उसने साथियों से गप्पे लड़ाईं। कुछ देर हंसी-मजाक का माहौल रहा।

परिवार के सदस्यों ने जेल में व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह पुलिस वैन में बैठकर जेल के लिए रवाना हो गया।

सजा की संभावनाओं पर वकीलों से की चर्चा

Ashiana gangrape case victim's father got threatened.

दोपहर को जैसे ही सजा टलने की जानकारी मिली, वकील के चैंबर में मिश्रित प्रतिक्रिया होने लगी। एक के मुंह से निकला, फिर लटका दिया। आज ही खत्म कर देते मामला।

एक वकील बोले, सजा का पता चल जाता तो आगे की कार्रवाई की जाती। सजा टलने के बाद गौरव ने अपने वकील साथियों से आईपीसी की धाराओं पर संभावित सजा और जुर्माना की धनराशि को लेकर चर्चा की। वकीलों ने अधिकतम सजा की सभावनाएं बताते हुए हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही।

 

लौटाया खाने का सामान, कहा-जेल की कैंटीन में सब मिलता है

Ashiana gangrape case victim's father got threatened.

गौरव के लिए घर में बनाया गया खाने का सामान आया था। पुलिस वैन में बैठते ही गौरव के रिश्तेदार ने उसे बैग दिया लेकिन उसने लौटा दिया। रिश्तेदारों ने बैग खोलकर भीतर रखे सामान को दिखाया।

गौरव ने एक बार बैग में झांकने के बाद ‘न’ में सिर हिलाया तो रिश्तेदार बैग लेकर बाहर आ गया। उसने कहा कि जेल की कैंटीन में खाने का अच्छा सामान मिलता है, इसलिए बैग की जरूरत नहीं है।

जाते-जाते बोला, जेल में सुविधाओं का इंतजाम करो
पुलिस सूत्रों का कहना था कि गौरव बार-बार अपने साथियों से जेल में सुविधाओं का इंतजाम करने के लिए कह रहा था। उसने कहा कि बैरक में काफी गरमी है। बिस्तर गंदे हैं। मच्छर काटते हैं। खाना भी बेस्वाद है। इस पर उसके करीबियों ने जल्द सारी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।

सूत्रों का कहना है कि गौरव को बीमारी का बहाना बनाकर जेल के अस्पताल में दाखिल कराया जा सकता है या फिर जेल में बंद रसूखदार बंदियों के साथ रखवाया जा सकता है। फिलहाल वह जिस बैरक में है, वहां कई और रसूखदार लोग हैं।

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