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माता- पिता को अपनी गलती पर हुआ पछतावा, बोले ‘हमने जो भूल की, उसे आप कभी न करें’

Sat, 24 Nov 2018 01:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 24 Nov 2018 01:08 PM IST
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asha jyoti kendra helped to find parents of new born baby
प्रभारी अर्चना सिंह बच्ची को गोद में लिए हुए - फोटो : amar ujala

ये एक कोशिश है उस मासूम के एहसासों को शब्द देने की, जिसे दुनिया में लाकर माता-पिता ने अनाथ की तरह जीने को छोड़ दिया, लेकिन समय रहते रिश्तों को संवारने की कोशिश हुई। ....और एक बेटी मां-बाप के साये से दूर होने से बच गई।

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 मैं बोल नहीं सकती, क्योंकि अभी तो मैं इस दुनिया में आई हूं।...पर बोलना चाहती हूं, कहना चाहती हूं का शुक्रिया, जिन्होंने मुझे अनाथ होने से बचा लिया। वरना, मैं भी माता-पिता के होते हुए किसी अनाथालय में पल रही होती। मेरा नामकरण अभी नहीं हुआ, क्योंकि मुझे चंद ही रोज हुए हैं।

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इस दुनिया में आए हुए। मेरा परिचय सिर्फ इतना है कि मैं एक बेटी हूं। मुझे जन्म देने के बाद मेरी मां अपनी किसी लाचारी में अस्पताल में छोड़कर चली गई। मेरे आने से पहले ही मेरे पिता ने मेरी मां से मुंह मोड़ लिया। मैं माता-पिता से दूर, भूख से तड़पती अस्पताल में बिलख रही थी।

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डॉक्टर-नर्स सभी पशोपेश में थे, कि क्या करें? कहां छोड़ आएं मुझे। फिर किसी ने इसकी खबर 181 आशा ज्योति केंद्र को दी। केंद्र ने पहले तो मुझे अनाथालय में छोड़ने का मन बनाया, लेकिन अचानक से उनका इरादा बदला और शुरू हुई मेरे माता-पिता की तलाश।

 

दोनों मिल तो गए, लेकिन मुझे अपनाने की हिम्मत नहीं दिखा सके। बार-बार समझाने के बाद उन्होंने न जाने कहां से हिम्मत जुटाई और साथ रहने को, शादी करने को राजी हो गए। आर्यसमाज मंदिर में शुक्रवार को उन्होंने शादी कर ली और मुझे अपना लिया।

कोशिश रिश्तों को संवारने की होनी चाहिए

asha jyoti kendra helped to find parents of new born baby
ये ही बच्ची छोड़ी गई - फोटो : amar ujala
शादी के बाद बेटी को गोद लिए दुलार रहे उसके माता-पिता ने हाथ जोड़ कर सबसे माफी मांगी। कहा, हमसे गलती हुई। एक गलती को छिपाने के लिए हमने अपनी बेटी को अनाथ छोड़ दिया था। हमें अपनी भूल का पछतावा है, पर एक निवेदन हम युवाओं से करना चाहते हैं कि हम राह भटक गए थे, लेकिन आप ऐसा न करें। यदि हमें अपनी गलती का अहसास नहीं होता तो हमारी बेटी को सारी जिंदगी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता।

दोनों ही नासमझी कर गए थे। हमें लोकबंधु अस्पताल से सूचना मिली कि बच्ची को जन्म देकर युवती और उसके घरवाले उसे छोड़कर चले गए। हमारे पास भी उसे अनाथालय को सौंपना ही अंतिम विकल्प था। उससे पहले हम एक कोशिश करना चाहते थे कि शायद लड़का-लड़की को समझ आ जाए।

दोनों का पता ढूंढा, बुलवाया और कई चरणों में समझाया। काउंसलिंग का असर ये हुआ कि वे शादी के लिए राजी हो गए। फिर हमने शुक्रवार को लिखापढ़ी और लिखित आश्वासन के बाद उनकी शादी कराकर उन्हें बेटी को सौंप दिया। ऐसे मामलों में अस्पतालों की सतर्कता बहुत जरूरी है। यदि हमें सही समय पर सूचना मिल जाए तो हमारे लिए काम आसान हो जाता है। - अर्चना सिंह, प्रभारी, 181 आशा ज्योति केंद्र
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