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UP News: पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों की तैनाती में जमकर मनमानी, मलाईदार सीटों के खेल के आगे सारे नियम-कायदे फेल
Sun, 22 May 2022 04:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजीत बिसारिया, लखनऊ
अजीत बिसारिया, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 22 May 2022 04:29 AM IST
सार
नियम है कि 3 साल के बाद हर हाल में पटल बदल दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां 17-17 साल से एक ही सीट पर कर्मचारी जमे हैं। इतना ही नहीं मलाईदार माने जाने वाले वर्गों (सेक्शन) में जरूरत से ज्यादा कार्मिक हैं तो बाकी वर्गों में कर्मचारियों की कमी रहती है।
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पीडब्ल्यूडी
- फोटो : social media
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विस्तार
पीडब्ल्यूडी में कर्मचारियों की तैनाती में जमकर मनमानी चल रही है। नियम है कि 3 साल के बाद हर हाल में पटल बदल दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां 17-17 साल से एक ही सीट पर कर्मचारी जमे हैं। इतना ही नहीं मलाईदार माने जाने वाले वर्गों (सेक्शन) में जरूरत से ज्यादा कार्मिक हैं तो बाकी वर्गों में कर्मचारियों की कमी रहती है।
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मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने 13 मई को जारी अपने पत्र में कहा है कि समूह ‘ग’ के कर्मियों का प्रत्येक 3 वर्ष के बाद पटल या क्षेत्र परिवर्तित किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि अभी इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन नहीं हो रहा है। मुख्य सचिव के निर्देश हैं कि कर्मचारियों का क्षेत्र परिवर्तन प्रत्येक 3 वर्ष के बाद हर साल 30 जून तक अनिवार्य रूप से कर करके विभागाध्यक्ष 30 जून तक इस बाबत प्रमाणपत्र भी दें। लेकिन पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में तैनाती की पड़़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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एक बाबू वर्ष 2003 से 2017 तक एक ही सेक्शन ‘सामान्य वर्ग’ में तैनात रहा। फिर उन्हें इस सीट से कुछ महीनों के लिए हटाया गया और कुछ दिन बाद उसे वहीं तैनाती दे दी गई। इस तरह से अब प्रधान सहायक बन चुका यह कर्मचारी एक ही पटल पर करीब 17 वर्ष पूरे कर चुका है। सामान्य वर्ग में ही एक वरिष्ठ सहायक 12 वर्ष से जमा है। एक अन्य प्रधान सहायक तो 27 अगस्त 2012 से अनवरत एक ही सेक्शन में सेवाएं दे रहे हैं। जनरल सेक्शन में कोई बाबू 9 साल से ज्यादा तो कोई 8 वर्ष से ज्यादा समय से तैनात है। 5 से 8 वर्ष की तैनाती अवधि पूरी कर चुके कर्मचारियों की संख्या भी अच्छी खासी है। यह तो एक सेक्शन का हाल है। पीडब्ल्यूडी के ही एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि अन्य सेक्शन में भी यही स्थिति है।
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मलाईदार सेक्शन में तैनाती की होड़
पीडब्ल्यूडी में सेक्शन को ‘वर्ग’ कहा जाता है। यातायात वर्ग, व्यवस्थापन ‘घ’ वर्ग और बजट ‘क’ वर्ग में स्वीकृत पदों से ज्यादा प्रधान सहायक तैनात हैं। प्रधान सहायकों को लेकर यही स्थिति परिवाद ‘ख’ वर्ग, सामान्य वर्ग, अधिप्राप्ति वर्ग और लेखा वर्ग में हैं। व्यवस्थापन ‘ख’ वर्ग, बजट ‘ख’ वर्ग और व्यवस्थापन ‘क’ वर्ग में प्रधान सहायक स्वीकृत पदों से कम हैं। व्यवस्थापन ‘घ’ और व्यवस्थापन ‘ख’ वर्ग में वरिष्ठ सहायकों की भरमार है तो कई सेक्शन में यह स्वीकृत पदों के मुकाबले कम हैं। कमोबेश यही स्थिति विभिन्न वर्गों में कनिष्ठ सहायकों की तैनाती को लेकर भी है।
स्वीकृत पदों से ज्यादा वरिष्ठ सहायक
रिकॉर्ड के मुताबिक विभिन्न वर्गों में वरिष्ठ सहायकों की स्वीकृत संख्या 52 है, लेकिन तैनात 59 हैं। जब शासन से पूछा जाता है तो जवाब दिया जाता है कि पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक के 299 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 261 ही कार्यरत हैं। संबद्धता (अटैच किए जाना) का खेल भी ऐसा है कि तमाम कर्मचारी अपनी नौकरी संबद्ध रहकर ही पूरी कर लेते हैं। यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
30 जून को पता चलेगी असल स्थिति
पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने पारदर्शी ढंग से निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं और पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष मनोज गुप्ता भी इन निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करने का दावा कर रहे हैं। अब यह तो 30 जून को ही पता चल सकेगा कि मुख्य सचिव के 13 मई के आदेश का कितना पालन होता है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि पारदर्शिता की सिर्फ घोषणा की जा रही है या हकीकत में इसका पालन भी हो रहा है।